हिमाच्छादित पर्वतों और पथरीली ढलानों के बीच लेह में एक अनूठा और रंग-बिरंगा नजारा देखने को मिला है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह क्षेत्र में दुनिया के सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित 'ट्विन फ्लावर फील्ड' का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया है। समुद्र तल से करीब 10,600 फीट की बुलंदी पर विकसित किया गया यह भव्य पुष्प क्षेत्र लगभग 40 एकड़ के विशाल दायरे में फैला हुआ है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के खास अवसर पर राष्ट्र को समर्पित किया गया है। यह सिर्फ भौगोलिक ऊंचाई के मामले में ही अनोखा नहीं है, बल्कि देश का सबसे बड़ा और अपनी तरह का अनूठा पुष्प उत्पादन केंद्र भी बन गया है। चोगलमसर और स्टाकना की बंजर सी दिखने वाली भूमि पर इन खेतों के विकसित होने से क्षेत्र के कृषि और आर्थिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद बंध गई है।
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे हैरान करने वाली विशेषता इसे बेहद कम समय में धरातल पर उतारना रही है। चोगलमसर परिसर में फूलों की रोपाई का काम 16 सितंबर से काफी पहले यानी 16 जुलाई को शुरू कर दिया गया था। महज दो महीने के भीतर सितंबर महीने के शुरुआती दिनों में ही लिलियम के फूलों ने पूरी घाटी को अपनी महक से सराबोर कर दिया। इसके अलावा, स्टाकना क्षेत्र में बनाए गए दूसरे हिस्से में अगस्त के दौरान करीब 14 लाख लिलियम के पौधे रोपे गए हैं। प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि अक्टूबर के आखिर तक यहां भी रंग-बिरंगे फूल पूरी तरह खिलकर तैयार हो जाएंगे। लद्दाख की बेहद ठंडे मौसम वाली जलवायु में इतने बड़े पैमाने पर हाई-एल्टीट्यूड फ्लोरीकल्चर का यह अपनी तरह का पहला सफल और ऐतिहासिक प्रयोग साबित हुआ है।
स्थानीय आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल इस प्रयोग की सफलता के बाद, अब प्रशासन इस सफल मॉडल को केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार देने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। लद्दाख के अनोखे मौसम का अधिकतम लाभ उठाते हुए इस योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ढाला गया है। आज के समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के भीतर लिलियम जैसे प्रीमियम फूलों की भारी मांग बनी हुई है। थोक बाजार में इसकी एक सिंगल स्टिक आसानी से 60 से 70 रुपये के ऊंचे दामों पर बिकती है, जबकि रिटेल बाजारों में ग्राहकों को इसके लिए और भी अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
इस व्यावसायिक फूलों की खेती से लद्दाख के स्थानीय कृषकों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा मिलने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही इस केंद्र शासित प्रदेश में एग्री-टूरिज्म और पुष्प आधारित नए स्टार्टअप्स को भी एक मजबूत आधार मिलेगा। चोगलमसर स्थित यह फ्लावर पार्क भविष्य में फ्लोरीकल्चर के लिए एक प्रमुख मॉडल और डेमो सेंटर के रूप में काम करेगा। इस परिसर में विशेष रूप से लिली, ग्लैडियोलस, ट्यूलिप और कई तरह के सजावटी पौधों की ऐसी प्रजातियां उगाई जा रही हैं जिनकी देश और विदेश में सबसे अधिक मांग रहती है।
इस अनूठी पहल को ज़मीनी स्तर पर टिकाऊ बनाने के लिए सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और कोऑपरेटिव सोसायटियों को इसकी कमान सौंपी जाएगी। शुरुआती चरण में कृषि विभाग खुद पूरे खेत को तैयार करेगा और फसल पूरी तरह खिल जाने के बाद इसे चुने हुए स्वयं सहायता समूहों तथा सहकारी समितियों के हवाले कर दिया जाएगा। विभाग का मुख्य उद्देश्य इन स्थानीय समूहों को देश-विदेश के बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने और उचित मार्केटिंग करने में पूरी मदद करना है, ताकि उन्हें अधिकतम वित्तीय लाभ मिल सके। इसके बाद के वर्षों से ये सहकारी समितियां खुद लिली के फूलों की कमर्शियल खेती, कटाई और वैल्यू एडिशन से जुड़े सभी कामों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लेंगी।
किसानों को इस नए कारोबार में पूरी तरह सक्षम बनाने के लिए एक व्यापक ट्रेनिंग कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इसके तहत स्थानीय खेती से जुड़े लोगों को साइंटिफिक फ्लोरीकल्चर, खेती के आधुनिक तकनीकी तरीकों और इसे एक सफल व फायदेमंद व्यावसायिक उद्यम के रूप में स्थापित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फ्लावर पार्क के उद्घाटन समारोह के दौरान उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि यह योजना केवल कुछ फूल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लद्दाख के निवासियों के जीवन में आजीविका, आधुनिक कौशल और नए अवसरों के बीज बोने का माध्यम है।
इस उद्यान को विशेष रूप से किसानों और युवा वर्ग के लिए एक जीवंत प्रशिक्षण और प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यह आधुनिक केंद्र खेती के वैज्ञानिक तरीकों और कटाई के बाद के बेहतर प्रबंधन से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां मुहैया कराएगा, जिससे गांव के स्तर पर लोग इस खेती को बेहतर ढंग से समझ सकें। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस अवसर पर कहा कि यह जगह स्थानीय नागरिकों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा का एक बेहतरीन केंद्र बनेगी, जहां पौधों के साथ-साथ ज्ञान और व्यापार का भी विकास होगा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कृषि के साथ इस आधुनिक व्यवसाय को जोड़ने से आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
यह नया फ्लावर गार्डन आम जनता के दीदार के लिए 18 सितंबर, 2026 से आधिकारिक तौर पर खोल दिया जाएगा। इस पर्यटक स्थल के सुचारू रखरखाव और साफ-सफाई की व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रबंधन ने बहुत ही मामूली प्रवेश शुल्क तय किया है। इसके तहत वयस्कों के लिए 25 रुपये और बच्चों के लिए 10 रुपये का टिकट रखा गया है। इस टिकटों की बिक्री से मिलने वाली सारी धनराशि का उपयोग सीधे तौर पर इस विशाल उद्यान के रखरखाव और सौंदर्यीकरण के कार्यों में किया जाएगा।



















