बाजार में जिस स्पेसएक्स को लेकर एक महीने पहले तक जबरदस्त जोश था, बुधवार को उसी शेयर ने एक ऐसा पड़ाव देखा जो कंपनी के छोटे से शेयर बाजार सफर में बड़ा माना जा रहा है। लिस्टिंग के बाद पहली बार इस एयरोस्पेस कंपनी का शेयर अपने आईपीओ भाव से भी नीचे फिसल गया। यह इस बात का साफ संकेत है कि लिस्टिंग के वक्त जो जबरदस्त उत्साह दिख रहा था, वह अब थोड़ा ठंडा पड़ने लगा है।
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब स्पेसएक्स को इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ का तमगा हासिल किए हुए बमुश्किल एक महीना ही बीता है। इस आईपीओ ने निवेशकों में इतनी दिलचस्पी जगाई थी कि कुछ समय के लिए कंपनी की बाजार कीमत दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के आसपास जा पहुंची थी।
बुधवार को क्या हुआ बाजार में
बुधवार के कारोबार के दौरान स्पेसएक्स का शेयर गिरकर करीब 134 डॉलर पर आ गया, जो कि इसके 135 डॉलर के आईपीओ इश्यू भाव से पहली बार नीचे था। हालांकि बाद में इसमें हल्की रिकवरी दिखी और यह करीब 135.27 डॉलर पर बंद हुआ। खास बात यह है कि शेयर अब लगातार कई कारोबारी सत्रों से गिर रहा है। लिस्टिंग के फौरन बाद आई शानदार तेजी के बाद जो गिरावट शुरू हुई थी, वही अब आगे बढ़ती जा रही है।
आईपीओ भाव से नीचे जाने के मायने
आईपीओ भाव वह कीमत होती है, जिस पर शेयर बाजार में लिस्ट होने और कारोबार शुरू होने से पहले निवेशकों को शेयर पहली बार बेचे जाते हैं। जब तक कोई शेयर अपने आईपीओ भाव से ऊपर रहता है, तब तक आईपीओ में शेयर खरीदने वाले निवेशक आम तौर पर फायदे में रहते हैं। लेकिन जैसे ही बाजार भाव आईपीओ कीमत से नीचे चला जाता है, ऐसे निवेशक कागजी यानी नोशनल नुकसान में आ जाते हैं, बशर्ते उन्होंने पहले ही अपने शेयर न बेच दिए हों।
इसीलिए किसी शेयर का आईपीओ स्तर से नीचे जाना इस बात का इशारा माना जाता है कि बाजार का शुरुआती जोश कमजोर पड़ गया है। हालांकि इसका यह मतलब कतई नहीं है कि कंपनी की लंबी अवधि की संभावनाएं भी कमजोर हो गई हैं।
225 डॉलर से 134 डॉलर तक का सफर
शेयर बाजार में स्पेसएक्स की शुरुआत बेहद शानदार रही थी। लिस्टिंग के बाद निवेशकों की जबरदस्त मांग ने शेयर को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया और कारोबार के पहले ही महीने में यह 225 डॉलर के पार निकल गया। इस तेजी ने कुछ समय के लिए कंपनी की बाजार पूंजी को 2.6 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा दिया था। इस दौरान स्पेसएक्स दुनिया की सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो गई और कई पुरानी दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों से भी आगे निकल गई।
लेकिन मौजूदा स्तर पर कंपनी का मूल्यांकन काफी घटकर करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है। यह गिरावट दिखाती है कि आईपीओ के शुरुआती उत्साह के बाद निवेशक अब अपनी उम्मीदों को दोबारा तौल रहे हैं।
गिरावट के पीछे एक नहीं, कई कारण
इस ताजा गिरावट के पीछे कोई एक घटना नजर नहीं आती। जानकारों का मानना है कि निवेशकों की भावना को कई कारक मिलकर प्रभावित कर रहे हैं।
एक बड़ी वजह यह है कि कई निवेशक अब यह आंक रहे हैं कि क्या कंपनी का मौजूदा मूल्यांकन उसके असल वित्तीय प्रदर्शन के हिसाब से सही बैठता है। स्पेसएक्स की लंबी अवधि की योजनाएं बेहद महत्वाकांक्षी हैं, जिनमें दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट, सैटेलाइट संचार और AI से जुड़ी तकनीकें शामिल हैं। लेकिन इन योजनाओं को पूरा करने के लिए कंपनी लगातार भारी निवेश कर रही है।
25 अरब डॉलर की उधारी और नैस्डैक-100 का असर
कंपनी की बड़ी पूंजी जरूरतें भी लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। हाल ही में स्पेसएक्स ने बॉन्ड बाजार का रुख कर 25 अरब डॉलर जुटाए। इससे साफ है कि अपनी भविष्य की परियोजनाओं और ढांचागत विकास के लिए कंपनी को कितनी बड़ी रकम की जरूरत है। यही वजह है कि लिस्टिंग के बाद आई तेज उछाल के बाद अब कुछ निवेशक ज्यादा संभल कर आगे बढ़ रहे हैं।
कारोबार को प्रभावित करने वाला एक और कारक स्पेसएक्स का हाल ही में नैस्डैक-100 इंडेक्स में शामिल होना रहा है। किसी बेंचमार्क इंडेक्स में कंपनी की एंट्री के साथ ही ETF और दूसरे पैसिव निवेश साधनों की ओर से खरीदारी बढ़ जाती है, क्योंकि ये फंड इंडेक्स में शामिल कंपनियों के शेयर अपने आप खरीदते हैं। इस तरह की खरीदारी अक्सर इंडेक्स में शामिल होने के आसपास शेयर में छोटी अवधि की हलचल पैदा कर देती है।
हालांकि एक बार जब ये अनिवार्य खरीदारी पूरी हो जाती है, तो कारोबार दोबारा कंपनी के बुनियादी प्रदर्शन और निवेशकों की उम्मीदों के हिसाब से चलने लगता है। और यही स्थिति शेयर में उतार चढ़ाव को और बढ़ा सकती है।



















