इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गति देने के उद्देश्य से सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मोबाइल और बैटरी निर्माण से जुड़े कई पुर्जों और मशीनों पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित यह नई नीति 31 मार्च 2029 तक प्रभावी बनी रहेगी। इस कदम का मुख्य लक्ष्य न केवल घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना है, बल्कि आयात पर भारत की निर्भरता को भी कम करना है। इसके साथ ही सोलर इक्विपमेंट और ईपीसी कंपनियों को भी कर में राहत दी गई है, जिससे इन क्षेत्रों में निवेश और लागत कम होने की प्रबल संभावना है।
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में तकनीकी मशीनों पर मिली बड़ी राहत
सरकार ने लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाली मशीनों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जिन पर अब इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। इस सूची में करीब 85 अलग-अलग प्रकार की मशीनें शामिल हैं। इसमें मटेरियल मिक्सिंग, कोटिंग, प्रेसिंग, स्लिटिंग, वाइंडिंग, स्टैकिंग, इलेक्ट्रोलाइट फिलिंग, वेल्डिंग, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसी महत्वपूर्ण मशीनें शामिल हैं। बैटरी निर्माण प्रक्रिया के दौरान काम आने वाले सपोर्टिंग इक्विपमेंट जैसे सॉल्वेंट रिकवरी सिस्टम, हीट रिकवरी सिस्टम, डस्ट कलेक्शन और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम को भी इस शुल्क मुक्ति के दायरे में रखा गया है। स्पष्ट कस्टम टैरिफ कैटेगरी तय करने से अब कंपनियों के लिए आयात की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो जाएगी।
मोबाइल के छह मुख्य पार्ट्स और वायरलेस चार्जिंग में रियायत
स्मार्टफोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मोबाइल फोन के छह प्रमुख पार्ट्स और डिस्प्ले असेंबली के घटकों पर इंपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। इसमें डिस्प्ले सेल, फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPC), बैकलाइट यूनिट, फ्रेम और एसीएफ (Anisotropic Conductive Film) जैसे महत्वपूर्ण पुर्जे शामिल हैं। इसके अलावा, वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल के उत्पादन को सुगम बनाने के लिए नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, पीईटी लाइनर, पीसी शिम, कॉइल और नियोडिमियम मैग्नेट जैसे छह विशिष्ट कंपोनेंट्स को भी शुल्क मुक्त किया गया है। यह फैसला विशेष रूप से ऑटोमोटिव, मेडिकल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में उपयोग होने वाले डिस्प्ले के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।
आम उपभोक्ता और भविष्य पर इसका क्या असर होगा
यद्यपि यह फैसला सीधे तौर पर किसी टैक्स कटौती जैसा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग लागत में कमी आने का सीधा लाभ अंततः उपभोक्ताओं को मिल सकता है। जैसे-जैसे कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों में कमी देखी जा सकती है। इसके अलावा, इस नीति से देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग हब के विस्तार से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। भारत की कोशिश ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने की है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में लिथियम-आयन बैटरी की मांग लगातार बढ़ रही है। कीमतों में वास्तविक कटौती का स्तर हालांकि कंपनियों की भविष्य की रणनीतियों और बाजार की स्थितियों पर ही निर्भर करेगा।











