कॉर्पोरेट संस्कृति में दशकों से चली आ रही एक ही कंपनी के प्रति वफादारी की धारणा अब तेजी से बदल रही है। पहले कर्मचारी एक ही दफ्तर में वर्षों गुजार देना सबसे सुरक्षित विकल्प मानते थे, परंतु मिलेनियल्स और जेनरेशन जेड के युवा पेशेवर अब इस पुराने ढर्रे को छोड़कर व्यावहारिक राह चुन रहे हैं। कॉर्पोरेट जगत में घटती स्थिरता, आर्थिक अनिश्चितताओं और कंपनियों में जारी छंटनी के दौर ने युवाओं को यह सिखा दिया है कि अपनी आजीविका की सुरक्षा का जिम्मा अब पूरी तरह खुद अपने हाथों में लेना होगा। इसी सोच से उपजी नई कार्यशैली को करियर कुशनिंग कहा जा रहा है।
कामकाजी जगत में करियर कुशनिंग का बढ़ता प्रभाव
मौजूदा समय में करियर कुशनिंग कामकाजी पेशेवरों के बीच एक जरूरी रणनीति के रूप में उभरी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि व्यक्ति अपनी वर्तमान नौकरी पूरी निष्ठा से करते हुए भी भविष्य के लिए अन्य विकल्पों की तैयारी गुप्त रूप से जारी रखता है। यह तरीका बदलते समय में पेशेवर जीवन को सुरक्षित बनाए रखने का एक समझदारी भरा जरिया बन चुका है। युवा अब यह भली-भांति समझ चुके हैं कि केवल एक मासिक वेतन पर आश्रित रहना आर्थिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक के नियमित काम के बाद वे अपने समय का उपयोग अतिरिक्त कमाई और नए अवसरों की तलाश में करते हैं।
कौशल विकास और समानांतर काम पर जोर
इस नई कार्यसंस्कृति को अपनाने वाले पेशेवर दफ्तर के तय घंटों के बाद रात के वक्त फ्रीलांसिंग में हाथ आजमाते हैं, ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से नए और प्रासंगिक कौशल सीखते हैं, लिंक्डइन जैसी पेशेवर नेटवर्किंग साइट्स पर अपने संपर्क मजबूत करते हैं और नए साइड हसल पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी और रोजगार बाजार के उतार-चढ़ाव ने युवाओं के मन में नौकरियों की स्थिरता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। ऐसे माहौल में मानसिक दबाव कम रखने और आर्थिक रूप से बेफिक्र रहने के लिए युवा पेशेवर इस सुरक्षात्मक तरीके को अपना रहे हैं। जब किसी पेशेवर के पास पहले से नए कौशल, फ्रीलांस ग्राहक या संभावित साक्षात्कारों के विकल्प मौजूद होते हैं, तो वर्तमान पद चले जाने का तनाव काफी घट जाता है और उनके पास हमेशा एक ठोस दूसरा विकल्प तैयार रहता है।
साइलेंट क्विटिंग से आगे की सक्रिय सोच
कुछ समय पहले तक कार्यस्थलों पर साइलेंट क्विटिंग का चलन काफी चर्चा में रहा था, जिसमें कर्मचारी केवल उतना ही काम करते थे जितना उन्हें वेतन मिलता था। इसके विपरीत, करियर कुशनिंग उससे कहीं अधिक सक्रिय और भविष्य को सुरक्षित करने वाली सोच मानी जा रही है। इसमें कर्मचारी काम से जी नहीं चुराते, बल्कि बाजार में अपनी उपयोगिता और बाजार मूल्य बढ़ाने के लिए लगातार नए हुनर सीखने पर ध्यान देते हैं। वे अपनी व्यक्तिगत पहचान और पेशेवर ब्रांडिंग को निखारने में जुटे रहते हैं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित छंटनी की स्थिति में उन्हें नया काम तलाशने में लंबा वक्त न लगे। अनिश्चित आर्थिक माहौल में मानसिक शांति और वित्तीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह रणनीति अब बेहद अहम साबित हो रही है।



















