देश के सबसे प्रमुख महानगरों में शुमार हैदराबाद की आज की चमक-दमक और आधुनिक शहरी स्वरूप को देखकर यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि यहां की कई गगनचुंबी इमारतें और व्यस्त सड़कें कभी शांत ग्रामीण परिवेश और पथरीली जमीनों का हिस्सा थीं। नब्बे के दशक के शुरुआती दौर में साइबराबाद के रूप में शुरू हुई इस विकास यात्रा ने शहर के भूगोल को पूरी तरह से नया आकार दे दिया और आज यह दुनिया के सबसे तेजी से उभरते हुए तकनीकी और कॉर्पोरेट केंद्रों में अपनी मजबूत जगह बना चुका है। बीते दो से तीन दशकों के भीतर जिन पांच इलाकों ने अपनी पहचान एक साधारण गांव से बदलकर वैश्विक स्तर के आईटी और व्यावसायिक हब के रूप में दर्ज कराई है, उनकी विकास गाथा बेहद दिलचस्प है।
माधापुर का ऐतिहासिक बदलाव
वर्ष 1997 से पहले माधापुर की पहचान एक बंजर और पथरीले गांव के रूप में हुआ करती थी जहां आबादी और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था। नब्बे के दशक के अंतिम वर्षों में आंध्र प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को एक नया तकनीकी केंद्र बनाने का बड़ा निर्णय लिया, जिसके तहत साइबर टावर्स का निर्माण किया गया और हाईटेक सिटी का औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह कदम इस पूरे इलाके के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ और आज माधापुर हैदराबाद के संपूर्ण आईटी साम्राज्य का मुख्य केंद्र बन चुका है। वर्तमान समय में यह क्षेत्र दुनिया भर की दिग्गज आईटी कंपनियों, प्रीमियम खान-पान के स्थानों, शानदार आवासीय परिसरों और बेहद सक्रिय नाइटलाइफ के लिए पहचाना जाता है।
गच्चीबाउली का वैश्विक मंच पर उभार
ठीक इसी तरह, वर्ष 1998 से पहले गच्चीबाउली पारंपरिक बावड़ियों और कृषि कार्यों में उपयोग होने वाली जमीनों वाला एक छोटा सा ग्रामीण क्षेत्र हुआ करता था। साल 1998 में जब अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने रेडमंड के बाहर अपना पहला माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर इसी जगह स्थापित करने की घोषणा की, तो यहां की तस्वीर ही बदल गई। इसके बाद यहां गच्चीबाउली इंडोर स्टेडियम और जीएमसी बालयोगी एथलेटिक स्टेडियम जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल परिसर खड़े हुए, साथ ही गूगल, एक्सेंचर और एनवीडिया जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय भी स्थापित हुए। आज यह संपूर्ण क्षेत्र शहर के सबसे बड़े तकनीकी और शैक्षणिक केंद्रों में से एक है।
कोंडापुर का आवासीय और व्यावसायिक विस्तार
निसंदेह रूप से दो हजार के दशक के शुरुआती वर्षों तक कोंडापुर एक विशुद्ध कृषि प्रधान गांव था जहां दूर-दूर तक केवल खेत और हरियाली ही नजर आती थी। जब माधापुर और गच्चीबाउली के आईटी क्षेत्रों में कंपनियों का विस्तार अत्यधिक तेजी से होने लगा, तो वहां काम करने वाले कर्मचारियों के रहने के लिए आवासीय जमीनों की मांग में भारी उछाल आया। माधापुर के बिल्कुल नजदीक स्थित होने के कारण यह क्षेत्र प्रॉपर्टी डेवलपर्स की पहली पसंद बन गया और आज यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण रेजिडेंशियल तथा कमर्शियल हॉटस्पॉट के रूप में स्थापित हो चुका है। वर्तमान में यहां शरत सिटी कैपिटल मॉल, बॉटनिकल गार्डन और अनगिनत ऊंची आवासीय सोसाइटियां मौजूद हैं।
मणिकोंडा की रियल एस्टेट में छलांग
इसी क्रम में दो हजार के दशक के मध्य तक मणिकोंडा शहर की बाहरी सीमा पर बसा एक ऐसा परिधीय गांव था जहां मूलभूत नागरिक सुविधाएं भी बेहद सीमित हुआ करती थीं। नेहरू आउटर रिंग रोड के निर्माण और राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधी संपर्कता मिलने के बाद मणिकोंडा के रियल एस्टेट बाजार में अचानक अभूतपूर्व तेजी देखी गई। गच्चीबाउली और फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट के बेहद करीब होने की वजह से यह क्षेत्र आईटी क्षेत्र के पेशेवरों के लिए सबसे पसंदीदा रिहायशी ठिकाना बन गया है, जहां आज कई विशाल कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, अंतरराष्ट्रीय स्कूल और आधुनिक गेटेड कम्युनिटीज बसाई जा चुकी हैं।
पुप्पलगुडा का नया प्रीमियम अवतार
वर्ष 2020 तक हैदराबाद के सुदूर छोर पर बसा पुप्पलगुडा एक अत्यंत शांत और साधारण गांव हुआ करता था, लेकिन फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट और गच्चीबाउली में जमीनों की बढ़ती कमी और भारी मांग के कारण तेलंगाना सरकार ने इस क्षेत्र की ओर विशेष ध्यान दिया। हाल ही में इस इलाके में चार सौ पचास एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैले आईटी नॉलेज हब के निर्माण की घोषणा की गई है, जिससे पिछले चार से पांच वर्षों में यहां बहुमंजिला लग्जरी टावरों और आईटी पार्क्स का निर्माण बहुत तेजी से हुआ है। इन तमाम बदलावों के चलते पुप्पलगुडा आज हैदराबाद का सबसे नया और तेजी से उभरता हुआ प्रीमियम रियल एस्टेट डेस्टिनेशन बन चुका है।



















