मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पास करके डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों को अक्सर लगता है कि बिहार में केवल एम्स पटना ही पढ़ाई का एकमात्र बेहतर माध्यम है। हालांकि, हकीकत यह है कि राज्य की राजधानी और अन्य जिलों में कई ऐसे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज मौजूद हैं जो विश्वस्तरीय संसाधनों और अनुभवी डॉक्टरों के मार्गदर्शन में एमबीबीएस की उच्च स्तरीय शिक्षा दे रहे हैं। प्रतियोगिता परीक्षा विशेषज्ञ और मेंटर डॉ. अखिलेश कुमार के अनुसार, अभ्यर्थियों को अपनी काउंसलिंग रणनीति बनाते समय एम्स पटना के अलावा राज्य के अन्य प्रमुख सरकारी संस्थानों को भी अपनी वरीयता सूची में शामिल करना चाहिए। इस साल नीट कटऑफ के बदले रुझानों के बीच 630 से 640 अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों के पास भी सरकारी सीट हासिल करने का बेहतरीन मौका है।
एम्स के बाद पीएमसीएच क्यों बनी अभ्यर्थियों की पहली पसंद?
बिहार में मेडिकल की शिक्षा के परिदृश्य पर नजर डालें तो एम्स पटना अपनी आधुनिक सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के कारण शीर्ष पर है। एम्स की व्यवस्था बेहद विशिष्ट होने की वजह से वहां दाखिले का कटऑफ अत्यधिक ऊंचा रहता है। लेकिन यदि किसी छात्र का स्कोर एम्स की मेरिट सूची में जगह बनाने से चूक जाता है, तो निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। एम्स के तुरंत बाद राज्य में सबसे अधिक मांग पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) की होती है। यह बिहार का सबसे पुराना और ऐतिहासिक सरकारी मेडिकल कॉलेज माना जाता है, जहां देशभर से प्रतिभावान छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं।
पीएमसीएच में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक और क्लिनिकल ट्रेनिंग की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका संबद्ध अस्पताल पूरे बिहार का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा केंद्र है, जहां रोजाना हजारों मरीज आते हैं। इस व्यापक मरीज प्रवाह के कारण छात्रों को विभिन्न बीमारियों के इलाज का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। यहां से पास आउट हुए डॉक्टर आज न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के प्रतिष्ठित अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पीएमसीएच में बढ़ीं एमबीबीएस की 50 नई सीटें
मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पीएमसीएच में दाखिले की क्षमता का विस्तार किया गया है। संस्थान में बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में 50 नई सीटों का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद कॉलेज में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 250 हो गई है। इससे पहले तक यहां केवल 200 सीटों पर ही नामांकन स्वीकार किए जाते थे। 50 अतिरिक्त सीटें जुड़ने से इस बार नीट कटऑफ में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है और अधिक संख्या में मेधावी छात्रों को इस प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला मिल सकेगा।
पटना से लेकर जिलों तक सरकारी कॉलेजों के बेहतरीन विकल्प
यदि नीट रैंक के आधार पर पीएमसीएच में भी प्रवेश न मिल सके, तो भी अभ्यर्थियों के सामने कई अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रास्ते खुले रहते हैं। पटना शहर के भीतर ही इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईजीआईएमएस) और नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) जैसे आधुनिक सुविधाओं वाले विकल्प मौजूद हैं। ये दोनों संस्थान उच्च मानक वाली चिकित्सा शिक्षा और विशाल अस्पताल परिसरों के लिए जाने जाते हैं।
राजधानी से बाहर नजर दौड़ाएं तो दरभंगा स्थित डीएमसीएच (दरभंगा मेडिकल कॉलेज), भागलपुर का जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर का श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और गया का अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज भी बेहतरीन विकल्प हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा हाल के वर्षों में स्थापित किए गए नए मेडिकल कॉलेजों में भी शैक्षणिक स्तर में तेजी से सुधार हुआ है। अभ्यर्थी बेतिया, पावापुरी, मधेपुरा और पूर्णिया स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों को अपनी विकल्प सूची में प्राथमिकता दे सकते हैं। इन नए कॉलेजों में आधुनिक प्रयोगशालाएं और नई तकनीक से लैस कक्षाएं तैयार की गई हैं।
630-640 मार्क्स पर भी आसानी से मिल सकती है सरकारी सीट
नीट परीक्षा के कटऑफ का गणित समझाते हुए डॉ. अखिलेश कुमार ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम अंकों का निर्धारण हमेशा प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर और परीक्षार्थियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इस बार नीट परीक्षा के नतीजों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां किसी भी अभ्यर्थी ने 720 में से 720 का सही स्कोर हासिल नहीं किया है। पूर्ण अंक न आने की वजह से ओवरऑल कटऑफ स्कोर में गिरावट दर्ज की गई है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए जिन अभ्यर्थियों के अंक 630 से 640 के आसपास हैं, वे भी एक सुरक्षित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पाने की उम्मीद रख सकते हैं। इसकी तुलना में पिछली प्रवेश प्रक्रिया में स्थिति काफी कठिन थी, जहां 675 अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को भी अपनी पसंद का बेहतर सरकारी कॉलेज पाने में मशक्कत करनी पड़ी थी। लिहाजा, इस बार की मेरिट परिस्थितियां छात्रों के लिए अधिक अनुकूल हैं और उन्हें समझदारी से अपनी कॉलेज चॉइस फिलिंग करनी चाहिए।


















