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सिलिकॉन वैली के निवेशक जिस स्टेबलकॉइन क्रांति को देख रहे हैं उसका असली बाजार नाइजीरिया और अर्जेंटीना में हैव्यापार
2 घंटे पहले· 2

सिलिकॉन वैली के निवेशक जिस स्टेबलकॉइन क्रांति को देख रहे हैं उसका असली बाजार नाइजीरिया और अर्जेंटीना में है

वैश्विक स्तर पर स्टेबलकॉइन का लेनदेन 28 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, लेकिन इसके मुख्य बाजार और इसे फंड करने वाले वेंचर कैपिटल निवेशकों के बीच एक बड़ा भौगोलिक अंतर नजर आ रहा है।

Amit PatelAmit PatelBusiness Correspondent 12 मिनट पढ़ें AI के लिए
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दुनिया भर में जब भी वित्तीय तकनीक या स्टेबलकॉइन के भविष्य की बात होती है, तो अधिकांश विश्लेषक यह मान लेते हैं कि इसका सबसे बड़ा अवसर वहीं है जहां दुनिया का सबसे अधिक पूंजीगत निवेश केंद्रित है। लोगों का ध्यान सीधे तौर पर न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और लंदन जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों पर जाता है। हालांकि, जमीनी हकीकत इस धारणा से बिल्कुल उलट है। आज की तारीख में पृथ्वी पर स्टेबलकॉइन के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय बाजार उन देशों में फल-फूल रहे हैं, जहां अधिकांश पश्चिमी वेंचर कैपिटलिस्टों ने आज तक एक भी आधिकारिक बैठक नहीं की है। पूंजी का यह भौगोलिक असंतुलन वैश्विक स्तर पर डिजिटल परिसंपत्तियों के वास्तविक उपयोग और उनके निवेशकों के बीच एक गहरी खाई को दर्शाता है।

साल 2025 में वैश्विक स्तर पर स्टेबलकॉइन के कुल लेनदेन की मात्रा ने एक नया इतिहास रचते हुए 28 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर लिया है। यह इतनी बड़ी राशि है कि इसने वैश्विक भुगतान क्षेत्र की दो सबसे बड़ी दिग्गज कंपनियों, वीजा और मास्टरकार्ड के संयुक्त लेनदेन वॉल्यूम को भी पीछे छोड़ दिया है। इस अभूतपूर्व विकास के बावजूद, अधिकांश स्टेबलकॉइन निर्माता और उनकी फंडिंग करने वाले निवेशक अभी भी मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में ही सिमटे हुए हैं। इन पश्चिमी देशों में स्टेबलकॉइन का उपयोग मुख्य रूप से एक संस्थागत उत्पाद के रूप में हो रहा है, जहां पहले से ही स्थापित वित्तीय दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। ब्लैकरॉक, जेपीमॉर्गन और फिडेलिटी जैसे बड़े संस्थान टोकनयुक्त मुद्रा बाजारों और कॉर्पोरेट निपटान प्रणालियों में तेजी से पैर पसार रहे हैं। इस वजह से, नई स्टार्टअप कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में जगह बनाना उतना आसान नहीं रह गया है जितना कि आमतौर पर विज्ञापित किया जाता है।

वास्तविक मांग और उपयोग की कहानी पश्चिमी देशों की सीमाओं से बहुत दूर, बिल्कुल अलग जगहों पर लिखी जा रही है। अकेले नाइजीरिया में इस समय 2.6 करोड़ से अधिक क्रिप्टो उपयोगकर्ता मौजूद हैं, जो देश की कुल वयस्क आबादी का लगभग आठवां हिस्सा यानी हर आठ वयस्कों में से एक से अधिक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से 59 प्रतिशत लोग नियमित रूप से यूएसडीटी होल्ड करते हैं। इसी तरह, पूरे लातिन अमेरिका में स्टेबलकॉइन का प्रवाह इस पूरे क्षेत्र के कुल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 7.7 प्रतिशत के बराबर पहुंच चुका है, जैसा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों से स्पष्ट होता है। अब यह बहस पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुकी है कि उभरते हुए देशों के बाजार मायने रखते हैं या नहीं। असली सवाल अब यह है कि कई बड़े वेंचर कैपिटल फंड्स आज भी अपने निवेश पोर्टफोलियो को इस तरह क्यों चला रहे हैं जैसे कि यह महत्वपूर्ण डेटा अस्तित्व में ही न हो।

