देश के सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने की कोशिश में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दो बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि अब सहकारी क्षेत्र में एक जीवन बीमा कंपनी बनाई जाएगी, और साथ ही सहकारी मॉडल पर चलने वाली कैब सेवा भारत टैक्सी अगले दो साल में देश के 500 शहरों तक पहुंच जाएगी। शाह राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जो सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के मौके पर हुआ। उन्होंने इन कदमों को सहकारी कारोबार का दायरा बढ़ाने की मुहिम से जोड़ा।
शाह ने बताया कि भारत में इस समय करीब 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं हैं, जिनसे 30 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने इस पूरे क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई सुधारों को आगे बढ़ाया है। उनका कहना था कि लक्ष्य ऐसी व्यवस्था खड़ी करने का है जो पारदर्शी हो और तकनीक पर आधारित हो। शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में सहकारी आंदोलन की अनदेखी हुई, और मंत्रालय ने इसी आंदोलन को नई जान दी है।
भारत टैक्सी का बढ़ता दायरा
शाह के मुताबिक सहकारी कैब प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि दो साल के भीतर इसका विस्तार 500 शहरों तक होगा। इसी क्रम में उन्होंने कहा, "हम सहकारी क्षेत्र में एक जीवन बीमा कंपनी स्थापित करेंगे। इससे बीमा क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं की तरक्की में मदद मिलेगी।" उन्होंने याद दिलाया कि इफको-टोकियो पहले से ही बीमा कारोबार में सक्रिय है।
शाह ने बताया कि देश में अभी 26 जीवन बीमा कंपनियां काम कर रही हैं। भारत टैक्सी का संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के तहत होता है। यह एक ड्राइवर केंद्रित मोबिलिटी प्लेटफॉर्म है, जो सहकारी मॉडल पर चलता है। भारत टैक्सी से अब तक 6.37 लाख ड्राइवर और 35.77 लाख ग्राहक पंजीकृत हो चुके हैं। शाह ने इस सेवा को पुराने क्षेत्रों से आगे बढ़कर सहकारिता के नए कारोबारी क्षेत्रों से जोड़ा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार भारत टैक्सी इस समय दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर और कानपुर में चल रही है। बयान में कहा गया कि जल्द ही यह सेवा रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर में भी शुरू होगी। बयान में यह भी जोड़ा गया कि यह विस्तार आने वाले कुछ महीनों में होगा। शाह ने इस विस्तार को सहकारिता की व्यापक बढ़ोतरी का हिस्सा बताया।
डेयरी और चीनी से आगे बढ़ती सहकारिता
शाह ने कहा कि सहकारी संस्थाएं अब डेयरी और चीनी जैसे परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़कर कई नए क्षेत्रों में कदम रख रही हैं। उन्होंने खाद और बैंकिंग को भी परंपरागत क्षेत्रों के रूप में गिनाया। उनके मुताबिक कृषि ऋण में सहकारी संस्थाओं की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। इसके अलावा वे खाद वितरण का 35 प्रतिशत संभालती हैं, और चीनी उत्पादन में उनका हिस्सा 31 प्रतिशत है।
शाह ने बताया कि मॉडल उपनियमों की वजह से अब PACS को 25 से ज्यादा गतिविधियां करने की छूट मिल गई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत सभी राज्यों ने इन उपनियमों को अपनाया है। बयान के अनुसार अब PACS सिर्फ कर्ज देने तक सीमित नहीं रहे। ये संस्थाएं खुदरा कारोबार, भंडारण, स्वास्थ्य सेवा, ईंधन और डिजिटल सेवाओं तक फैल चुकी हैं। शाह ने इसे मजबूत स्थानीय संस्थाओं की दिशा में बढ़ता कदम बताया।
बयान के मुताबिक 394 PACS ने खुदरा ईंधन आउटलेट के लिए आवेदन किया है, जिनमें से तीन आउटलेट शुरू भी हो चुके हैं। बयान में यह भी कहा गया कि अब 54,000 से ज्यादा PACS कॉमन सर्विस सेंटर के तौर पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही 4,248 PACS को जन औषधि केंद्र चलाने की मंजूरी मिल चुकी है। शाह ने कहा कि इन कदमों का मकसद सदस्यों के लिए सेवाओं का दायरा बढ़ाना है।
बीज उत्पादन और नई राष्ट्रीय संस्थाएं
शाह ने बताया कि बीज उत्पादन के लिए खास तौर पर एक राष्ट्रीय सहकारी संस्था बनाई गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह संस्था तीन साल में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादक संस्था बन जाएगी। उन्होंने इसे सहकारी काम को बड़े पैमाने पर ले जाने वाली दूसरी राष्ट्रीय कोशिशों के साथ रखा। शाह ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने पूरे क्षेत्र की समस्याओं और संभावनाओं का खाका तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने एक सहकारी क्षेत्र डेटाबेस भी बनाया है, जो कमियों को पहचानने और विस्तार में मदद करेगा। शाह ने गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की भी घोषणा की। उनके मुताबिक यह यूनिवर्सिटी मानव संसाधन की कमी को दूर करेगी और बैंकिंग, डेयरी, मार्केटिंग, कृषि तथा खाद जैसे क्षेत्रों के लिए पेशेवर तैयार करेगी।
शाह ने कहा कि पेशेवरों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होगी। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य प्राथमिक सहकारी समितियों से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक चरणबद्ध तरीके से पेशेवर प्रबंधन लागू करना है। इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, काम की कार्यक्षमता सुधरेगी और नियुक्ति से जुड़े भ्रष्टाचार पर भी असरदार रोक लगेगी।" उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार खत्म होने से जनता का भरोसा मजबूत होगा।
कानून में बदलाव और बैंकों की स्थिति
शाह ने बताया कि मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 में 50 अहम संशोधन किए गए हैं। उनके मुताबिक इन बदलावों ने व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और लोकतांत्रिक बनाया है। उन्होंने बताया कि नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियां बनाई गई हैं, जिनमें से तीन बिल्कुल नई हैं। शाह ने यह भी कहा कि सहकारी क्षेत्र में कर्ज का प्रवाह बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंक और जिला सहकारी बैंक लगातार आगे बढ़ रहे हैं। शाह के मुताबिक जिला सहकारी बैंकों का कुल कारोबार 25 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जो पहले 19.6 लाख करोड़ रुपये था। उन्होंने बताया कि शहरी सहकारी बैंकों का शुद्ध मुनाफा लगभग दोगुना हुआ है। साथ ही सकल NPA 12.8 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत पर आ गया है।
जैविक खेती और DAP से किनारा
शाह ने जैविक खेती और रासायनिक खाद के कम इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "हम चीनी और डेयरी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत सर्कुलर इकोनॉमी ला रहे हैं।" उन्होंने बताया कि DAP के विकल्प के रूप में जैविक खाद तैयार की जाएगी, जो DAP से सस्ती और गुणवत्ता में बेहतर होगी। शाह ने किसानों से अपील की कि वे DAP यानी डाई-अमोनियम फॉस्फेट का इस्तेमाल छोड़ें।
शाह ने कहा कि सहकारी क्षेत्र 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सहारा दे सकता है। उनके मुताबिक ये सुधार और नए उपक्रम इस क्षेत्र की विश्वसनीयता और क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय का पूरा काम पारदर्शिता और लोकतांत्रिक कामकाज पर केंद्रित है। कार्यक्रम के दौरान शाह ने कई बड़ी परियोजनाओं और पहलों की आधारशिला रखी और कुछ का उद्घाटन भी किया। उन्होंने इन सबको सहकारिता की व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया।











