बहराइच जिले में खेती की पारंपरिक और जहरीली होती जा रही पद्धतियों के बीच एक प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले के तेजवापुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली मिर्जापुर ग्राम पंचायत की निवासी लालपरी ने रासायनिक उर्वरकों का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प ढूंढ निकाला है। कृषि सखी के रूप में कार्य कर रही लालपरी न केवल अपने खेतों में जैविक खेती कर रही हैं, बल्कि आसपास के सैकड़ों किसानों को भी इसके लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रही हैं।
गोबर और प्राकृतिक तत्वों से तैयार होती है खाद
कृषि में यूरिया और अन्य रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन की सेहत लगातार गिर रही है। इस समस्या से निपटने के लिए लालपरी ने घनजीवामृत का निर्माण शुरू किया है। यह पूरी तरह से गोबर और अन्य प्राकृतिक घटकों से तैयार की जाने वाली एक सूखी जैविक खाद है। फसलों के विकास के लिए इसे किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है और यह यूरिया का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है। इसके प्रयोग से फसलों की वृद्धि तेजी से होती है और कुल पैदावार में भी सुधार दर्ज किया जाता है।
घनजीवामृत बनाने की सरल और प्रभावी विधि
रासायनिक खादों के विपरीत घनजीवामृत का इस्तेमाल करने से न तो जमीन खराब होती है और न ही पौधों को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है। महज 1 क्विंटल घनजीवामृत खाद करीब 5 बीघे जमीन के लिए पर्याप्त साबित होती है। कृषि सखी लालपरी के बताए गए नुस्खे के अनुसार इस खाद को तैयार करने के लिए 100 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और सूक्ष्मजीवों से युक्त थोड़ी सी जीवित मिट्टी की आवश्यकता होती है।
इन सभी सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिला लिया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण के छोटे-छोटे लड्डू बनाए जाते हैं या इसे धूप में सुखाया जाता है। अच्छी तरह सूख जाने के बाद इसे डंडे से कूटकर एक बारीक पाउडर के रूप में तैयार किया जाता है। इस तैयार जैविक खाद को बोरों में भरकर आगामी 6 महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर किसान इसे आसानी से अपने खेतों में छिड़ककर उपयोग में ला सकते हैं।
किसानों को मिल रही है आत्मनिर्भरता की ट्रेनिंग
घनजीवामृत में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले फायदेमंद बैक्टीरिया मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं। बहराइच की रहने वाली लालपरी अब केवल अपने खेतों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस विशेष खाद को बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक अन्नदाताओं को रासायनिक जहर से मुक्त खेती की तरफ मोड़ना है, जिससे पर्यावरण और इंसानी सेहत दोनों को बचाया जा सके।



