ग्लोबल वॉल्यूम की भारी बढ़त और सिलिकॉन वैली के बीच का बड़ा फासला

दुनिया भर में स्टेबलकॉइन और क्रिप्टो-फिनटेक क्षेत्र की 3,000 से अधिक कंपनियों पर नज़र रखने वाली संस्था स्टेबलस्केप के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से लगभग 1,300 कंपनियां अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित हैं। इसके विपरीत, लातिन अमेरिका, सब-सहारा अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया और मध्य पूर्व के उभरते बाजारों में काम करने वाली कंपनियां कुल ट्रैक की गई कंपनियों का केवल 32 प्रतिशत ही हैं। यह आंकड़ा तब और भी चौंकाने वाला लगता है जब हम देखते हैं कि दुनिया में स्टेबलकॉइन के वास्तविक उपयोग और उसके लेन-देन की कुल मात्रा का सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं उभरते हुए क्षेत्रों से आता है।

अर्जेंटीना जैसे देशों में स्टेबलकॉइन की खरीद का हिस्सा कुल क्रिप्टो लेनदेन का आधे से भी अधिक हो चुका है। इसके पीछे मुख्य कारण वहां की लगातार बढ़ रही तीन अंकों की महंगाई दर और सरकार द्वारा लगाए गए कड़े मुद्रा नियंत्रण हैं, जिन्होंने आम नागरिकों के लिए सीधे अमेरिकी डॉलर तक पहुंच को एक बेहद जटिल नौकरशाही प्रक्रिया बना दिया है। ब्राजील में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं, जहां साल 2025 के मध्य तक 318.8 बिलियन डॉलर का क्रिप्टो प्रवाह दर्ज किया गया, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन केवल स्टेबलकॉइन के माध्यम से हुए। सब-सहारा अफ्रीका में भी स्टेबलकॉइन के उपयोग में साल-दर-साल 52 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई है, जहां ऑन-चेन माध्यमों से 205 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य का हस्तांतरण हुआ। इसके बावजूद, इस भारी मांग को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने वाले संस्थापक और उद्यमी आज भी उन बड़े शहरों में बैठकर काम कर रहे हैं, जहां के लोगों ने अपने जीवन में कभी इस तरह की वित्तीय समस्याओं का सामना ही नहीं किया है।

उभरते बाजारों में वित्तीय जीवन रेखा बनती डिजिटल मुद्रा

पश्चिमी देशों में क्रिप्टो को लेकर जो चर्चाएं चलती हैं, उनमें स्टेबलकॉइन को अक्सर अधिक जटिल तकनीकों के लिए एक आधार माना जाता है। वहां इसे प्रोग्राम करने योग्य भुगतान प्रणालियों, विकेंद्रीकृत वित्त यानी डेफी में मिलने वाले मुनाफे और कॉर्पोरेट खजाने के प्रबंधन के उपकरण के रूप में देखा जाता है। इन अमीर देशों में स्टेबलकॉइन उन प्रणालियों में थोड़ा और सुधार करते हैं जो पहले से ही काफी अच्छे ढंग से काम कर रही हैं। लेकिन जब हम लागोस, ब्यूनस आयर्स और इस्तांबुल जैसे शहरों की बात करते हैं, तो वहां की बुनियादी परिस्थितियां पूरी तरह से भिन्न होती हैं। इन शहरों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए स्टेबलकॉइन बैंकों के डूबने, स्थानीय मुद्राओं के ढहने या अचानक वित्तीय प्रतिबंधों के बीच सुरक्षित रूप से डिजिटल डॉलर रखने का एकमात्र विश्वसनीय और सुलभ साधन बन चुके हैं।

