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12वीं के बाद सही करियर चुनने की चुनौती: इन 5 पारंपरिक डिग्री और डिप्लोमा कोर्स से दूरी बनाना क्यों जरूरी?करियर
13 सित॰ 2026, 3:27 pm (45 मिनट पहले)· 0

12वीं के बाद सही करियर चुनने की चुनौती: इन 5 पारंपरिक डिग्री और डिप्लोमा कोर्स से दूरी बनाना क्यों जरूरी?

12वीं उत्तीर्ण करने के बाद कॉलेज चयन में सही फैसला लेना बेहद जरूरी है। बदलती टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट जरूरतों के चलते कई ऐसे पारंपरिक और सामान्य डिग्री-डिप्लोमा कोर्स हैं जो बिना अतिरिक्त प्रैक्टिकल स्किल्स के युवाओं को रोजगार दिलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद हर छात्र के सामने अपने करियर को सही दिशा में ले जाने की एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे समय में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के आकर्षक विज्ञापन, रंग-बिरंगे ब्रोशर और बड़े-बड़े दावे कई बार विद्यार्थियों को भ्रमित कर देते हैं। बिना सोचे-समझे और जॉब मार्केट की वर्तमान वास्तविकताओं को नजरअंदाज करके लिया गया एक गलत फैसला छात्रों के कई साल और लाखों रुपये बर्बाद कर सकता है। आज के कॉर्पोरेट और डिजिटल युग में केवल एक साधारण डिग्री हासिल कर लेना नौकरी पाने की गारंटी नहीं है। नियोक्ता अब कागजी डिग्री से ज्यादा उम्मीदवार की व्यावहारिक क्षमता और एम्प्लॉयबिलिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई ऐसे पुराने और पारंपरिक डिग्री तथा डिप्लोमा कोर्स हैं, जो समय के साथ अपनी मार्केट वैल्यू खो चुके हैं और आधुनिक उद्योग की जरूरतों से पूरी तरह कट चुके हैं।

बिना व्यावहारिक स्किल्स वाला सामान्य बीए कोर्स

देश के एक बड़े हिस्से में आज भी हजारों छात्र किसी विशेष विषय या स्किल को चुने बिना जनरल बीए (General BA) में दाखिला ले लेते हैं। इस कोर्स की सबसे बड़ी सीमा यह है कि इसमें मुख्य रूप से पुरानी पाठ्यपुस्तकों और थ्योरी आधारित पढ़ाई पर जोर दिया जाता है। रटकर परीक्षाएं पास करने की यह परिपाटी कॉर्पोरेट सेक्टर की आधुनिक मांगों से मेल नहीं खाती। यदि छात्र इस तीन साल की पढ़ाई के दौरान डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिसिस, कंटेंट राइटिंग या किसी भाषा में विशेष दक्षता जैसी प्रैक्टिकल स्किल्स नहीं सीखते हैं, तो यह डिग्री महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह जाती है और रोजगार के अवसर सीमित हो जाते हैं।

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एडवांस्ड फाइनेंशियल स्किल्स के बिना जनरल बीकॉम

कॉमर्स बैकग्राउंड के छात्रों के बीच बीकॉम हमेशा से एक लोकप्रिय विकल्प रहा है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के वर्तमान दौर में केवल बुनियादी बीकॉम की डिग्री के आधार पर अकाउंटिंग या फाइनेंस के क्षेत्र में अच्छी नौकरी मिलना काफी कठिन हो गया है। आज की कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करती हैं जिनके पास सीए, सीएस या सीएफए जैसी पेशेवर योग्यताएं हों। इसके अलावा टैक्सेशन, फाइनेंशियल मॉडलिंग और आधुनिक अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की प्रमाणित जानकारी के बिना साधारण बीकॉम करने वाले छात्रों को करियर में आगे बढ़ने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है।

बिना ऑन-ग्राउंड अनुभव के महंगे इवेंट मैनेजमेंट डिप्लोमा

ग्लैमर और चकाचौंध से प्रभावित होकर कई युवा इवेंट मैनेजमेंट के डिप्लोमा कोर्स की तरफ आकर्षित होते हैं। इन निजी संस्थानों में फीस की रकम काफी अधिक होती है। लेकिन इवेंट इंडस्ट्री की कड़वी सच्चाई यह है कि यहां कागजी डिग्री से कहीं ज्यादा व्यावहारिक अनुभव, नेटवर्क, और ऑन-ग्राउंड प्रेशर को संभालने की क्षमता मायने रखती है। किसी प्रैक्टिकल फील्ड वर्क या वास्तविक प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस के बिना भारी-भरकम फीस देकर लिया गया डिप्लोमा नौकरी दिलाने में मदद नहीं कर पाता।

