देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर भारतीय रेलवे अपने परिचालन नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान समय में यह आधुनिक ट्रेन हरियाणा में जींद और सोनीपत के मध्य 89 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर दौड़ रही है। इस पूरे मार्ग पर यात्रियों की भारी कमी देखने को मिल रही है, जिसके चलते रेलवे प्रशासन अब इस सेवा का दायरा बढ़ाकर देश की राजधानी तक करने का गंभीर विकल्प तलाश रहा है। इस पूरी योजना पर मुहर लगती है तो यह हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली के आजादपुर रेलवे स्टेशन तक अपनी नियमित सेवा दे सकती है।
खाली सीटों की समस्या और सीमित फेरे
इस ट्रेन की यात्री वहन क्षमता को देखा जाए तो इसमें एक समय में लगभग 2,600 यात्रियों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है। इसके विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि जींद से सोनीपत के बीच पूरे फेरे के दौरान रोजाना औसतन मात्र 40 से 60 यात्री ही इस ट्रेन में सफर करते दिख रहे हैं। इतनी बड़ी क्षमता वाली ट्रेन में यात्रियों की संख्या इतनी कम रहने की वजह से रेलवे इसे दिनभर में केवल एक चक्कर के लिए ही चला पा रहा है। शुरुआत में अधिकारियों ने इसे रोजाना दो चक्कर चलाने की रूपरेखा तैयार की थी। 17 जुलाई को पटरी पर उतरी इस ट्रेन को भारत में पर्यावरण अनुकूल स्वदेशी हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा गया था।
आजादपुर स्टेशन तक ट्रायल और तकनीकी निगरानी
एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ट्रेन को दिल्ली स्थित आजादपुर स्टेशन तक ले जाने के लिए ट्रैक और तकनीकी स्तर पर जरूरी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। जानकारों और विशेषज्ञों का एक विशेष दल ट्रेन के सामान्य संचालन की निगरानी करने के साथ ही दिल्ली रूट पर संभावित ट्रायल रन की प्रक्रिया पर भी पैनी नजर बनाए हुए है। हालांकि रेलवे प्रशासन ने इस विस्तार को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन तकनीक रेलवे के लिए बिल्कुल नई और आधुनिक प्रणाली है, इसलिए यात्रियों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है। सभी तकनीकी, परिचालन और सुरक्षा पैमानों की गहन समीक्षा पूरी होने के बाद ही दिल्ली तक चलाने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
रिफ्यूलिंग सुविधा, दूरी और कोच क्षमता की बड़ी चुनौतियां
ईंधन क्षमता की बात करें तो हाइड्रोजन ट्रेन का टैंक एक बार पूरी तरह भरने पर यह करीब 250 से 300 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर सकती है। वर्तमान में हाइड्रोजन गैस भरने की रिफ्यूलिंग सुविधा सिर्फ जींद में ही स्थापित है। चूंकि जींद से दिल्ली की कुल दूरी करीब 130 किलोमीटर बैठती है, इसलिए ईंधन की क्षमता के हिसाब से ट्रेन बिना किसी रुकावट के इस दूरी को पूरा कर सकती है। इसके बावजूद दिल्ली तक ट्रेन के विस्तार में कुछ अन्य व्यावहारिक मुश्किलें भी सामने आ रही हैं। यह ट्रेन कुल 10 कोच के रैक के साथ तैयार की गई है, जिसकी कुल क्षमता करीब 2,600 यात्रियों की है। दिल्ली से चलने वाली सामान्य पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों में भारी भीड़ को संभालने के लिए आमतौर पर 18 से 20 से अधिक कोच की आवश्यकता पड़ती है, जिसे लेकर परिचालन योजना पर मंथन किया जा रहा है।
















