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दूरस्थ और ऑनलाइन माध्यम से 1 साल में होगी मास्टर डिग्री, UGC ने जारी की NEP 2020 के तहत नई गाइडलाइंसकरियर
30 जुल॰ 2026, 12:35 pm (45 दिन पहले)· 1

दूरस्थ और ऑनलाइन माध्यम से 1 साल में होगी मास्टर डिग्री, UGC ने जारी की NEP 2020 के तहत नई गाइडलाइंस

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने NEP 2020 के तहत ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा मोड में 1 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत केवल 4 साल की ऑनर्स डिग्री वाले छात्र ही इस 1 साल के मास्टर कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। इसके तहत देश के पात्र उच्च शिक्षण संस्थान (HEIs) अब ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) यानी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से भी 1 साल का पोस्टग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम संचालित कर सकेंगे। आयोग का यह नया निर्देश 24 जुलाई को जारी किए गए पिछले नोटिफिकेशन का स्थान लेगा। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन कामकाजी पेशेवरों, गृहिणियों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा जो नौकरी या अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नियमित कॉलेज जाने में असमर्थ हैं और अपनी उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

संस्थानों के लिए तय की गई कड़ी पात्रता शर्तें

यूजीसी ने अपने नए सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि देश का हर विश्वविद्यालय या कॉलेज इस 1 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम को शुरू करने के लिए स्वतः पात्र नहीं होगा। आयोग ने इसके लिए सख्त नियामक मानदंड निर्धारित किए हैं। इस नई व्यवस्था का लाभ केवल वही उच्च शिक्षण संस्थान उठा सकेंगे, जिन्हें पहले से उसी विशिष्ट विषय में 2 साल का पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम ऑनलाइन या ODL मोड में संचालित करने की वैध मान्यता प्राप्त है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी विश्वविद्यालय के पास किसी विषय में 2 वर्षीय दूरस्थ या ऑनलाइन मास्टर डिग्री चलाने की पूर्व अनुमति नहीं है, तो वह संस्थान उस विषय में 1 साल का दूरस्थ या ऑनलाइन पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम भी शुरू करने का हकदार नहीं होगा।

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छात्रों के प्रवेश के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता

इस 1 वर्षीय दूरस्थ पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिले को लेकर भी आयोग ने अत्यंत पारदर्शी और स्पष्ट योग्यता नियम तय किए हैं। इस पाठ्यक्रम में केवल वही अभ्यर्थी प्रवेश पाने के पात्र होंगे जिन्होंने 4 साल की अवधि वाला बैचलर डिग्री विद ऑनर्स (Four-Year Bachelor’s Degree with Honours) सफलतापूर्वक पूरा किया हो। आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन छात्रों ने पारंपरिक 3 साल की सामान्य स्नातक डिग्री हासिल की है, वे इस 1 वर्षीय दूरस्थ पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम में सीधे प्रवेश नहीं ले सकेंगे। इस नियम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस मूल ढांचे को बनाए रखना है, जिसमें 4 वर्षीय स्नातक ऑनर्स डिग्री के बाद ही 1 वर्षीय मास्टर डिग्री का प्रावधान किया गया है।

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के नियमों में नहीं होगा कोई बदलाव

यूजीसी के इस नए सर्कुलर में यह भी साफ तौर पर रेखांकित किया गया है कि व्यावसायिक तथा तकनीकी उच्च शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों पर यह नया 1 वर्षीय नियम लागू नहीं होगा। मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA), मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस (MCA) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (PGDM) जैसे प्रतिष्ठित प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश प्रक्रिया और पाठ्यक्रम अवधि के नियम पहले की तरह ही बने रहेंगे। इन विशिष्ट व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिले की पात्रता, क्रेडिट संरचना और पढ़ाई की समय-सीमा संबंधित वैधानिक नियामक संस्थाओं द्वारा तय किए गए मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार ही संचालित होती रहेगी और इनमें कोई ढील नहीं दी गई है।

पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले अनिवार्य आंतरिक शैक्षणिक मंजूरी

