फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी के क्षेत्र में काम करने वाले गिग वर्कर्स के सामाजिक और वित्तीय अधिकारों को लेकर ऑस्ट्रेलिया में एक नया कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। अब डिलीवरी साझेदारों को प्रत्येक ऑर्डर के अनिश्चित कमीशन पर निर्भर रहने के बजाय एक तय न्यूनतम दर से भुगतान प्राप्त होगा। फेयर वर्क कमीशन द्वारा निर्धारित इस नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को अपने डिलीवरी साझेदारों को कम से कम 31.30 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति घंटे की दर से भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय मुद्रा के संदर्भ में देखें तो यह राशि लगभग ₹2,700 प्रति घंटा बनती है, जबकि कुछ गणनाओं में न्यूनतम कमाई का दायरा ₹2000 प्रति घंटे से अधिक रहता है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर किसी हादसे की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का प्रावधान भी लागू किया जा रहा है।
राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी से अधिक तय की गई है नई न्यूनतम दर
फेयर वर्क कमीशन द्वारा निर्धारित A$31.30 प्रति घंटे का यह नया मानक ऑस्ट्रेलिया के सामान्य राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन से भी अधिक रखा गया है। देश में वर्तमान सामान्य न्यूनतम मजदूरी A$26.44 प्रति घंटा है। इस अंतर से यह स्पष्ट होता है कि नियम बनाने वाली संस्था ने गिग वर्क में शामिल कठिन परिस्थितियों, शारीरिक श्रम और ईंधन जैसे व्यक्तिगत खर्चों का संज्ञान लिया है। लंबे समय से प्लेटफॉर्म आधारित काम को एक स्वतंत्र अनुबंध प्रणाली के रूप में देखा जाता रहा है, जिसके कारण इन कर्मियों को किसी भी प्रकार की न्यूनतम वेतन गारंटी हासिल नहीं थी। यह नया फैसला उस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से बदल देगा और डिलीवरी कर्मियों के लिए एक बुनियादी आर्थिक सुरक्षा तंत्र सुनिश्चित करेगा।
ऑर्डर स्वीकृति से पूर्ति तक का समय ही माना जाएगा 'एंगेज्ड टाइम'
इस भुगतान व्यवस्था की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि न्यूनतम वेतन दर हर उस समय पर लागू नहीं होगी जब कर्मी किसी ऐप पर केवल ऑनलाइन स्थिति में मौजूद रहता है। फेयर वर्क कमीशन ने स्पष्ट किया है कि यह न्यूनतम भुगतान केवल उस अवधि के लिए बाध्यकारी होगा जिसे आधिकारिक तौर पर 'एंगेज्ड टाइम' का नाम दिया गया है। एंगेज्ड टाइम का तात्पर्य उस समय से है जब कोई डिलीवरी कर्मी ऐप के माध्यम से किसी ऑर्डर असाइनमेंट को स्वीकार करता है और उसे ग्राहक तक पहुंचाकर प्रक्रिया पूरी करता है। यदि कोई वर्कर ऐप चालू करके ऑर्डर का इंतजार कर रहा है, तो उस खाली समय के लिए इस विशेष दर से भुगतान पाने का अधिकार नहीं होगा। यही विशिष्ट शर्त इस कानून को पारंपरिक निश्चित नौकरियों के न्यूनतम वेतन नियमों से अलग बनाती है।
व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुरक्षा और वाहनों का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस
कमाई के नए मानकों के अलावा इस आदेश में डिलीवरी करने वाली कंपनियों के लिए अपने कर्मियों हेतु व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुरक्षा देना भी अनिवार्य किया गया है। कंपनियों को अपने डिलीवरी साझेदारों को एक उचित न्यूनतम स्तर का बीमा कवर उपलब्ध कराना होगा ताकि काम के दौरान चोट लगने या दुर्घटना होने पर उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके। हालांकि आदेश के भीतर बीमा राशि की कोई निश्चित सीमा तय नहीं की गई है और कंपनियों को एक उपयुक्त मानक बनाए रखने की छूट दी गई है। दूसरी ओर, डिलीवरी कार्य के लिए उपयोग किए जाने वाले दोपहिया या चौपहिया वाहनों का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कराने और उसे वैध बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी स्वयं डिलीवरी वर्कर्स की बनी रहेगी।
यूनियनों और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स का संयुक्त बयान
इस फैसले का ऑस्ट्रेलिया की ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन ने पुरजोर स्वागत किया है। संगठन के नेशनल सेक्रेटरी माइकल केन ने उबर ईट्स और डूरडैश जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ जारी एक संयुक्त बयान में इस निर्णय को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स को ऑस्ट्रेलिया की कार्यस्थल व्यवस्थाओं से बहुत लंबे समय तक बाहर रखा गया था, लेकिन आने वाले समय में वे पूरी तरह से विश्वस्तरीय श्रम मानकों के हकदार होंगे। दूसरी तरफ उबर ईट्स और डूरडैश ने स्वीकार किया कि यह नया कानून यह साबित करता है कि मजबूत कर्मचारी सुरक्षा और काम की लचीली समय-सारणी दोनों एक साथ सुचारू रूप से आगे बढ़ सकते हैं।
संसदीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का प्रभाव
ऑस्ट्रेलिया में गिग वर्कर्स के अधिकारों को लेकर विधायी प्रक्रिया की शुरुआत वर्ष 2023 और 2024 के दौरान संसद द्वारा पारित कानूनों से हुई थी। इन कानूनों ने फेयर वर्क कमीशन को गिग इकॉनमी के भीतर न्यूनतम वेतन और सुरक्षा शर्तें तय करने के कानूनी अधिकार प्रदान किए थे। यह बदलाव केवल ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं। जून 2026 में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन ने भी गिग वर्कर्स के सामाजिक लाभों, सुरक्षा और वेतन से जुड़े पहले बाध्यकारी रोजगार मानकों को अपनाया था, जिन्हें विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा मंजूरी मिलना अभी बाकी है। ऑस्ट्रेलिया का 17 अगस्त 2026 से लागू होने वाला यह मॉडल लगभग 250,000 वर्कर्स के जीवन में सीधा बदलाव लाएगा।



















