देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आए आंकड़ों ने इंजीनियरिंग शिक्षा के बदलते रुझान को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। जेईई एडवांस्ड 2026 की काउंसलिंग में शामिल शीर्ष रैंक धारक छात्रों ने पारंपरिक विषयों की तुलना में आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रमों पर जबरदस्त भरोसा जताया है। इस बार चयन सूची में शीर्ष 500 रैंक हासिल करने वाले मेधावी छात्रों के फैसले ने शिक्षाविदों और करियर विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि कुछ बेहद महत्वपूर्ण कोर इंजीनियरिंग शाखाओं को इन शीर्ष छात्रों ने लगभग नजरअंदाज कर दिया है।
कंप्यूटर साइंस की जबरदस्त मांग, आईआईटी बॉम्बे बना पहली पसंद
काउंसलिंग के आंकड़े दर्शाते हैं कि देश के शीर्ष 500 रैंकर्स में से 365 छात्रों, यानी लगभग 73 फीसदी ने अलग-अलग भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग को अपनी पहली पसंद बनाया। सबसे अधिक मारामारी आईआईटी बॉम्बे के लिए देखने को मिली, जहां शीर्ष 500 रैंक में आने वाले कुल 183 छात्रों ने प्रवेश लिया। इनमें से अकेले 142 छात्रों ने आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग शाखा का चयन किया। यह आंकड़ा साबित करता है कि उच्चतम रैंक हासिल करने वाले छात्रों के लिए यह विषय सबसे सुरक्षित और पहली प्राथमिकता बना हुआ है।
तकनीक और पैकेज का आकर्षण
कंप्यूटर साइंस के प्रति इस भारी झुकाव के पीछे आधुनिक कॉर्पोरेट परिवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तीव्र विस्तार और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मिलने वाले करोड़ों रुपये के वार्षिक सैलरी पैकेज प्रमुख कारण हैं। आज के युवा अच्छी तरह समझते हैं कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोग्रामिंग और उन्नत डिजिटल तकनीकों में करियर निर्माण के सबसे तेज अवसर उपलब्ध हैं। तकनीकी रुझान का असर नए पाठ्यक्रमों पर भी दिखाई दिया, जहां शीर्ष 500 रैंकर्स में से 17 छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक विषयों में दाखिला लेकर अपनी रुचि दिखाई। इससे साफ जाहिर होता है कि छात्र अब पुराने ढर्रे की पढ़ाई छोड़कर भविष्य की जरूरतों वाले तकनीकी क्षेत्रों को अपना रहे हैं।
एयरोस्पेस और सिविल इंजीनियरिंग से छात्रों का मोहभंग
कंप्यूटर साइंस और डेटा आधारित विषयों में जहां सीटों के लिए भारी प्रतिस्पर्धा रही, वहीं कुछ पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं की स्थिति काफी निराशाजनक दर्ज की गई। विमानन और अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की निरंतर प्रगति के बावजूद शीर्ष 500 रैंक में शामिल एक भी छात्र ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का चयन नहीं किया। शून्य प्रवेश के इस आंकड़े ने सबको चौंका दिया है। दूसरी तरफ, देश के निर्माण और बुनियादी ढांचे की रीढ़ मानी जाने वाली सिविल इंजीनियरिंग का प्रदर्शन भी काफी कमजोर रहा। शीर्ष 500 में से केवल 2 छात्र, जो कुल संख्या का मात्र 0.4 फीसदी है, सिविल इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने के लिए आगे आए।
कम शुरुआती वेतन और चमक-दमक की कमी बनी वजह
पारंपरिक और कोर शाखाओं से छात्रों की इस दूरी के पीछे मुख्य वजह इन क्षेत्रों में शुरुआती स्तर पर मिलने वाला अपेक्षाकृत कम वेतन पैकेज है। इसके अलावा, निर्माण और कोर मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में कॉर्पोरेट आईटी कंपनियों जैसी जीवनशैली और आकर्षण का अभाव भी छात्रों को हतोत्साहित करता है। शीर्ष रैंक धारक छात्र आमतौर पर जोखिम मुक्त, अत्यधिक सुरक्षित और शुरुआती दौर से ही उच्च आय देने वाले करियर विकल्पों को चुनना ज्यादा बेहतर मान रहे हैं।



















