फरीदाबाद में हर मार्ग उच्च श्रेणी के एक्सप्रेसवे जैसा सुगम नहीं है, जहां वाहन फर्राटा भरते हुए चंद मिनटों में राजधानी दिल्ली पहुंच जाएं। शहर से ग्रामीण इलाकों की तरफ रुख करने पर कई मार्गों पर बिखरे गड्ढे और बदहाल डामर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। साहुपुरा मार्ग से रोजाना लगभग बीस गांवों के बाशिंदे आवागमन करते हैं, वहीं पल्ला थाना मार्ग, जिसे पल्ला-बसंतपुर या पल्ला-सेहतपुर मुख्य सड़क भी कहा जाता है, लंबे अरसे से अपनी खस्ताहाली के कारण परेशानी का सबब बना हुआ है। मानसून के दौरान ये गड्ढे जलभराव से पूरी तरह ढक जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडराने लगता है। सड़क पर अचानक वाहन धंसने से रीढ़ और कटि प्रदेश पर पड़ने वाले दबाव, दुर्घटना के बाद बरती जाने वाली प्राथमिक सावधानियों और कमर दर्द के विकराल रूप धारण करने के संकेतों को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों ने अहम जानकारियां साझा की हैं।
बरसात के दिनों में हादसों का बढ़ता ग्राफ
फरीदाबाद के मैरेंगो एशिया अस्पताल के न्यूरोसर्जन एवं विभाग अध्यक्ष डॉ. सचिन गोयल का कहना है कि वर्षा ऋतु के दौरान सड़क के गड्ढे बड़ी चुनौती बन जाते हैं। जब आप दोपहिया वाहन चला रहे होते हैं और मार्ग पर पानी जमा होता है, तो गढ्ढे का सही आकलन करना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में बाइक या स्कूटी का संतुलन बिगड़ सकता है और चालक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। अस्पताल में सिर पर गंभीर चोटों के साथ कई मरीज पहुंचते हैं, जबकि कुछ मामलों में स्पाइनल कॉर्ड में फ्रैक्चर तक की शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए दोपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट पहनना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बारिश के मौसम में सड़कों की खराब हालत जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है.
गड्ढों में वाहन धंसने से रीढ़ पर सीधा असर
डॉ. सचिन गोयल स्पष्ट करते हैं कि गड्ढे में वाहन के अचानक उतरने या जोरदार उछाल आने से रीढ़ की हड्डी को भारी क्षति पहुंच सकती है। कई परिदृश्यों में रीढ़ की हड्डी टूटने यानी फ्रैक्चर होने का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। विशेष तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक साबित होती है, क्योंकि ढलती उम्र के साथ उनकी हड्डियां प्राकृतिक रूप से कमजोर होने लगती हैं। अक्सर बुजुर्ग परिवार के किसी सदस्य के साथ दोपहिया वाहन पर पीछे बैठे होते हैं और जलभराव के बीच गाड़ी फिसलने या तीव्र झटके के कारण नीचे गिर जाते हैं, जिससे उन्हें स्पाइनल फ्रैक्चर होने की आशंका काफी बढ़ जाती है.
दुर्घटना के तुरंत बाद खुद को परखें
डॉ. सचिन गोयल सलाह देते हैं कि यदि आप सड़क के किसी गड्ढे के कारण दुर्घटना का शिकार हो जाएं, तो सबसे पहले मानसिक रूप से संयम रखकर अपनी स्थिति का जायजा लें। सबसे पहले यह जांचें कि क्या आपके सिर पर कोई आघात तो नहीं पहुंचा है। शरीर के अन्य हिस्सों में लगी चोटों और रक्तस्राव की स्थिति को देखें। यदि किसी अंग से अधिक खून बह रहा है, तो उसे प्राथमिक तौर पर हाथ से दबाकर रोकने का प्रयास करें। हादसे के बाद यह सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है कि आपकी कमर सुरक्षित है या नहीं तथा हाथ-पैर हिलाने में किसी तरह की असहजता या बाधा तो महसूस नहीं हो रही है.
गंभीर चोट की स्थिति में शरीर को रखें स्थिर
डॉ. सचिन गोयल के अनुसार, यदि आपको यह आभास हो कि चोट गंभीर प्रकृति की है या कटि क्षेत्र में असहनीय पीड़ा हो रही है, तो अपनी जगह से बिल्कुल न हिलें। ऐसी दुर्घटना के बाद शरीर को अनावश्यक रूप से मोड़ने या उठने-बैठنے से बचना चाहिए। जब तक चिकित्सा सहायता या एम्बुलेंस मौके पर न पहुंचे, तब तक जमीन पर लेटे रहना ही बुद्धिमानी है। बरसात के इस मौसम में इस तरह की चोटों से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जाता है और आपातकालीन विभाग में हर रोज तीन से चार ऐसे मामले पहुंच जाते हैं.
बारिश के दिनों में ड्राइविंग के वक्त बरतें एहतियात
डॉ. सचिन गोयल बताते हैं कि गड्ढों के खतरे से बचने के लिए वर्षा के समय वाहनों की रफ्तार धीमी रखनी चाहिए। मार्ग पर बने गड्ढे जब बारिश के पानी में छिप जाते हैं, तो उनकी गहराई का अनुमान लगाना मु मुमकिन नहीं रहता। इसलिए बाइक या कार को नियंत्रण में और कम गति पर चलाना ही सुरक्षा की गारंटी है। दोपहिया चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता जीवनरक्षा के लिहाज से सबसे अहम कदम है, जिसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए.
तीव्र झटके से मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या
डॉ. सचिन गोयल का कहना है कि जब कोई बाइक या स्कूटी किसी गहरे गड्ढे से गुजरती है, तो शरीर को एक तेज और अचानक झटका लगता है। इस तीव्र आघात के कारण कमर की मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव पैदा हो सकता है। कई बार इस प्रकार के मस्कुलर दर्द को पूरी तरह ठीक होने में एक महीने तक का वक्त भी लग सकता है। यदि आपको वाहन चलाते समय ऐसा कोई तेज झटका लगा है और उसके बाद भी शरीर में लगातार दर्द बना हुआ है, तो बिना देर किए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।



















