उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसलों पर सहमति बनी है। इस फैसले के तहत पूर्वांचल के सुल्तानपुर जिले में एक नया औद्योगिक केंद्र विकसित करने की योजना को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार के इस कदम से राज्य में नए विनिर्माण उद्योगों की स्थापना के साथ साथ व्यापक स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुल्तानपुर आईएमएलसी परियोजना और वैश्विक निविदा प्रक्रिया
राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक गलियारा योजना के अंतर्गत सुल्तानपुर जिले में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना पर लगभग 272.25 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा, जिसे पूरी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं वहन करेगी। मंत्रिमंडल से हरी झंडी मिलने के बाद अब निर्माण एजेंसी के चुनाव के लिए वैश्विक निविदाएं यानी ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। चयन की प्रक्रिया संपन्न होते ही धरातल पर निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को मजबूती
यह प्रस्तावित आईएमएलसी क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास स्थापित किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के समीप होने के कारण यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को परिवहन, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे न केवल सुल्तानपुर में नए कारखानों की स्थापना आसान होगी, बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही को तीव्र गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।
8 विशाल इकाइयों के लिए 2,901.97 करोड़ का निवेश प्रोत्साहन
एक अन्य बड़े निर्णय के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत 8 विशाल श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (LOC) जारी करने की मंजूरी दी है। इन आठ विनिर्माण इकाइयों के जरिए राज्य में कुल 2,901.97 करोड़ रुपये का नया पूंजीगत निवेश आने का आकलन किया गया है। इन पात्र इकाइयों को नीति के प्रावधानों के अनुसार शुद्ध राज्य माल एवं सेवा कर (Net SGST) की प्रतिपूर्ति और पूंजीगत सब्सिडी जैसे वित्तीय प्रोत्साहनों का लाभ दिया जाएगा। इन प्रस्तावों की संस्तुति उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (HLEC) द्वारा 4 मई, 2026 को आयोजित बैठक में की गई थी, जिसे अब कैबिनेट का अंतिम अनुमोदन प्राप्त हो गया है।
