इस उपयोगिता को समझते हुए ही ओपेरा और सेलो ने अपनी साझेदारी का विस्तार किया है ताकि दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए स्टेबलकॉइन को और अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाया जा सके। लातिन अमेरिका में व्यापार-से-व्यापार यानी बी2बी स्टेबलकॉइन भुगतान का ग्राफ आश्चर्यजनक रूप से बढ़ा है। साल 2023 की शुरुआत में जहां यह लेनदेन प्रति माह 100 मिलियन डॉलर से कम था, वहीं साल 2025 के मध्य तक यह उछलकर 6 बिलियन डॉलर प्रति माह से अधिक हो गया है। केवल 30 महीनों के भीतर दर्ज की गई यह 60 गुना की भारी वृद्धि किसी सट्टेबाजी का परिणाम नहीं है, बल्कि वास्तविक सीमा पार व्यापार और वाणिज्यिक लेनदेन के कारण संभव हुई है। इसके विपरीत, आम उपभोक्ताओं को सीधे सेवाएं देने वाले रिटेल स्टेबलकॉइन उत्पादों को चलाने का खर्च बहुत अधिक होता है। इनमें उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या के साथ बढ़ने वाला अनुपालन खर्च, स्थानीय बैंकों के साथ कमजोर संबंध और बेहद छोटे रिटेल ट्रांसफर के कारण मुनाफा न मिल पाना जैसी चुनौतियां शामिल हैं। यही वजह है कि 34 देशों में काम करने वाली कंपनी येलो कार्ड ने अपने रिटेल बिजनेस को पूरी तरह से बंद करके अपना पूरा ध्यान केवल बी2बी लेनदेन पर केंद्रित कर दिया है। इसी तरह, बिटसो ने भी रिटेल वॉलेट के बजाय व्यावसायिक भुगतानों पर ध्यान देकर मैक्सिको और अमेरिका के बीच चलने वाले रेमिटेंस कॉरिडोर में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। इन दोनों मामलों में सफलता की कुंजी स्थानीय बाजार की गहरी समझ थी, जो केवल वहीं के निवासियों के पास हो सकती थी।

आखिर वेंचर कैपिटल फंड्स वैश्विक जमीनी हकीकत को क्यों नहीं देख पा रहे

साल 2024 में वैश्विक स्तर पर एक बड़ी विसंगति देखी गई जब केवल 30 वेंचर कैपिटल फर्मों ने अमेरिकी फंडों द्वारा जुटाई गई कुल पूंजी के 75 प्रतिशत हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। हालांकि इन बड़े फंडों के पास स्टेबलकॉइन के भविष्य को लेकर काफी अच्छे सिद्धांत और नीतियां हैं, लेकिन वे भौगोलिक रूप से पूरी तरह गलत दिशा में देख रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को के सैंड हिल रोड पर बैठे बड़े फंड मैनेजर जिस तरह की सोच और पैटर्न के आधार पर स्टार्टअप का चुनाव करते हैं, उससे वे लागोस, ब्यूनस आयर्स या मनीला के किसी स्थानीय उद्यमी की काम करने की क्षमता और उसकी सफलता की संभावनाओं का सही आकलन नहीं कर सकते। कुछ निवेशकों का यह तर्क रहता है कि उभरते हुए फिनटेक बाजारों से बाहर निकलने यानी सुरक्षित रूप से कंपनी बेचने (एग्जिट) के बहुत कम रास्ते उपलब्ध हैं, लेकिन आंकड़े इस बात का पुरजोर खंडन करते हैं। उदाहरण के लिए, अफ्रीकी भुगतान ढांचे पर काम करने वाली कंपनी ओपे अपने संभावित आईपीओ से पहले 4 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन की तैयारी कर रही है। इसी तरह, मॉडर्न ट्रेजरी ने सीमा पार स्टेबलकॉइन लिक्विडिटी प्रदान करने वाले स्टार्टअप बीम का 40 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया है। इससे स्पष्ट होता है कि इन उभरते हुए गलियारों में भी बड़े स्तर पर कंपनियों के बिकने और निवेशकों को मुनाफा मिलने का मार्ग तैयार हो रहा है, जिसे पश्चिमी फंड्स काफी धीमी गति से समझ पा रहे हैं।