बेसिक कंप्यूटर एप्लीकेशन और ओ-लेवल डिप्लोमा

एक समय था जब बेसिक कंप्यूटर का ज्ञान या ओ-लेवल (O-Level) जैसा कंप्यूटर डिप्लोमा होना नौकरी पाने के लिए बहुत बड़ी योग्यता माना जाता था। लेकिन आज के डिजिटल युग में, जहां लगभग हर युवा और बच्चा स्मार्टफोन व कंप्यूटर के उपयोग में निपुण है, वहां इन बेसिक डिप्लोमा की मार्केट वैल्यू लगभग खत्म हो चुकी है। टेक कंपनियां अब केवल कंप्यूटर चालू करने या बेसिक स्प्रेडशीट चलाने की योग्यता पर नौकरियां नहीं देतीं। आज के जॉब मार्केट में कोडिंग, डेटा साइंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और साइबर सिक्योरिटी जैसी एडवांस्ड और स्पेशलाइज्ड स्किल्स की मांग है।

डिजिटल और टेक टूल्स से रहित मास कम्युनिकेशन व जर्नलिज्म

मीडिया की चमक-धमक देखकर हर साल बड़ी संख्या में छात्र मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म के कोर्स में दाखिला लेते हैं। लेकिन कई शिक्षण संस्थान आज भी दशकों पुराना पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं जो आधुनिक डिजिटल मीडिया परिदृश्य से बहुत पीछे है। वर्तमान समय में मीडिया क्षेत्र डेटा जर्नलिज्म, सोशल मीडिया एल्गोरिदम, एआई टूल्स और मल्टीमीडिया वीडियो एडिटिंग पर निर्भर हो चुका है। यदि छात्र इन आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल नहीं करते हैं, तो सिर्फ पारंपरिक पत्रकारिता की डिग्री के दम पर मीडिया और कॉर्पोरेट संचार के क्षेत्र में जगह बनाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

करियर के लिए सही रणनीति अपनाना क्यों जरूरी है?

किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले छात्रों और अभिभावकों को उस संस्थान का हालिया प्लेसमेंट रिकॉर्ड, पाठ्यक्रम की आधुनिकता और मार्केट की मांग की गहन जांच-पड़ताल करनी चाहिए। उच्च शिक्षा में निवेश किया गया धन और समय बेहद कीमती होता है। इसलिए, केवल डिग्री हासिल करने के बजाय अपनी रुचि के अनुसार प्रासंगिक प्रैक्टिकल स्किल्स विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना ही एक सफल करियर का निर्माण कर सकता है।

सवाल-जवाब

12वीं के बाद सामान्य बीए या बीकॉम करने का फैसला कब सही साबित हो सकता है?
यदि विद्यार्थी इस डिग्री के साथ-साथ सीए, सीएस, डेटा एनालिसिस या डिजिटल मार्केटिंग जैसी कोई प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन या स्किल हासिल करता है, तभी यह उपयोगी साबित होता है।
बेसिक कंप्यूटर कोर्स या ओ-लेवल की जगह कौन से कोर्स करने चाहिए?
बेसिक कंप्यूटर कोर्स के बजाय छात्रों को वेब डेवलपमेंट, कोडिंग, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी या सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे एडवांस्ड कोर्स चुनने चाहिए।
इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए क्या आवश्यक है?
इवेंट मैनेजमेंट में केवल महंगे डिप्लोमा से काम नहीं चलता, बल्कि ऑन-ग्राउंड प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस, इंटर्नशिप और मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क होना जरूरी है।
पत्रकारिता के छात्रों को अपनी डिग्री के साथ कौन सी नई तकनीक सीखनी चाहिए?
मास कम्युनिकेशन के छात्रों को डेटा जर्नलिज्म, वीडियो एडिटिंग, एआई टूल्स और सोशल मीडिया एल्गोरिदम का व्यावहारिक ज्ञान जरूर सीखना चाहिए।
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