अहमदाबाद में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के परिवहन नेटवर्क को लेकर विस्तार से चर्चा की और भारतीय रेलवे के विकास का पूरा लेखा-जोखा देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के रेलवे तंत्र का अभूतपूर्व कायाकल्प हुआ है, जिसकी चर्चा आज वैश्विक स्तर पर हो रही है। इस दौरान उन्होंने रेलवे की बदलती तस्वीर को बयां करने वाले कई महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए और विपक्ष पर तीखे राजनीतिक प्रहार भी किए।
डीजल खपत को पूरी तरह खत्म करने का बड़ा लक्ष्य
पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की भारी बचत पर जोर देते हुए अमित शाह ने बताया कि भारतीय रेलवे में डीजल के इस्तेमाल को सुनियोजित तरीके से कम किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान रेलवे कुल 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत करता था, जो घटकर वर्ष 2024-25 में मात्र 108 करोड़ लीटर पर आ गया है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2030 तक रेलवे में डीजल की खपत को पूरी तरह से शून्य कर दिया जाएगा। इस कदम से देश की विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी और पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
विद्युतीकरण की रफ्तार में ऐतिहासिक उछाल
रेल लाइनों के विद्युतीकरण के मोर्चे पर सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने पूर्व की यूपीए सरकार और मौजूदा सरकार के आंकड़ों की तुलना की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010-11 के दौरान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक वर्ष में केवल 75 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण हो पाता था। इसके विपरीत वर्ष 2023-24 के दौरान रिकॉर्ड तेजी लाते हुए एक ही साल में 7,188 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण पूरा किया गया। वर्तमान समय में भारतीय रेलवे नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह विद्युतीकृत हो चुका है और शेष 0.3 प्रतिशत कार्य को भी बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
स्वीडन के पैमाने से तुलना और वैश्विक स्थिति
इस बात का जिक्र करते हुए कि दुनिया भर में केवल स्वीडन ने 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल किया है, गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वीडन के छोटे रेल नेटवर्क और भारत के विशालकाय रेल नेटवर्क के आकार में दस गुना से भी अधिक का अंतर है। इसके बावजूद भारत ने जिस पैमाने पर विद्युतीकरण का कार्य किया है, वह अपने आप में एक मिसाल है।
राजनीतिक तुलना और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर प्रहार
विकास कार्यों का यह पूरा ब्योरा देने के बाद अमित शाह ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जनता को विपक्षी नेताओं से विकास के इन आंकड़ों पर सवाल जरूर पूछने चाहिए। उन्होंने पुरानी सरकार के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विभिन्न घोटालों के आरोप सामने आए थे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों का शासनकाल पूरी तरह पारदर्शी और बेदाग रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां पिछला दौर घोटालों के लिए जाना जाता था, वहीं वर्तमान कार्यकाल ने देश को भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और तकनीकी प्रगति दोनों दिए हैं।



















