सुल्तानपुर की मशहूर कोहड़ा पूड़ी अब सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना का हिस्सा बन गई है। जिले के पारंपरिक खान-पान को नई पहचान देने के मकसद से चलाई जा रही इस योजना में शामिल होने के बाद अब इससे जुड़े लोगों को सीधे लोन और सब्सिडी का फायदा मिलेगा। सवाल यह है कि आखिर आम आदमी इस योजना का फायदा कैसे उठा सकता है।
सुल्तानपुर में कोहड़े की सब्जी का इतना महत्व क्यों?
सुल्तानपुर में कोहड़ा यानी कद्दू सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। ब्रह्म भोज, तेरहवीं और मांगलिक कार्यक्रमों जैसे मौकों पर कोहड़े की सब्जी बनाए बिना भोज अधूरा माना जाता है। यही वजह है कि इसे यहां के सबसे खास और पहचान वाले व्यंजनों में गिना जाता है। इसी सांस्कृतिक अहमियत को देखते हुए सरकार ने अब इसे बाकायदा एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल कर दिया है, ताकि इससे जुड़े कारोबार को औपचारिक मदद मिल सके।
किन कारोबारियों को मिलेगी आर्थिक मदद
जिला उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि सुल्तानपुर जिले के लिए इस पारंपरिक व्यंजन को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल करने से जिले की पहचान और मजबूत होगी। उनके मुताबिक इस योजना का मकसद जिले के पारंपरिक और मशहूर व्यंजनों को बढ़ावा देना है। इसी के तहत सुल्तानपुर में कोहड़े की सब्जी, पेड़ा, लाल पेड़ा और समोसा से जुड़े कारोबारियों को आर्थिक मदद दी जाएगी। चाहे कोई अपने पुराने कारोबार को आगे बढ़ाना चाहता हो या फिर बिल्कुल नया प्रोजेक्ट शुरू करना चाहता हो, सरकार दोनों ही स्थितियों में उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग के पोर्टल के जरिए सीधे लोन और सब्सिडी की सुविधा दे रही है।
कितने प्रोजेक्ट पर कितनी सब्सिडी
इस योजना के तहत 25 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक तक के प्रोजेक्ट पर सरकार 10 से 25 फीसदी तक मार्जिन मनी यानी सब्सिडी दे रही है। सामान्य वर्ग के आवेदकों को प्रोजेक्ट की कुल लागत का सिर्फ 10 फीसदी अपनी तरफ से लगाना होगा, जबकि विशेष वर्ग के आवेदकों के लिए यह हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 5 फीसदी रह जाती है। हालांकि एक बात यहां ध्यान रखनी जरूरी है कि यह मार्जिन मनी तुरंत नहीं मिलती। उद्योग के दो साल तक सही तरीके से चलने के बाद ही यह रकम लोन में एडजस्ट की जाएगी।
सुल्तानपुर की बड़ी पूड़ी की अलग पहचान
सुल्तानपुर के ग्रामीण अनिल कुमार बताते हैं कि यहां बड़ी पूड़ी का अपना अलग ही महत्व है। बड़ी पूड़ी यानी आकार में आम पूड़ी से कहीं बड़ी पूड़ी, जिसे रखने का तरीका भी बाकी पूड़ियों से जुदा होता है। जब बड़े लोहे के कड़ाहे से पूड़ी निकाली जाती है तो उसे तुरंत बांस से बनी खैंची में रखा जाता है। इस काम के लिए पूड़ी रखने वाले लोग भी खासतौर पर ट्रेंड होते हैं, ताकि पूड़ी सही तरीके से रखी जा सके। इसे इतनी सावधानी से संभाला जाता है कि यह 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक गर्म बनी रहती है।