कोई भी मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान यूजीसी के दिशा-निर्देश आते ही सीधे अपने स्तर पर 1 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकता। आयोग ने सभी संस्थानों के लिए एक अनिवार्य प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रक्रिया तय की है। नए पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले संस्थान को अपनी सक्षम आंतरिक शैक्षणिक संस्थाओं से औपचारिक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। इसमें संस्थान का बोर्ड ऑफ स्टडीज (Board of Studies), अकादमिक परिषद (Academic Council) या अन्य सक्षम वैधानिक शैक्षणिक निकाय शामिल हैं। इन सभी निकायों द्वारा पाठ्यक्रम के प्रारूप, क्रेडिट विभाजन और अध्ययन सामग्री की पूरी समीक्षा के बाद मंजूरी मिलने पर ही विश्वविद्यालय नए सत्र के लिए आवेदन आमंत्रित कर सकेगा।

गुणवत्ता और क्रेडिट फ्रेमवर्क के कड़े मानक

आयोग ने विश्वविद्यालयों को सख्त ताकीद की है कि केवल ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यम से कोर्स संचालित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिक्षा का शैक्षणिक स्तर नियमित पाठ्यक्रमों के बराबर होना अनिवार्य है। यह पूरा 1 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, यूजीसी के वैधानिक नियमों और पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम एवं क्रेडिट फ्रेमवर्क (Curriculum and Credit Framework for Postgraduate Programmes) के पूर्ण अनुकूल होना चाहिए। यूजीसी ने संस्थानों को निर्देश दिया है कि पाठ्यक्रम का डिजाइन, अध्ययन सामग्री की गुणवत्ता, ऑनलाइन शिक्षण माध्यम, परीक्षा प्रणाली, निरंतर मूल्यांकन प्रक्रिया और क्रेडिट आवंटन प्रणाली पूरी तरह से यूजीसी ODL तथा ऑनलाइन विनियमों के मानकों के अनुरूप ही तैयार किए जाएं ताकि दूरस्थ शिक्षा पाने वाले छात्रों की डिग्री की साख और गुणवत्ता बरकरार रहे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मजबूती और छात्रों के लिए नया अवसर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, समावेशी और बहु-प्रवेश व बहु-निकास विकल्पों से युक्त बनाना है। NEP 2020 में 4 वर्षीय ऑनर्स स्नातक डिग्रीधारकों के लिए जिस 1 वर्षीय मास्टर डिग्री की परिकल्पना की गई थी, उसे अब ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के दायरे में लाने से देश भर के लाखों विद्यार्थियों के लिए उच्च अध्ययन के द्वार खुलेंगे। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यूजीसी का यह कदम डिजिटल शिक्षा और दूरस्थ अध्ययन को एक नई मजबूती प्रदान करेगा। इससे वे मेधावी छात्र भी अपनी शैक्षणिक योग्यता और करियर की संभावनाओं को बढ़ा सकेंगे, जो भौतिक रूप से विश्वविद्यालय की कक्षाओं में उपस्थित होने में सक्षम नहीं हैं।

सवाल-जवाब

क्या 3 साल के स्नातक डिग्री वाले छात्र 1 साल के PG प्रोग्राम में दाखिला ले सकते हैं?
नहीं, UGC के नए नियमों के अनुसार 1 साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में केवल वही छात्र प्रवेश के पात्र हैं जिन्होंने 4 साल की बैचलर डिग्री विद ऑनर्स पूरी की है।
क्या सभी विश्वविद्यालय 1 साल का ऑनलाइन मास्टर कोर्स शुरू कर सकते हैं?
नहीं, केवल वही संस्थान 1 साल का PG कोर्स शुरू कर सकेंगे जिन्हें पहले से उस विषय में 2 साल का ऑनलाइन या दूरस्थ PG कोर्स चलाने की मंजूरी प्राप्त है।
क्या MBA और MCA जैसे व्यावसायिक कोर्स पर यह नियम लागू होगा?
नहीं, MBA, MCA और PGDM जैसे प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले के नियम और अवधि पहले की तरह संबंधित नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुसार ही लागू रहेंगे।
विश्वविद्यालय को यह कोर्स शुरू करने से पहले किसकी अनुमति लेनी होगी?
विश्वविद्यालय को अपने बोर्ड ऑफ स्टडीज, अकादमिक परिषद (Academic Council) या अन्य सक्षम आंतरिक शैक्षणिक निकायों से औपचारिक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
क्या ऑनलाइन और डिस्टेंस PG डिग्री की मान्यता नियमित डिग्री के बराबर होगी?
हां, यूजीसी ने निर्देश दिया है कि पाठ्यक्रम, परीक्षा और क्रेडिट सिस्टम के मानकों का पालन नियमित डिग्री के समान गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
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