बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से आए, यह कहावत इस समय पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की मौजूदा जमीनी हकीकत पर बिल्कुल सटीक बैठती नजर आती है। जिस देश ने दशकों तक आतंकी संगठनों को अपनी रणनीतिक नीति के तहत पाला-पोसा और उनका इस्तेमाल भारत समेत अन्य पड़ोसी देशों के खिलाफ प्रॉक्सी के रूप में किया, आज वही देश खुद आतंकवाद की सबसे भीषण आग में झुलस रहा है। हालात यह हैं कि ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान दुनिया भर में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश के रूप में शीर्ष पर पहुंच गया है। इस चौंकाने वाली और गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसा है और देश की सुरक्षा एवं विदेश नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आतंकवाद को पालने का अंजाम
पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि जब कोई अपने घर के पिछले हिस्से में सांप पालता है, तो एक दिन वही जहरीला सांप घर के ही सदस्यों को डसता है। उनके अनुसार पाकिस्तान ने करीब 50 साल पहले चरमपंथी जिहादी संगठनों को वित्तीय और सैन्य मदद देकर हथियारबंद करना शुरू किया था। आज उसी नीति का परिणाम है कि वह देश दुनिया भर में आतंकवादी हमलों और उससे होने वाली मौतों के मामले में सबसे ऊपर पहुंच चुका है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान की ओर से लंबे समय तक चलाई गई इन नीतियों ने अब उसी के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से खोखला कर दिया है, जिससे आम नागरिकों और सुरक्षा बलों का जीवन खतरे में पड़ गया है।
आतंकवाद के बढ़ते आंकड़े और वैश्विक रुझान
इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 के दौरान पाकिस्तान में कुल 1,045 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1,139 लोगों की जान चली गई। हैरानी की बात यह है कि देश में आतंकवाद से होने वाली मौतों में लगभग 6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह लगातार छठा ऐसा साल रहा जब पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद से मरने वालों का ग्राफ ऊपर ही गया। इसके विपरीत अगर वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो दुनिया भर में आतंकवाद का असर काफी हद तक कम हुआ है। साल 2025 में वैश्विक स्तर पर आतंकवादी हमलों में होने वाली मौतें करीब 28 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 5,582 पर आ गईं, जबकि घटनाओं की संख्या भी लगभग 22 फीसदी घटकर 2,944 रह गई। लेकिन वैश्विक सुधार के इस दौर में भी पाकिस्तान की तस्वीर पूरी तरह उलट रही और वहां आतंकवाद का ग्राफ लगातार चढ़ता ही चला गया।
टीटीपी बना देश के लिए सबसे बड़ा नासूर
रिपोर्ट में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP को पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद से होने वाली तबाही और मौतों के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार संगठन करार दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद के कारण हुई कुल मौतों में से अकेले 56 फीसदी का सीधा संबंध TTP से था। इस संगठन ने उस साल देश भर में कुल 595 खूनी हमलों को अंजाम दिया, जिनमें 637 बेकसूर लोगों की मौत हो गई। विडंबना यह है कि जिस चरमपंथी और जिहादी नेटवर्क को पाकिस्तान ने कभी अपनी सामरिक गहराई की नीति के तहत खड़ा किया था और जिसे खत्म करने के लिए आज उसकी सेना अपनी पूरी ताकत झोंक रही है, वही नासूर अब देश की नींव को हिला रहा है।
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सबसे ज्यादा हिंसा
पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद का सबसे भयानक दबाव उसके पश्चिमी और दूरदराज के इलाकों पर बना हुआ है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि साल 2025 के दौरान हुए कुल आतंकवादी हमलों में से 74 फीसदी से ज्यादा अकेले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में हुए। इसके अलावा देश भर में आतंकवाद के कारण होने वाली कुल मौतों का 67 फीसदी हिस्सा भी इन्हीं दोनों संवेदनशील इलाकों में दर्ज किया गया। रिपोर्ट में इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की साझा सीमा पर लगातार बढ़ती हिंसा इस स्थिति की एक बहुत बड़ी वजह है। साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के तुरंत बाद से ही सीमा के दोनों ओर सक्रिय आतंकवादी संगठनों और चरमपंथी समूहों की गतिविधियों में भारी तेजी आई है, जिससे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल हो गया है।
बीएलए द्वारा ट्रेन हाईजैक और भीषण तबाही
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की इस रिपोर्ट में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA द्वारा फैलाई जा रही हिंसा और उसके खूंखार हमलों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 के दौरान इस विद्रोही संगठन ने क्वेटा के पास मुख्य रेलवे ट्रैक को निशाना बनाकर एक बड़ा हमला किया और एक चलती हुई यात्री ट्रेन पर जबरन कब्जा कर लिया था। इस सनसनीखेज घटना के दौरान ट्रेन में सवार कुल 442 यात्रियों और कर्मियों को बंधक बना लिया गया था, जिससे देश भर में हड़कंप मच गया था। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक इस भीषण हमले और उसके बाद हुई कार्रवाई में कुल 21 बंधक यात्रियों, 4 सैन्यकर्मियों और 33 विद्रोहियों की जान चली गई थी, जो देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।



















