भारत में सुहाग नगरी के नाम से मशहूर फिरोजाबाद का कांच उद्योग आखिरकार एक बड़े संकट से बाहर निकल आया है। पिछले कई महीनों से शहर के चूड़ी कारखाने और ग्लास फैक्ट्रियां अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण पैदा हुए भारी गैस संकट से जूझ रहे थे। ईंधन की इस गंभीर कमी ने कारखानों के पहिए रोक दिए थे, जिससे व्यापारी न तो समय पर पुराने ऑर्डर पूरे कर पा रहे थे और न ही नए ऑर्डर ले पा रहे थे। इस वजह से पूरे स्थानीय उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में आ गई है और औद्योगिक इकाइयों में गैस की कटौती को खत्म कर दिया गया है। ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति मिलने के बाद सभी फैक्ट्रियों ने आगामी त्योहारों को देखते हुए अपना उत्पादन काफी तेज कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध ने बिगाड़ा व्यापार का गणित
यह पूरा संकट भारत की सीमाओं के बाहर शुरू हुआ था। फिरोजाबाद ग्लास एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश बंसल टोनी ने बताया कि जब से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के हालात बने हैं, तब से कांच उद्योग को कई मोर्चों पर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इस भू-राजनीतिक तनाव का सबसे पहला असर नए ऑर्डरों पर पड़ा, जिनमें भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही तैयार माल को ट्रांसपोर्ट के माध्यम से दूसरी जगहों पर भेजना भी बेहद मुश्किल हो गया। इससे पूरा व्यापारिक चक्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालांकि, कांच की चूड़ियां बनाने वाले कारखानों और बड़ी ग्लास फैक्ट्रियों के लिए सबसे बड़ा संकट तब खड़ा हुआ, जब उनके लिए गैस की आपूर्ति में कटौती शुरू कर दी गई।
त्योहारों के लिए भट्टियों ने पकड़ी रफ्तार
फिरोजाबाद के इस पूरे उद्योग के लिए गैस किसी संजीवनी से कम नहीं है। कांच को गलाने और उसे सही आकार देने के लिए भट्टियों को चौबीसों घंटे चालू रखना पड़ता है, जिसके लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जब कारखानों को मिलने वाली गैस की मात्रा कम कर दी गई, तो काम की गति अपने आप बेहद धीमी हो गई। माल तैयार न होने के कारण व्यापारियों के ऑर्डर अटकने लगे, जिससे पूरे व्यापारिक समुदाय को करोड़ों रुपये का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। अब हालात पहले की तरह सामान्य हो चुके हैं और गैस की कोई कटौती नहीं हो रही है। गैस आपूर्ति बहाल होते ही शहर की तमाम औद्योगिक इकाइयों ने अपनी पुरानी लय वापस पा ली है। त्योहारों का सीजन नजदीक होने के कारण कारोबारियों को लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं और फैक्ट्रियों में पूरी क्षमता के साथ तेजी से माल तैयार किया जा रहा है।
नए देशों से आपूर्ति लेकिन बढ़ी हुई कीमतें
भले ही शहर के कारखानों को अब पूरी गैस मिल रही है, लेकिन अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा तनाव अभी भी शांत नहीं हुआ है। इस वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत ने आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए अर्जेंटीना और अमेरिका से गैस मंगाना शुरू कर दिया है। इन नए देशों से गैस आने के कारण उद्योग की जरूरतें तो पूरी हो गई हैं, लेकिन इसके लिए व्यापारियों को पहले से कहीं ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। उद्योगपतियों के अनुसार, औद्योगिक इस्तेमाल वाली इस गैस की कीमतों में लगभग 18 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उत्पाद हुए महंगे पर मुनाफे की जगी उम्मीद
कीमतों के इस गणित ने कारखानों के खर्च को सीधे तौर पर बढ़ा दिया है। पहले जो गैस 32 रुपये में उपलब्ध थी, उसी गैस के लिए अब व्यापारियों को 42 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। ईंधन महंगा होने का सीधा असर कारखानों में तैयार होने वाले अंतिम माल की लागत पर पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप, कांच की खूबसूरत चूड़ियों से लेकर सजावट के तमाम ग्लास आइटम बाजार में पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं। ग्राहकों की जेब पर भले ही इसका बोझ बढ़ेगा, लेकिन गैस की निरंतर आपूर्ति ने उद्योग को फिर से दौड़ने का मौका दे दिया है। व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन में उत्पादन की यह तेज रफ्तार उनके लिए करोड़ों रुपये का मुनाफा लेकर आएगी।



















