अटरू पालिका अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की निशा नैनीवाल विजयी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई हारेजोधपुर में सजेगा तरंग शक्ति युद्धाभ्यास का मंच, माउंट आबू में वायुसेना ने टाला बड़ा अग्निकांडबीकानेर में टिश्यू कल्चर से बिना मिट्टी और बेमौसम उगेंगे शहतूत और नींबू के पौधे, स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय को मिली कामयाबीमिड-साइज एसयूवी सेगमेंट में हुंडई क्रेटा का दबदबा बरकरार, अगस्त 2026 में 16,288 गाड़ियों की बिक्रीकॉइनबेस ने अमेरिकी खुदरा निवेशकों के लिए आईपीओ आवंटन की सुविधा शुरू की, ओउरा से होगी शुरुआतडॉगकॉइन में लौटी संस्थागत खरीदारी, 0.10 डॉलर के अहम स्तर पर टिकी नजरेंअमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख के बीच ब्रिटिश पाउंड में गिरावट का दबाव, 1.3335 का स्तर छूने की संभावनाकरौली में भद्रावती किनारे विश्राम मुद्रा वाले बैठे हनुमान, जानिए राजमहल के अखाड़े से प्रकट होने का इतिहासमिजोरम में समान नागरिक संहिता लागू होने से सुरक्षित होंगी मिजो महिलाएं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के ह्रामो ने दिया तर्कवनडे क्रिकेट में किन दिग्गजों ने जीते सबसे ज्यादा प्लेयर ऑफ द मैच पुरस्कार, देखिए शीर्ष 5 नामों की पूरी फेहरिस्त
मिजोरम में समान नागरिक संहिता लागू होने से सुरक्षित होंगी मिजो महिलाएं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के ह्रामो ने दिया तर्कमिजोरम
22 सित॰ 2026, 12:42 pm (50 मिनट पहले)· 1

मिजोरम में समान नागरिक संहिता लागू होने से सुरक्षित होंगी मिजो महिलाएं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के ह्रामो ने दिया तर्क

मिजोरम बीजेपी अध्यक्ष और विधायक के ह्रामो ने राज्य में समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए कहा कि इससे संपत्ति, विवाह और परित्याग जैसे मामलों में महिलाओं को मजबूत कानूनी कवच मिलेगा।

मिजोरम में समान नागरिक संहिता को लागू करने की जोरदार वकालत करते हुए राज्य बीजेपी अध्यक्ष और विधायक के ह्रामो ने कहा है कि यह कानून मिजो महिलाओं के अधिकारों को मजबूती प्रदान कर सकता है। आइजोल में आयोजित पार्टी की मिजोरम इकाई के एक राजनीतिक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह, संपत्ति में अधिकार और वैवाहिक परित्याग से जुड़े मामलों में महिलाओं को इससे ठोस कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले विधेयकों का विरोध अक्सर नियमों की वास्तविक समझ के अभाव और बिना आधार की आशंकाओं के कारण किया जाता है, जिससे लोगों में राज्य के हितों को नुकसान पहुंचने का बेवजह डर बैठ जाता है।

जनजातीय पहचान और समान नागरिक संहिता का दायरा

सियाहा जिले के तिपा विधानसभा क्षेत्र से विधायक के ह्रामो ने कहा कि राज्य के जनजातीय स्वरूप और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही इस कानून पर विचार किया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जनजातीय समुदाय अनिवार्य रूप से समान नागरिक संहिता के दायरे में नहीं आते हैं। इसके समर्थन में उन्होंने यह दलील भी दी कि देश के जिन राज्यों ने अब तक इस नागरिक संहिता को अपनाया है, उन्होंने भी अपनी जनजातीय आबादी को इसके कानूनी प्रावधानों से पूरी तरह अलग रखा हुआ है। इसलिए स्थानीय आबादी के रीति-रिवाजों को लेकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

