दिल्ली में आयोजित वर्ष 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख नेताओं के बीच कई औपचारिक और द्विपक्षीय वार्ताएं हुईं, लेकिन एक बेहद संक्षिप्त और अनौपचारिक पल ने सुरक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का औपचारिक स्वागत कर रहे थे, उस समय दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और गर्मजोशी से गले मिले। इसी दौरान व्लादिमीर पुतिन की नज़र कुछ दूरी पर खड़े भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पर पड़ी। रूसी राष्ट्रपति ने अजीत डोभाल को देखते ही मुस्कुराकर हाथ हिलाया, जिसके जवाब में भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भी उसी गर्मजोशी के साथ मुस्कुराते हुए अभिवादन स्वीकार किया। महज कुछ सेकंड का यह क्षण कैमरों में कैद हो गया और इसके तुरंत बाद वैश्विक मंचों पर दोनों दिग्गजों के बीच वर्षों पुराने विश्वास और तालमेल की चर्चा शुरू हो गई।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का वह पल जिसने खींचा ध्यान
शिखर सम्मेलन स्थल पर जब औपचारिक स्वागत का दौर चल रहा था, तब पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्विपक्षीय संवाद में व्यस्त थे। उसी समय पृष्ठभूमि में खड़े अजीत डोभाल और पुतिन के बीच आंखें मिलीं। पुतिन का मुस्कुराना और हाथ हिलाकर व्यक्तिगत अभिवादन देना यह दर्शाता है कि औपचारिक प्रोटोकॉल से अलग भी दोनों के बीच एक मजबूत व्यक्तिगत और पेशेवर संबंध है। सुरक्षा रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शीर्ष नेताओं के छोटे-छोटे संकेत भी दो देशों के बीच के गहरे कूटनीतिक रिश्तों को उजागर करते हैं।
intelligence का अनूठा पृष्ठभूमि कनेक्शन: KGB और RAW का अनुभव
व्लादिमीर पुतिन और अजीत डोभाल के बीच के इस खास जुड़ाव के पीछे उनका लंबा खुफिया और सुरक्षा करियर माना जाता है। अजीत डोभाल भारत की शीर्ष खुफिया संस्था रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख रह चुके हैं और वर्तमान में प्रधानमंत्री के मुख्य राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में देश की सुरक्षा रणनीति की कमान संभालते हैं। वहीं दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अतीत सोवियत संघ की प्रसिद्ध खुफिया एजेंसी केजीबी (KGB) से जुड़ा रहा है। दोनों ही हस्तियों ने अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा खुफिया जानकारियों के विश्लेषण, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों को संभालने में बिताया है। इसी समान पेशेवर पृष्ठभूमि के कारण दोनों के बीच एक सहज समझ और रणनीतिक स्पष्टता देखी जाती है।
दो दशकों का भरोसेमंद संवाद और उच्चस्तरीय बैठकें
अजीत डोभाल और व्लादिमीर पुतिन के बीच संवाद का इतिहास दो दशकों से भी अधिक पुराना है। अजीत डोभाल उन चुनिंदा भारतीय अधिकारियों में शामिल हैं, जिनकी पहुंच सीधे रूसी राष्ट्रपति तक रही है। दोनों नेताओं के बीच पूर्व में भी कई महत्वपूर्ण मौकों पर सीधी और गोपनीय वार्ताएं हो चुकी हैं। वर्ष 2023 में यूक्रेन युद्ध की पहली वर्षगांठ से ठीक पहले अजीत डोभाल ने मॉस्को की यात्रा कर पुतिन से सीधी बातचीत की थी। इसके बाद वर्ष 2024 में सेंट पीटर्सबर्ग में द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता के दौरान दोनों का आमना-सामना हुआ, और वर्ष 2025 में भी अजीत डोभाल ने क्रेमलिन जाकर रणनीतिक मुद्दों पर पुतिन से विचार-विमर्श किया था।
वैश्विक संकटों के बीच सीधी कूटनीति और रक्षा साझेदारी
दुनिया में चल रहे विविध तनावों और यूक्रेन संकट के दौरान भी भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन बनाए रखा है। ऐसे समय में अजीत डोभाल की मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग यात्राएं दोनों देशों के बीच संवाद की मुख्य कड़ी साबित हुई हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, क्षेत्रीय स्थिरता, मध्य पूर्व की स्थिति और रक्षा तकनीक जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की सुरक्षा टीमों के बीच निरंतर समन्वय रहता है।
एस-400 और ब्रह्मोस जैसे बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स पर असर
भारत और रूस के बीच की रणनीतिक साझेदारी केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर दोनों देशों के रक्षा तंत्र पर दिखता है। भारत द्वारा रूस से एस-400 (S-400) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद और दोनों देशों के संयुक्त उपक्रम से तैयार ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोजेक्ट इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। वैश्विक राजनीति में आ रहे बदलावों के बावजूद भारत के लिए रूस के साथ रक्षा सहयोग बनाए रखना बेहद जरूरी है, और इस पूरे ढांचे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका केंद्रीय रही है।
सांकेतिक कूटनीति का बड़ा संदेश
दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में पुतिन और डोभाल के बीच का यह क्षण भले ही कुछ सेकंड का था, लेकिन इसने भारत और रूस के बीच के प्रगाढ़ संबंधों का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस तरह के सांकेतिक अभिवादन यह दर्शाते हैं कि औपचारिक वार्ताओं के पीछे वर्षों का व्यक्तिगत विश्वास और रणनीतिक निरंतरता काम कर रही है।


















