एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में किसी भी मुकाबले का परिणाम केवल स्कोरबोर्ड पर टंगे रनों या गिरे हुए विकेटों की गिनती से तय नहीं होता, बल्कि उस निर्णायक क्षण से निर्धारित होता है जब कोई खिलाड़ी व्यक्तिगत कौशल से पूरे मैच का पासा पलट देता है। जब भी कोई क्रिकेटर अपनी टीम की विजय का मुख्य आधार बनता है, तो उसकी उत्कृष्ट भूमिका को प्लेयर ऑफ द मैच के सम्मान से नवाजा जाता है। 50 ओवरों के इस प्रारूप में कुछ चुनिंदा दिग्गजों ने मैदान पर ऐसा लंबे समय तक दबदबा बनाए रखा कि वे बार-बार इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को अपने नाम करने में सफल रहे। आइए जानते हैं उन शीर्ष पांच क्रिकेटरों के बारे में जिन्होंने वनडे इतिहास में सर्वाधिक बार मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब जीता है।
शीर्ष स्थान पर सचिन तेंदुलकर का ऐतिहासिक कीर्तिमान
वनडे प्रारूप में सर्वाधिक बार प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार हासिल करने का सर्वकालिक रिकॉर्ड भारत के दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के खाते में दर्ज है। तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर अपना सफर वर्ष 1989 में शुरू किया था और वर्ष 2012 तक यानी 23 से भी अधिक वर्षों तक अपनी निरंतरता का लोहा मनवाया। अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने भारत के लिए कुल 463 एकदिवसीय मैच खेले। अपनी बेजोड़ तकनीकी महारत और क्रीज पर शांत एकाग्रता के धनी सचिन तेंदुलकर ने इन 463 मुकाबलों में कुल 62 बार मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान अर्जित किया।
यह विशाल आंकड़ा साफ तौर पर दर्शाता है कि सचिन तेंदुलकर ने केवल व्यक्तिगत आंकड़े जुटाने के लिए रन नहीं बनाए, बल्कि उनकी पारियां सीधे तौर पर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाती थीं। विशेष रूप से नब्बे के दशक के दौर में, जब भारतीय बल्लेबाजी की पूरी जिम्मेदारी मुख्य रूप से सचिन के मजबूत कंधों पर टिकी होती थी, तब उन्होंने दर्जनों मौकों पर अकेले संघर्ष करते हुए मुकाबलों का रुख भारत के पक्ष में मोड़ा था। करियर में 62 बार यह पुरस्कार अपने नाम करना एक ऐसा असाधारण कीर्तिमान है, जिसके नजदीक फटकना भी आधुनिक क्रिकेटरों के लिए बेहद कठिन चुनौती माना जाता है।
दूसरे पायदान पर श्रीलंका के धाकड़ सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या
इस ऐतिहासिक सूची में दूसरा स्थान श्रीलंका के आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज सनथ जयसूर्या का है। सनथ जयसूर्या ने 1989 से 2011 के दौरान श्रीलंका और एशिया एकादश का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 445 एकदिवसीय मुकाबले खेले। जयसूर्या ने सीमित ओवरों के खेल में पारी की शुरुआत करने के पारंपरिक तौर-तरीकों को पूरी तरह नया रूप दिया था। मैच के शुरुआती 15 ओवरों में लागू रहने वाली फील्डिंग पाबंदियों का भरपूर लाभ उठाकर विपक्षी गेंदबाजों पर पहले ही घंटे में टूट पड़ना और मुकाबले को विरोधी खेमे की पहुंच से बाहर कर देना उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
सनथ जयसूर्या ने अपने 445 मैचों के लंबे एकदिवसीय करियर में 48 बार प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार हासिल किया। उनका यह योगदान सिर्फ बल्ले तक ही सीमित नहीं रहता था, बल्कि वह अपनी चतुर और किफायती बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी से भी कई अहम मौकों पर विपक्षी साझेदारियों को तोड़कर मैच जिताऊ प्रदर्शन करते थे। इसी बेहतरीन ऑलराउंड क्षमता और विस्फोटक बल्लेबाजी शैली के संयोजन ने उन्हें अपने करियर में 48 बार मुकाबले का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने का गौरव दिलाया।
