नई दिल्ली में भारतीय उद्योग जगत को एक बड़ा सरप्राइज देते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने रविवार को अपने उत्तराधिकारी के रूप में बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर के नाम का ऐलान कर दिया। इस बड़े फैसले के बाद अब छह लाख करोड़ रुपये के विशाल मार्केट कैप वाले इस औद्योगिक साम्राज्य की जिम्मेदारी युवा हाथों में सौंपे जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। अनिल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी जल्द ही सार्वजनिक और कारोबारी मोर्चे पर पूरी सक्रियता के साथ मुख्य भूमिका निभाती हुई नजर आएंगी। इस घोषणा के सामने आने के बाद से ही कारोबारी गलियारों में इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि प्रिया के पास इस विशाल कॉर्पोरेट घराने को संभालने का क्या अनुभव और विजन है।
वेदांता समूह का उत्तराधिकार और प्रिया अग्रवाल की भूमिका
अनिल अग्रवाल द्वारा किए गए इस बड़े ऐलान ने देश के बिजनेस सेक्टर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। समूह के चेयरमैन ने बताया कि आने वाले समय में वेदांता समूह को एक नया और युवा नेतृत्व मिलने जा रहा है। प्रिया अग्रवाल हेब्बर को उत्तराधिकारी बनाए जाने के बाद कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं। अनिल अग्रवाल के इस कदम को वेदांता ग्रुप में पीढ़ीगत बदलाव की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां पारंपरिक नेतृत्व से हटकर युवा पीढ़ी को आगे लाया जा रहा है।
बिहार से लंदन तक का सफर और कारोबारी विरासत
वेदांता समूह के संस्थापक अनिल अग्रवाल की यह यात्रा बिहार के पटना से शुरू होकर लंदन तक पहुंची है। महज 15 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ने वाले अनिल अग्रवाल ने शून्य से शुरुआत कर करीब दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की नींव रखी थी, जो आज बढ़कर छह लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मार्केट कैप तक पहुंच चुका है। हालांकि, परिवार को कुछ समय पहले उस समय गहरी क्षति उठानी पड़ी थी जब उनके बेटे अग्निवेश का निधन हो गया था। अब पारिवारिक और कारोबारी जिम्मेदारियों के इस दौर में बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर पर इस विशाल मेटल और माइनिंग साम्राज्य को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आ गई है।
अनिल अग्रवाल का शुरुआती संघर्ष और बॉलीवुड का सपना
अनिल अग्रवाल के जीवन में एक समय ऐसा भी था जब उनकी रुचि फिल्मों और बॉलीवुड की दुनिया में जाने की थी, लेकिन उनके पिता ने उन्हें बिजनेस की दुनिया में उतार दिया। इस फैसले ने उनकी जिंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी और उन्होंने मेटल सेक्टर में अपनी मजबूत पकड़ बनाते हुए वेदांता को ग्लोबल लेवल पर खड़ा किया। अब उनके इसी विशाल औद्योगिक साम्राज्य की बागडोर उनकी बेटी प्रिया के हाथों में सौंपी जा रही है, जो इस कंपनी के कामकाज को संभालेंगी और इसे नए आयाम देंगी।
















