राजस्थान के ऐतिहासिक शहर बीकानेर में नत्थूसर गेट के बाहर स्थित एक प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बना हुआ है। लगभग 400 वर्ष पुराने इस बड़ा गणेश मंदिर की सबसे अनोखी पहचान भगवान गणेश की प्रतिमा को धोती पहनाने की परंपरा है। इसी खास व्यवस्था और श्रृंगार की वजह से स्थानीय लोग और दूर-दराज से आने वाले भक्त भगवान विनायक को प्यार से 'धोती वाले गणेश जी' के नाम से पुकारते हैं।
नत्थूसर गेट का 400 साल पुराना धार्मिक धरोहर
बीकानेर शहर में भगवान गणेश के कई मंदिर स्थित हैं, लेकिन नत्थूसर गेट के बाहर स्थित यह परिसर अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण सबसे अलग स्थान रखता है। इस मंदिर की स्थापना करीब चार शताब्दियों पहले हुई थी। इतने लंबे समय के बाद भी यह मंदिर अपने प्राचीन स्वरूप को बनाए हुए है। यहाँ प्रतिदिन भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें उन्हें पारंपरिक धोती धारण कराई जाती है। यही अनूठी परंपरा इसे बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है।
बुधवार और गणेश चतुर्थी पर उमड़ती है भारी भीड़
स्थानीय निवासियों के बीच यह दृढ़ मान्यता है कि इस दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के कारण लोग किसी भी नए काम, व्यापार या शुभ अवसर की शुरुआत करने से पहले यहाँ माथा टेकने जरूर पहुंचते हैं। सप्ताह के हर बुधवार को, जो भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है, मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी पंक्तियां देखने को मिलती हैं। वहीं गणेश चतुर्थी और अन्य प्रमुख त्योहारों के मौके पर यहाँ भव्य सजावट, विशेष पूजा और महाआरती का आयोजन किया जाता है।
परंपरा और जनआस्था का अटूट संगम
दशकों से चली आ रही लोककथाओं और व्यक्तिगत अनुभवों ने इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की श्रद्धा को और गहरा किया है। विघ्नहर्ता के आशीर्वाद से काम में आने वाली रुकावटें दूर होने का अटूट विश्वास ही है कि सालों से लोग नियमित रूप से यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। नत्थूसर गेट के पास का यह पावन स्थल आज भी अपनी पुरानी सादगी और धार्मिक मूल्यों को संजोए हुए है, जहाँ धोती वाले गणेश जी का आशीर्वाद पाने हर दिन सैकड़ों भक्त पहुँचते हैं।



















