असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में स्वीकृत किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक समावेशी और प्रगतिशील वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका के प्रमाण के रूप में रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता के दौरान इस ऐतिहासिक घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाने में सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस वैश्विक घोषणापत्र में नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई से जुड़े गुवाहाटी घोषणापत्र का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। असम के लिए यह संदर्भ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स तस्करी के एक बड़े संवेदनशील कॉरिडोर पर स्थित है। इस वैश्विक मान्यता से असम में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ताकत और दिशा मिलेगी।
वैश्विक नेतृत्व और आम सहमति का प्रतीक
हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की विदेश नीति की दूरदर्शिता और उसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज उन तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच बनी आम सहमति का एक मजबूत प्रमाण है जो भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को आकार देंगे। मुख्यमंत्री के शब्दों में, "यह दस्तावेज उस व्यावहारिक, समावेशी और भविष्योन्मुखी नेतृत्व की बेहतरीन मिसाल है जिसे भारतीय विदेश नीति इस बदलती वैश्विक व्यवस्था में लेकर आई है।"
कुल 45 पृष्ठों का यह विस्तृत घोषणापत्र उन तमाम वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की कोशिश करता है जिनका सामना आज विकसित और विकासशील देश कर रहे हैं। इस नीतिगत दस्तावेज में आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार करने और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, कृषि विकास, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण जैसे गंभीर विषयों को भी इसमें शामिल किया गया है, जो 'ग्लोबल साउथ' यानी विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को मजबूती से वैश्विक मंच पर रखता है।
नशीले पदार्थों के खिलाफ गुवाहाटी घोषणापत्र को वैश्विक समर्थन
असम की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से गुवाहाटी घोषणापत्र को इस अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज में जगह मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। नशीले पदार्थों के खिलाफ काम करने वाली BRICS देशों की सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक इस साल 6 और 7 जुलाई को गुवाहाटी में आयोजित की गई थी। इसी बैठक में इस सुरक्षा रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया था, जिसे अब पूरे समूह ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि BRICS घोषणापत्र ने गुवाहाटी घोषणापत्र को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है, जो नशीले पदार्थों के खिलाफ परिचालन और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस फैसले को राज्य के लिए बेहद शक्तिशाली और प्रतीकात्मक कदम बताया क्योंकि असम लंबे समय से सीमा पार से होने वाली नशीली दवाओं की तस्करी के खतरे से जूझ रहा है।
जुलाई में अपनाए गए इस गुवाहाटी घोषणापत्र के तहत सभी सदस्य देशों के बीच समय पर खुफिया जानकारी साझा करने की बात कही गई थी। इसमें सदस्य देशों की राष्ट्रीय सीमाओं और कानूनों के दायरे में रहते हुए आपसी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया गया था। इसके अलावा, इस घोषणापत्र में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए डिजिटल टूल्स, डेटा-संचालित विश्लेषण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष बल दिया गया था ताकि कानून लागू करने वाली एजेंसियां अपराधियों से एक कदम आगे रह सकें।
साल 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता
भारत साल 2026 में BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार के शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रखा गया है। यह विषय अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस समय इस प्रभावशाली वैश्विक समूह में कुल आठ सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में यह समूह वैश्विक स्तर पर आर्थिक और सामाजिक बदलाव का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।


