नियामक नीतियों का दबाव भी निवेशकों के एक ही जगह केंद्रित होने का एक बड़ा कारण है। अमेरिका में जीनियस एक्ट और यूरोप का मीका कानून निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण कदम हैं, और जैसे-जैसे नियम स्पष्ट होते हैं, संस्थागत पूंजी भी उसी दिशा में बहने लगती है। लेकिन इस पूरी बहस में एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है। अमेरिकी नियमों का पूरा ध्यान स्टेबलकॉइन को बड़े कॉर्पोरेट्स के अनुपालन विभागों के लिए सुरक्षित बनाना है। इसके विपरीत, नाइजीरिया और अर्जेंटीना जैसे देशों में चल रहे विशाल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को आगे बढ़ने के लिए किसी अमेरिकी नियामक की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। ये बाजार लगभग हर पैमाने पर अमेरिकी बाजार को पीछे छोड़ रहे हैं और इनका संचालन करने वाली स्थानीय कंपनियों को ऐसे क्षेत्रीय नेटवर्कों से फंडिंग मिलती है जिनके साथ पश्चिमी फंडों का दूर-दूर तक कोई संपर्क नहीं है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि नाइजीरिया में स्टेबलकॉइन को अपनाने की इस विशाल दर के कारण वहां के वित्तीय तंत्र में जोखिम भी अधिक स्पष्ट और संवेदनशील हो गए हैं।

भविष्य का रुख तय करने वाले मुख्य भौगोलिक कॉरिडोर

फिलीपींस जैसे देशों में साल 2025 के दौरान कुल 39.6 बिलियन डॉलर का व्यक्तिगत रेमिटेंस (विदेशों से भेजा जाने वाला पैसा) प्राप्त हुआ। यदि इस पैसे को पारंपरिक बैंकिंग या मनी ट्रांसफर चैनलों से भेजा जाए, तो इस पर 5 से 7 प्रतिशत तक का भारी सेवा शुल्क लगता है। इसके विपरीत, स्टेबलकॉइन के जरिए इस पैसे को भेजने का खर्च एक प्रतिशत के बेहद छोटे हिस्से के बराबर आता है। इसी तरह, नाइजीरिया के 2025 के इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज एक्ट ने वर्चुअल एसेट्स को एक औपचारिक कानूनी ढांचे के तहत ला दिया है। इसके साथ ही दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, मॉरीशस और नामीबिया जैसे देशों में भी अब लाइसेंसिंग प्रणालियां लागू हो चुकी हैं, और पूर्वी व पश्चिमी अफ्रीका के कई हिस्सों में नियामक सैंडबॉक्स भी पूरी तरह सक्रिय हैं। एक समय था जब नाइजीरियाई सरकार ने बाइनेंस जैसी बड़ी एक्सचेंज कंपनियों पर कड़ा रुख अपनाया था, लेकिन अब वही नाइजीरिया खुद स्टेबलकॉइन स्टार्टअप्स को आमंत्रित कर रहा है ताकि देश के वित्तीय ढांचे को सुधारा जा सके।

