खेती-किसानी के दौरान फसलों के समुचित विकास और अच्छी पैदावार को सुनिश्चित करने के लिए उर्वरकों का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान अपनी फसलों की आवश्यकतानुसार समय-समय पर खेतों में अलग-अलग रासायनिक खादों का प्रयोग करते रहे हैं। हालांकि, देवघर जिले में अब रासायनिक खाद प्राप्त करने की पुरानी परिपाटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। अब कोई भी किसान सीधे खाद विक्रेता की दुकान पर पहुंचकर मनमाने तरीके से खाद नहीं खरीद सकेगा। प्रशासन ने वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से पूरी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए हैं, जिसके तहत अब पहले डिजिटल पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण की यह प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत ही किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
पायलट जिले के रूप में देवघर का चयन
उर्वरक वितरण प्रणाली को आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य स्तर पर देवघर जिले को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया है। इस पायलट परियोजना के क्रियान्वयन के साथ ही खाद की खरीद, भंडारण और किसानों तक उसके वितरण की समूची व्यवस्था को ऑनलाइन निगरानी के दायरे में लाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य वास्तविक किसानों तक उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करना और वितरण प्रक्रिया में होने वाली किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कालाबाजारी पर रोक लगाना है।
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल ऐप से लागू हुई व्यवस्था
प्रखंड कृषि पदाधिकारी शशांक शेखर के अनुसार जिले में नई वितरण प्रणाली को 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' ऐप के माध्यम से प्रभावी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का प्राथमिक लक्ष्य उर्वरक वितरण के प्रत्येक चरण को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत खाद की मांग करने वाले प्रत्येक कृषक को सबसे पहले अपना ऑनलाइन पंजीकरण दर्ज कराना होगा। किसानों की सुविधा के लिए इस पंजीकरण प्रक्रिया को बहुविकल्पीय बनाया गया है। किसान चाहें तो अपने स्वयं के स्मार्टफोन से घर बैठे ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा जो किसान खुद मोबाइल संचालित करने में असमर्थ हैं, वे अपने नजदीकी प्रज्ञा केंद्र पर जाकर या फिर किसी भी अधिकृत खाद एवं बीज विक्रेता के केंद्र पर उपस्थित होकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। बिना डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज हुए आगे की कोई भी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकेगी।
पंजीकरण के लिए अनिवार्य दस्तावेज और भूमि का विवरण
ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान किसानों को अपने व्यक्तिगत और कृषि संबंधी कई आवश्यक विवरण पोर्टल पर दर्ज करने होंगे। इसमें किसान का आधार नंबर, सक्रिय मोबाइल नंबर, कृषि योग्य कुल जमीन का रकबा, खाता संख्या तथा खसरा संख्या की प्रविष्टि अनिवार्य की गई है। इन सभी आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक किसान का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे यह सत्यापित हो सकेगा कि संबंधित किसान के पास वास्तव में कितनी भूमि है और उसे कितनी मात्रा में खाद की दरकार है।
बुजुर्ग या असमर्थ किसानों के लिए नॉमिनी की सुविधा
प्रशासन ने इस व्यवस्था में व्यावहारिक कठिनाइयों का भी विशेष ध्यान रखा है। कई बार शारीरिक अस्वस्थता, वृद्धावस्था या अन्य जरूरी कार्यों के कारण किसान का स्वयं दुकान तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति के लिए नियमों में नॉमिनी यानी प्रतिनिधि बनाने का स्पष्ट विकल्प दिया गया है। किसान पंजीकरण के वक्त ही अपने किसी भी विश्वसनीय पारिवारिक सदस्य या परिचित को नॉमिनी नामित कर सकता है। इसके लिए पंजीकरण फॉर्म में नॉमिनी का नाम और उसका आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। ऐसा होने पर किसान की अनुपस्थिति में उसका अधिकृत प्रतिनिधि दुकान पर जाकर बिना किसी अड़चन के खाद प्राप्त कर सकेगा।
क्यूआर कोड होगा आवश्यक, 24 घंटे का रहेगा इंतजार
डिजिटल पंजीकरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होते ही सिस्टम के माध्यम से किसान के नाम पर एक विशिष्ट क्यूआर कोड जारी किया जाएगा। खाद प्राप्त करने के अंतिम चरण में यह क्यूआर कोड सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। किसानों को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि पंजीकरण कराते ही तुरंत काउंटर से खाद नहीं दी जाएगी। नियमों के अनुसार पंजीकरण सत्यापन के लगभग 24 घंटे बीतने के बाद ही अधिकृत खाद विक्रेता के माध्यम से उर्वरक की भौतिक सुपुर्दगी की जाएगी। इसी वजह से कृषि विभाग द्वारा किसानों को यह सलाह दी जा रही है कि वे बुवाई या सिंचाई के समय खाद की तत्काल जरूरत पड़ने का इंतजार न करें, बल्कि आवश्यकता से पहले ही अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा लें ताकि समय पर उर्वरक मिल सके और खेतों में कृषि कार्य किसी भी तरह से बाधित न हो। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई यह व्यवस्था आने वाले समय में जिले के कृषि परिदृश्य को नई दिशा देगी।



















