गणेश चतुर्थी 2026 पर पारंपरिक मराठी लुक के लिए बेहद खूबसूरत हैं ये नथ डिजाइन, हर कोई करेगा तारीफहॉकी इंडिया ने महानिदेशक आर के श्रीवास्तव के सारे अधिकार छीने, जर्सी विवाद समेत लगे आठ गंभीर आरोपहृदय रोगियों के लिए मसूड़ों की ब्लीडिंग हो सकती है खतरनाक, डेंटिस्ट ने दी तुरंत ओरल चेकअप कराने की सलाहबुल्गारिया के सैन्य गोदाम में भीषण धमाके, मालिक का रूसी साजिश का दावा, सरकार ने शुरू की जांचब्रिक्स डिनर में मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने बिखेरा सुरों का जादू, किशोर कुमार के सदाबहार गीतों से जीता सबका दिलजेन जी लड़कियों में तेजी से बढ़ रहे पीसीओएस और पीमॉस के मामले, पटना की डॉक्टर मीना सामंत ने बताए बचाव के प्रभावी उपायबिना कंप्यूटर-इंटरनेट के लिखी गई 200 करोड़ कमाने वाली फिल्म 'हनुमान अंश', लेखक विशाल चतुर्वेदी ने पेन-पेपर से रचा इतिहासलॉरी ड्राइवर की दोहरी जिंदगी का पर्दाफाश, प्रेमिका के गर्भवती होने पर दे रहा है भागने की धमकीयूएई के फ्री ज़ोन मॉडल से बदल सकती है भारत के छोटे शहरों की सूरत, जानिए यह क्या है और इसके फायदेपॉक्सो केस में जमानत मिलने के बाद रोहित चंदेल ने शेयर की पारंपरिक तस्वीर, संस्कृत कैप्शन के साथ लिखा विशेष संदेश
UPI लेनदेन पर MDR शुल्क का आम जनता पर नहीं पड़ेगा असर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी स्पष्ट जानकारीव्यापार
7 अग॰ 2026, 1:29 pm (36 दिन पहले)· 0

UPI लेनदेन पर MDR शुल्क का आम जनता पर नहीं पड़ेगा असर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी स्पष्ट जानकारी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट केवल कारोबारियों पर लागू होगा, जबकि आम नागरिकों के लिए डिजिटल भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेगा।

डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले आम उपभोक्ताओं को लेन-देन पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का प्रभाव केवल व्यावसायिक संस्थानों और व्यापारियों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस शुल्क व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बैंकों और डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाताओं को अपने तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा और नवाचार में निवेश बढ़ाने में मदद करना है, ताकि देश की डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक मजबूत हो सके।

संसदीय विधेयक और स्टीयरिंग कमेटी का फैसला

कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा उठाए गए सवालों और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंकाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यूपीआई और एनपीसीआई के मार्गदर्शन में काम कर रही सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने अभी MDR पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। शुल्क से जुड़े किसी भी नियम को अंतिम रूप तब दिया जाएगा, जब संसद 'कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2026' को पारित कर देगी।

मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए इस संशोधन विधेयक के माध्यम से उन कानूनी बाधाओं को हटाने का प्रस्ताव है, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने से रोकती हैं। बिल पारित होने के बाद सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह अधिसूचना जारी करके यह निर्धारित कर सके कि कौन-से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम पूरी तरह निशुल्क रहेंगे।

2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क का दायरा

विधेयक पारित होने के बाद प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकार 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के व्यापारी भुगतानों पर 0.25 प्रतिशत से लेकर 0.40 प्रतिशत तक का मर्चेंट डिस्काउंट रेट वसूलने की अनुमति दे सकती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन कुल यूपीआई लेनदेन की संख्या का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही बनाते हैं।

हालांकि, संख्या के मामले में केवल 5 प्रतिशत होने के बावजूद कुल लेनदेन मूल्य में इन बड़े भुगतानों की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है। चूंकि 2,000 रुपये से कम के भुगतान इस दायरे से बाहर हैं, इसलिए दूध, सब्जी, किराना सामान की खरीदारी और ऑटो या टैक्सी का किराया चुकाने जैसी दैनिक जरूरतों के लिए किए जाने वाले भुगतानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

डिजिटल भुगतान के आंकड़े और सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट शेयर करते हुए दोहराया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट से मिलने वाले राजस्व का सीधा फायदा अंततः आम ग्राहकों को ही मिलेगा, क्योंकि इससे सिस्टम अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगा।

भारत में डिजिटल भुगतानों की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल जुलाई महीने के भीतर देश भर में लगभग 23.7 अरब यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए। इन लेनदेन का कुल वित्तीय मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

क्या आम ग्राहकों को यूपीआई लेनदेन पर शुल्क देना होगा?
नहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित MDR शुल्क केवल व्यापारियों और व्यावसायिक संस्थानों पर लागू होगा।
यूपीआई पर MDR शुल्क के लिए क्या सीमा तय की गई है?
0.25 प्रतिशत से 0.40 प्रतिशत का प्रस्तावित MDR शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा।
क्या दूध, सब्जी या किराना सामान की खरीदारी पर असर पड़ेगा?
2,000 रुपये से कम के छोटे दैनिक भुगतान जैसे दूध, सब्जी, किराना और ऑटो-टैक्सी किराया इस दायरे से बाहर हैं और अप्रभावित रहेंगे।
जुलाई महीने में कितने यूपीआई लेनदेन हुए थे?
जुलाई में लगभग 23.7 अरब यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए थे, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये था।
यूपीआई MDR शुल्क पर अंतिम फैसला कब होगा?
इस पर अंतिम निर्णय संसद द्वारा 'कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2026' पारित होने के बाद लिया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR