त्योहारों के इस मौसम में यदि आप महिंद्रा की दमदार एसयूवी घर लाने की सोच रहे हैं, तो आपको अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ सकती है। महिंद्रा एंड महिंद्रा अपने सबसे लोकप्रिय और मांग वाले मॉडल्स थार, स्कॉर्पियो और एक्सयूवी 7एक्सओ की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। अगर ऑटोमोबाइल निर्माता इस फैसले को लागू करता है, तो यह महज एक साल के भीतर कंपनी की तरफ से की जाने वाली चौथी मूल्य वृद्धि होगी। इससे त्योहारी सीजन के दौरान नई कार खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।
बढ़ती इनपुट लागत और मूल्य वृद्धि का कारण
महिंद्रा ऑटोमोटिव के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नलिनीकांत गोल्लागुंटा ने एक इंटरव्यू में बताया कि कंपनी चालू कैलेंडर वर्ष में पहले ही तीन बार गाड़ियों के दाम बढ़ा चुकी है। ये मूल्य वृद्धियां क्रमशः जनवरी, अप्रैल और जुलाई के महीनों में लागू की गई थीं। इनमें से जुलाई में की गई बढ़ोतरी के तहत कंपनी के विभिन्न एसयूवी मॉडल्स की कीमतों में लगभग 2.7 प्रतिशत का इजाफा किया गया था। गोल्लागुंटा ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में जिंस यानी कमोडिटी की कीमतों में हुई वृद्धि को देखते हुए कंपनी आने वाले कुछ हफ्तों में इस बात पर अंतिम फैसला लेगी कि कीमतों में एक और बढ़ोतरी करना जरूरी है या नहीं।
मजबूत मांग और जीएसटी का असर
कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे के बावजूद बाजार में महिंद्रा की गाड़ियों के प्रति दीवानगी कम नहीं हुई है। सीईओ गोल्लागुंटा के अनुसार, हाल ही में की गई मूल्य वृद्धियों का ग्राहकों की पूछताछ और बुकिंग पर कोई खास नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला है। उन्होंने मांग मजबूत बने रहने का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि महिंद्रा के वाहन अभी भी माल एवं सेवा कर (GST) में कटौती से पहले की कीमतों की तुलना में काफी कम दाम पर उपलब्ध हैं। यही वजह है कि बाजार में इनकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी त्योहारी सीजन में न केवल महिंद्रा, बल्कि पूरे वाहन उद्योग में मांग काफी बेहतर रहेगी। इस मजबूत मांग का श्रेय उन्होंने जीएसटी दरों में बदलाव के बाद आई अनुकूल कीमतों और अपडेटेड उत्पाद पोर्टफोलियो को दिया।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्राथमिकता
वाहन उद्योग में हाइब्रिड तकनीक की बढ़ती चर्चा और इसके उपयोग को लेकर पूछे गए सवाल पर गोल्लागुंटा ने कंपनी का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि महिंद्रा का मुख्य ध्यान फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के विकास और उनकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर केंद्रित है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर भविष्य में सरकारी नियामक नियमों या नीतियों में कोई बदलाव होता है, तो कंपनी अपनी रणनीति को उसके अनुसार बदल सकती है। लेकिन वर्तमान समय में बिजली से चलने वाले वाहनों (इलेक्ट्रिक मोबिलिटी) को बढ़ावा देना ही कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उत्पादन क्षमता में विस्तार और नए लॉन्च की योजना
कंपनी की विनिर्माण क्षमता के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में महिंद्रा के पास हर महीने लगभग 60,000 पारंपरिक ईंधन (ICE) वाहनों और करीब 8,000 इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन करने की क्षमता है। कंपनी की योजना अगले साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक इस क्षमता को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की है। इसके तहत पारंपरिक ईंधन वाहनों (ICE) की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 70,000 यूनिट प्रति माह और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की क्षमता को बढ़ाकर 12,000 यूनिट प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है। इस विस्तार के बाद महिंद्रा की कुल मासिक उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 84,000 वाहनों तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही, गोल्लागुंटा ने खुलासा किया कि कंपनी आगामी दो तिमाहियों के भीतर अपने कई मौजूदा वाहनों को नए अपडेट्स के साथ पेश करेगी और इसके साथ ही दो बिल्कुल नए मॉडल्स भी बाजार में उतारेगी।


















