हमारे देश की अर्थव्यवस्था में खेती-बाड़ी की भूमिका हमेशा से रीढ़ की हड्डी जैसी रही है। सदियों से कृषि कार्यों से जुड़े अन्नदाताओं के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है। हालांकि समय के साथ खेती करने के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आ चुका है। एक दौर ऐसा था जब खेतों की हर जुताई और बुवाई इंसानों या जानवरों के बल पर होती थी, लेकिन आज मशीनीकरण ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। आधुनिक यंत्रों के आने से न केवल किसानों का शारीरिक श्रम बचा है, बल्कि फसलों की पैदावार में भी काफी सटीकता आई है। बावजूद इसके, इन आधुनिक मशीनों और कृषि उपकरणों की ऊंची कीमतें आम किसानों की पहुंच से बाहर होती हैं। देश का हर किसान आर्थिक रूप से इतना मजबूत नहीं है कि वह अपनी जेब से भारी रकम खर्च कर महंगे कृषि यंत्र खरीद सके और पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकल पाए।
किसानों की इसी आर्थिक लाचारी और परेशानियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य किसानों को बहुत कम लागत में आधुनिक कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराना और खेती को अधिक वैज्ञानिक एवं सटीक बनाना है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना देश भर के अन्नदाताओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी कदम साबित हो रही है। इस योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा लाभ अब बिहार के जहानाबाद जिले के स्थानीय किसानों को भी मिलना शुरू हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर इस योजना के तहत आवेदन लेने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिससे जुड़कर किसान इसका पूरा लाभ उठा सकते हैं।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और आवेदन प्रक्रिया
यह योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है बल्कि जमीन पर उतरकर किसानों की तकदीर बदल रही है। वर्तमान में जहानाबाद के किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह पात्र हैं और इसके लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन प्रक्रिया चल रही है। यदि कोई भी किसान इस सरकारी योजना का लाभ लेना चाहता है, तो उसे अपने स्मार्टफोन में बिहार कृषि ऐप डाउनलोड करना होगा। इसी मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए आवेदन करने की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐप के माध्यम से आवेदन करने के बाद पात्र किसानों का चयन किया जाता है और उन्हें योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और अनुदान का लाभ सीधे तौर पर हस्तांतरित किया जाता है।
बोरिंग और स्प्रिंकलर पर मिलने वाली भारी छूट
जहानाबाद जिला उद्यान पदाधिकारी रूबी कुमारी ने इस योजना के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। इस विशेष योजना के प्रावधानों के तहत यदि किसान अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली, मिनी स्प्रिंकलर या पोर्टेबल स्प्रिंकलर स्थापित करते हैं, तो उन्हें सरकार की तरफ से भारी आर्थिक सहायता दी जाती है। इन संयंत्रों को लगवाने पर किसानों को कुल लागत का 55 प्रतिशत तक का अनुदान सीधे तौर पर प्रदान किया जाता है। इसके अलावा इस सिंचाई प्रणाली को पूरी तरह से सपोर्ट देने और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यदि कोई किसान बोरिंग पंप सेट की योजना का लाभ उठाना चाहता है, तो सरकार उसे और अधिक राहत देती है। ऐसे किसानों को बोरिंग कराने के बाद सरकारी अनुदान के रूप में 40 हजार रुपये की सहायता राशि एकमुश्त यानी एक साथ दी जाती है।
पानी की बचत और फसलों की सुरक्षा
जिला उद्यान पदाधिकारी ने आगे बताया कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए जिले के सभी इच्छुक कृषकों को अपने मोबाइल फोन में बिहार कृषि ऐप अनिवार्य रूप से डाउनलोड करना होगा। इसी डिजिटल माध्यम से आवेदन करने की प्रक्रिया को पूरा करना है, और आवेदन के सफल सत्यापन के बाद चयनित लाभार्थियों को योजना का फायदा मिलने लगेगा। चाहे खेतों में ड्रिप स्प्रिंकलर लगाया जाए या फिर मिनी स्प्रिंकलर, इन सभी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से पानी की भारी बचत होती है। पारंपरिक सिंचाई के उलट इन प्रणालियों से फसलों को उतनी ही पानी की आपूर्ति की जाती है जितनी उसकी वास्तविक आवश्यकता होती है। इस वैज्ञानिक तरीके से न तो पानी की एक भी बूंद बर्बाद होती है और न ही अधिक या कम पानी मिलने की वजह से फसलें खराब होने का खतरा रहता है। यही एक मुख्य वजह है कि सरकार आधुनिक सिंचाई से जुड़ी इन मशीनों और उपकरणों को अपनाने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है और उन पर उदारतापूर्वक अनुदान राशि भी दे रही है।


