ये सभी आर्थिक गलियारे आने वाले दशक में स्टेबलकॉइन की दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सफल कंपनियों को जन्म देने की क्षमता रखते हैं। यह ठीक उसी तरह होगा जैसे ब्राजील ने नूबैंक जैसे बड़े डिजिटल बैंक को जन्म दिया था। नूबैंक ने उन ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाएं बनाईं जिन्हें पारंपरिक बैंकों ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था। स्थानीय बाजार के इस विशेष ज्ञान और जमीनी समझ की नकल करने में बाहरी बड़ी कंपनियों को सालों लग जाते हैं और वे अक्सर विफल रहती हैं। लातिन अमेरिका के एक स्टेबलकॉइन सुपर-ऐप एल डोराडो ने साल 2025 में 6 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं और 30 लाख से अधिक लेनदेन के आंकड़े को पार कर लिया है। इस ऐप ने सालाना 12 गुना की शानदार बढ़त हासिल करते हुए 2.7 मिलियन डॉलर का एआरआर दर्ज किया है और यह वेनेजुएला का सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला क्रिप्टो ऐप बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि मल्टीकॉइन कैपिटल और कॉइनबेस वेंचर्स जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों ने इस ऐप में तभी निवेश किया जब स्थानीय बाजार ने इसके बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से साबित कर दिया। यह एक तय पैटर्न है जो आने वाले पांच वर्षों में हर बड़े उभरते हुए बाजार में दोहराया जाएगा: पहले वास्तविक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ेगा, फिर स्थानीय स्तर पर उसे मान्यता मिलेगी और अंत में वैश्विक पूंजी वहां पहुंचेगी।

स्टेबलकॉइन की दुनिया में दो अलग-अलग रास्तों का उदय

स्टेबलकॉइन का वैश्विक बाजार अब स्पष्ट रूप से दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो चुका है। एक हिस्सा वह है जो पश्चिमी देशों के विनियमित वित्तीय संस्थानों के लिए बड़े उद्यम स्तर का बुनियादी ढांचा तैयार करता है, जैसे ट्रेजरी ऑर्केस्ट्रेशन, कंप्लायंस टूल्स और सेटलमेंट रेल। दूसरा हिस्सा वह है जो उन अरबों लोगों तक सुरक्षित रूप से डिजिटल डॉलर पहुंचाने का काम करता है जो बेहद अस्थिर मौद्रिक प्रणालियों के बीच रहने को मजबूर हैं। इन लोगों के लिए स्टेबलकॉइन कोई नया तकनीकी खिलौना या क्रिप्टो उत्पाद नहीं है, बल्कि उनके जीवन की गाढ़ी कमाई को बचाने वाली एक वित्तीय जीवन रेखा है। इस पूरी तस्वीर का सबसे विरोधाभासी पहलू यह है कि एक हिस्से के पास दुनिया के अधिकांश वेंचर कैपिटल और पूंजी पर नियंत्रण है, जबकि दूसरे हिस्से के पास दुनिया की सबसे बड़ी और वास्तविक मांग मौजूद है।

उभरते हुए बाजारों में आज भी लगभग 57 प्रतिशत ऑन/ऑफ-रैंप प्रणालियां स्थानीय तौर पर स्थापित कंपनियों द्वारा ही चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद, मध्य पूर्व, लातिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्वी एशिया के क्षेत्रीय रेमिटेंस नेटवर्क और स्थानीय मुद्राओं के आधार पर स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों को उनकी वास्तविक मांग की तुलना में बहुत ही कम निवेश मिल पा रहा है। अफ्रीका में स्टेबलकॉइन भुगतान बुनियादी ढांचे पर काम करने वाली कुलीपा और लातिन अमेरिका में सीमा पार बी2बी भुगतानों पर ध्यान केंद्रित करने वाली म्यूरल पे जैसी कंपनियां इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं। ये कंपनियां पश्चिमी देशों के वेंचर कैपिटल के मानकों के हिसाब से बहुत छोटी लग सकती हैं, लेकिन जिस दिन इनका आर्थिक कॉरिडोर बड़ा रूप लेगा, उस दिन वैश्विक बाजार के लिए इन्हें नजरअंदाज करना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।