कम मुकाबलों में तेज गति से आगे बढ़ते विराट कोहली
वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक मैच जिताऊ पुरस्कार जीतने वाले खिलाड़ियों की इस सूची में तीसरे स्थान पर भारत के आधुनिक रन मशीन विराट कोहली विराजमान हैं। वर्ष 2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले विराट कोहली ने 2026 तक 314 एकदिवसीय मुकाबले खेलते हुए 45 बार प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार अपने नाम किया है। कोहली की सबसे विशिष्ट पहचान दबाव की परिस्थितियों में लक्ष्य का पीछा करते हुए मुकाबले को सफलतापूर्वक खत्म करने की उनकी बेजोड़ क्षमता रही है।
सचिन तेंदुलकर और सनथ जयसूर्या जैसे दिग्गजों की तुलना में काफी कम मैच खेलकर 45 बार यह पुरस्कार प्राप्त करना विराट कोहली के असाधारण अवार्ड-टू-मैच अनुपात को उजागर करता है। जहां सचिन ने 463 और जयसूर्या ने 445 मैच खेले, वहीं कोहली ने महज 314 मैचों में ही 45 बार इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। अपने पूरे करियर में उन्होंने जिस निरंतरता और गति से रन बटोरे हैं, वह आधुनिक एकदिवसीय क्रिकेट में लगातार जीत दिलाने की सबसे सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है।
हरफनमौला योगदान की मिसाल जैक कैलिस
दक्षिण अफ्रीका, अफ्रीका एकादश और आईसीसी का प्रतिनिधित्व करने वाले जैक कैलिस को क्रिकेट की दुनिया के सबसे मुकम्मल ऑलराउंडरों में गिना जाता है। वर्ष 1996 से 2014 के मध्य खेले गए अपने 328 एकदिवसीय मुकाबलों में जैक कैलिस ने कुल 32 बार मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब अर्जित किया। कैलिस का टीम में योगदान हमेशा दोहरा और निर्णायक होता था, जिससे विपक्षी टीमों पर लगातार दबाव बना रहता था।
वह शीर्ष क्रम में उतरकर पारी को स्थायित्व प्रदान करते थे और पारी की नींव को मजबूत करने का काम करते थे। इसके साथ ही अपनी सटीक मध्यम तेज गेंदबाजी की बदौलत वह विपक्षी टीमों के प्रमुख बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने में निपुण थे। जब भी दक्षिण अफ्रीकी टीम किसी संकट या दबाव के दौर से गुजर रही होती, तब कैलिस अपनी संयमित बल्लेबाजी अथवा धारदार गेंदबाजी से मैच का पूरा परिदृश्य बदल देते थे। इसी हरफनमौला कौशल के दम पर उन्होंने 32 बार यह सम्मान प्राप्त किया।
ऑस्ट्रेलियाई विजय अभियान के मजबूत कर्णधार रिकी पोंटिंग
जैक कैलिस के समान ही 32 बार प्लेयर ऑफ द मैच बनने का गौरव ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम भी दर्ज है। वर्ष 1995 से 2012 के दौरान ऑस्ट्रेलिया और आईसीसी के लिए 375 एकदिवसीय मैच खेलने वाले रिकी पोंटिंग उस स्वर्णिम ऑस्ट्रेलियाई युग के सबसे प्रमुख चेहरे थे, जब उनकी टीम ने विश्व क्रिकेट पर एकतरफा दबदबा कायम कर रखा था।
तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए पोंटिंग की आक्रामक शैली और कप्तानी के भारी दबाव के बीच आगे बढ़कर नेतृत्व करने की क्षमता उन्हें बेहद खास बनाती थी। विश्व कप जैसे वैश्विक और दबाव भरे टूर्नामेंटों में पोंटिंग ने कई यादगार और मैच जिताऊ पारियां खेलीं। 375 मुकाबलों में 32 बार मुकाबले का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना जाना यह स्पष्ट करता है कि उस दौर में ऑस्ट्रेलियाई टीम की अनगिनत ऐतिहासिक जीतों के पीछे रिकी पोंटिंग के बल्ले और उनकी मैच विजेता भूमिका का कितना बड़ा योगदान था।



















