नई दिल्ली। आगामी त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले भारत सरकार ने चीनी के थोक उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत दी है। सरकार ने थोक खरीदारों के लिए चीनी के स्टॉक भंडारण की सीमा को बढ़ाकर दोगुना यानी 30 दिन कर दिया है। इससे पहले तक इन बड़े उपभोक्ताओं को केवल 15 दिनों की खपत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, सरकार ने इस छूट के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। इस नए नियम के तहत, 15 दिनों से अधिक का अतिरिक्त स्टॉक केवल एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) और टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के जरिए आयात की गई चीनी का ही रखा जा सकेगा। खुले बाजार यानी घरेलू ओपन मार्केट से चीनी खरीदकर अतिरिक्त स्टॉक जमा करने की मंजूरी नहीं होगी। घरेलू बाजार से चीनी खरीदने की सीमा अभी भी अधिकतम 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगी।
स्टॉक की साप्ताहिक निगरानी और ऑनलाइन पोर्टल पर घोषणा
इस नई व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने और बाजार में किसी भी तरह की जमाखोरी या सट्टेबाजी को रोकने के लिए सरकार ने सख्त निगरानी नियम लागू किए हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, सभी थोक उपभोक्ताओं को हर सप्ताह अपने चीनी स्टॉक की स्व-घोषणा करनी होगी। इसके लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की है, जिस पर हर शुक्रवार को अनिवार्य रूप से स्टॉक की अद्यतन जानकारी साझा करनी होगी। इस नियम के दायरे में वे सभी औद्योगिक और थोक उपभोक्ता आएंगे जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं। दरअसल, विभिन्न उद्योग संगठनों ने त्योहारों के दौरान चीनी की मांग में होने वाली भारी बढ़ोतरी को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाने की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
घरेलू बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर नहीं पड़ेगा बुरा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नीतिगत बदलाव से औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपने कामकाज के लिए अतिरिक्त चीनी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, लेकिन इसका घरेलू बाजार की आपूर्ति श्रृंखला या कीमतों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि स्टॉक की सीमा बढ़ाने का यह लाभ केवल विदेशों से आयात की गई चीनी पर ही लागू होगा। थोक खरीदारों को घरेलू मिलों से चीनी खरीदकर उसे 15 दिनों से ज्यादा समय के लिए जमा करने की अनुमति नहीं दी गई है। इस तरह घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सामान्य बनी रहेगी और आम खुदरा उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की कमी या कीमतों में अचानक आने वाली तेजी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
चीनी की कीमतों का विश्लेषण: खुदरा और एक्स-मिल दरों में भारी अंतर
बाजार के मौजूदा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि चीनी की खुदरा और थोक कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त महीने में चीनी की खुदरा कीमतें अपने उच्चतम स्तर यानी 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जो अब घटकर लगभग 58.50 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। इसका मतलब है कि खुदरा कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है। दूसरी ओर, चीनी मिलों से मिलने वाली एक्स-मिल कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि थोक या एक्स-मिल कीमतों में हुई इस 25 प्रतिशत की बड़ी कटौती का पूरा लाभ अभी तक आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है। आने वाले समय में त्योहारों के नजदीक आते ही खुदरा कीमतों में और भी अधिक गिरावट आने की पूरी संभावना है।
उद्योगपतियों और चीनी उत्पादक संगठनों को सरकार के सख्त निर्देश
आम जनता तक सस्ती चीनी का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस उच्च स्तरीय बैठक में चीनी उत्पादक कंपनियों के प्रमुख संगठन ISMA, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज और देश के बड़े चीनी कारोबारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सरकारी अधिकारियों ने व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और रिटेलर्स से अपील की कि वे एक्स-मिल कीमतों में आई इस बड़ी कमी का फायदा तुरंत और सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं। ऐसा करने से आगामी त्योहारों से ठीक पहले खुदरा बाजार में ग्राहकों को काफी सस्ती दरों पर चीनी मिल सकेगी और उनके घरेलू बजट को बड़ी राहत मिलेगी।
नए चीनी सीजन की तैयारी और गन्ना किसानों के लिए बढ़ा हुआ FRP
सरकार ने जोर देकर कहा कि उसकी चीनी नीति में गन्ना उत्पादक किसानों और आम उपभोक्ताओं, दोनों के हितों का समान रूप से ध्यान रखा गया है। देश में नए चीनी सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है। इस नए सीजन के साथ ही गन्ना किसानों को उनके उत्पाद के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बढ़ा हुआ उचित और लाभकारी मूल्य यानी Fair and Remunerative Price (FRP) दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह देश के भीतर चीनी के उत्पादन, घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता और कीमतों के उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रख रही है। यदि भविष्य में बाजार में अस्थिरता दिखती है, तो सरकार उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक और सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।



