आने वाले समय में स्टेबलकॉइन की दुनिया के नए दिग्गज लागोस, साओ पाउलो और मनीला जैसे शहरों से ही निकलेंगे। जो निवेश फंड आज इन क्षेत्रों में जाकर मजबूत संबंध बना रहे हैं, वे ही अगले दशक में स्टेबलकॉइन निवेश पर सबसे शानदार रिटर्न हासिल करेंगे। जो निवेशक तब तक का इंतजार करेंगे जब तक कि ये स्टार्टअप क्रंचबेस जैसी वैश्विक वेबसाइटों पर दिखाई न देने लगें, उन्हें इस बाजार में प्रवेश करने के लिए बहुत भारी कीमत चुकानी होगी, ठीक वैसे ही जैसे उभरते बाजारों के हर पिछले आर्थिक चक्र में देर से आने वाले निवेशकों को चुकानी पड़ी है। दुनिया का नया वित्तीय नक्शा पहले ही खींचा जा चुका है और वहां भारी ट्रांजैक्शन वॉल्यूम भी मौजूद है। कमी केवल इस बात की है कि पश्चिमी वेंचर कैपिटल की नजरें अभी भी सही जगह पर नहीं पड़ रही हैं।

इसका आप पर असर

भारत में: यह रिपोर्ट भारतीय निवेशकों और स्टार्टअप संस्थापकों को यह सीख देती है कि पारंपरिक अमेरिकी बाजारों के बजाय उभरते हुए वैश्विक बाजारों (जैसे अफ्रीका और लातिन अमेरिका) में डिजिटल डॉलर और सीमा पार भुगतान के अवसर कहीं अधिक बड़े और वास्तविक हैं।

सवाल-जवाब

स्टेबलकॉइन के वैश्विक लेनदेन और इसके मुख्य निवेशकों के बीच क्या अंतर है?
अधिकतर वेंचर कैपिटल फंड और स्टार्टअप संस्थापक अमेरिका और यूरोप में केंद्रित हैं, जबकि स्टेबलकॉइन का वास्तविक उपयोग और इसका भारी ट्रांजैक्शन वॉल्यूम नाइजीरिया और अर्जेंटीना जैसे उभरते हुए बाजारों में हो रहा है।
साल 2025 में स्टेबलकॉइन का कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम कितना पहुंच गया?
साल 2025 में वैश्विक स्तर पर स्टेबलकॉइन का कुल लेनदेन 28 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया, जो वीजा और मास्टरकार्ड के संयुक्त वॉल्यूम से भी अधिक है।
उभरते हुए बाजारों में लोग स्टेबलकॉइन का उपयोग क्यों कर रहे हैं?
इन देशों में लोग तीन अंकों की भारी महंगाई, स्थानीय मुद्रा के गिरने और कड़े सरकारी नियंत्रण से अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए स्टेबलकॉइन को एक डिजिटल जीवन रेखा के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
लातिन अमेरिका में बी2बी स्टेबलकॉइन भुगतान में कितनी वृद्धि देखी गई है?
लातिन अमेरिका में बी2बी स्टेबलकॉइन भुगतान साल 2023 की शुरुआत में 100 मिलियन डॉलर प्रति माह से कम था, जो साल 2025 के मध्य तक 60 गुना बढ़कर 6 बिलियन डॉलर प्रति माह से अधिक हो गया है।
उभरते बाजारों में स्टेबलकॉइन क्षेत्र की बड़ी सफलता का क्या उदाहरण है?
लातिन अमेरिका के स्टेबलकॉइन सुपर-ऐप एल डोराडो ने साल 2025 में 6 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं और 30 लाख से अधिक लेनदेन के साथ 2.7 मिलियन डॉलर का एआरआर दर्ज किया है, जो इसकी भारी मांग को साबित करता है।
#व्यापार#स्टेबलकॉइन#क्रिप्टोकरेंसी#वेंचरकैपिटल#लातिनअमेरिका#नाइजीरिया#डिजिटलडॉलर

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