ये भी पढ़ें

गैर-जनजातीय विवाह और महिलाओं की सुरक्षा का सवाल

के ह्रामो ने इस बात पर जोर दिया कि मिजोरम में नागरिक संहिता की आवश्यकता को राज्य की गैर-जनजातीय आबादी और विशेष रूप से गैर-जनजातीय पुरुषों तथा मिजो महिलाओं के बीच होने वाले विवाहों के संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ गैर-जनजातीय पुरुष पहले से विवाहित होने के बावजूद मिजोरम में महिलाओं से शादियां कर लेते हैं। कई मामलों में ऐसे विवाह स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े होते हैं, और जब व्यापार में नुकसान होता है तो वे इन महिलाओं और उनके बच्चों को बिना किसी आर्थिक व सामाजिक सहारे के लावारिस छोड़ देते हैं।

एकविवाह नियम और संपत्ति विभाजन से बचाव

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, समान नागरिक संहिता में एकविवाह को अनिवार्य बनाने और तलाक के बाद संपत्ति के उचित विभाजन को लेकर बेहद स्पष्ट नियम निर्धारित हैं। उनका मानना है कि इन सख्त वैधानिक नियमों के प्रभाव में आने से मिजो महिलाओं को शोषण, धोखे और बेसहारा छोड़े जाने के संकट से राहत मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह राजनीतिक कारणों से इस कानून को मिजोरम के लोगों के लिए खतरे के रूप में चित्रित कर रही है, जिसके चलते संहिता के प्रावधानों से अनजान नागरिकों के बीच अनावश्यक आशंकाएं पैदा हो रही हैं।

सवाल-जवाब

मिजोरम बीजेपी अध्यक्ष के ह्रामो ने समान नागरिक संहिता का समर्थन क्यों किया?
उन्होंने कहा कि यह संहिता मिजो महिलाओं को विवाह, संपत्ति अधिकार और परित्याग जैसे मामलों में मजबूत कानूनी सुरक्षा दे सकती है।
क्या समान नागरिक संहिता से जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाज प्रभावित होंगे?
के ह्रामो के अनुसार जनजातीय आबादी अनिवार्य रूप से इसके दायरे में नहीं आती और अन्य राज्यों ने भी आदिवासियों को इससे बाहर रखा है।
के ह्रामो ने गैर-जनजातीय पुरुषों के संदर्भ में क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गैर-जनजातीय पुरुष पहले से विवाहित होने के बाद भी मिजो महिलाओं से शादी करते हैं और व्यापार खत्म होने पर उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं।
समान नागरिक संहिता में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कौन से नियम बताए गए हैं?
इसमें एकविवाह की अनिवार्यता और तलाक के बाद संपत्ति के उचित विभाजन के नियम शामिल हैं, जो महिलाओं का शोषण रोक सकते हैं।
के ह्रामो ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समान नागरिक संहिता को राज्य के लोगों के लिए खतरे के रूप में पेश करके जनता में भ्रम और डर फैला रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 मिनट पहले

बात तो ठीक है कि महिलाओं को सुरक्षा मिलनी चाहिए, पर मिजोरम में यूसीसी लागू करने की बात पर जनजातीय समुदाय को अलग रखने का आश्वासन कितना टिकेगा, इस पर थोड़ा शक है।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·3 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बात सही है आपकी, पर अगर जनजातीय लोगों को छूट मिलनी ही है तो फिर गैर-जनजातीय शादियों के लिए अलग से कोई दूसरा कानून क्यों नहीं लाया जा सकता?

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 मिनट पहले

धोखेबाज पतियों से महिलाओं को बचाने के लिए कड़ा कानून वाकई जरूरी है, खासकर तब जब लोग व्यापार के नाम पर शादियां करके बीच में छोड़ जाते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·24 मिनट पहले

करण जी, बात तो सही है आपकी। व्यापार के नाम पर महिलाओं को धोखा देकर भागने वालों पर तो सच में सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp