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सीबीएसई की इंप्रूवमेंट परीक्षा के बाद छात्र को मिलीं 2 अलग मार्कशीट, कॉलेज एडमिशन में फंसा पेंचकरियर
3 नव॰ 2026, 1:34 pm (1 मिनट पहले)· 0

सीबीएसई की इंप्रूवमेंट परीक्षा के बाद छात्र को मिलीं 2 अलग मार्कशीट, कॉलेज एडमिशन में फंसा पेंच

देहरादून के केंद्रीय विद्यालय के 12वीं के एक छात्र को गणित विषय की इंप्रूवमेंट परीक्षा देने के बाद बोर्ड ने दो अलग-अलग मार्कशीट जारी कर दीं, जिससे उच्च शिक्षा के दाखिले और सत्यापन में गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और दस्तावेजी नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। देहरादून स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी सीमाद्वार के 12वीं कक्षा के एक छात्र के साथ ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने उसकी उच्च शिक्षा और आगामी कॉलेज दाखिले की राह में भारी रुकावट पैदा कर दी है। छात्र ने अपने प्राप्तांक बेहतर करने के मकसद से गणित विषय की इंप्रूवमेंट परीक्षा दी थी। परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्र को उम्मीद थी कि बोर्ड दोनों परिणामों को मिलाकर एक संयुक्त और संशोधित अंकपत्र उपलब्ध कराएगा, लेकिन बोर्ड की ओर से छात्र को एक ही शैक्षणिक सत्र की दो बिल्कुल अलग-अलग मार्कशीट जारी कर दी गईं।

संयुक्त अंकपत्र न मिलने से एडमिशन प्रक्रिया में भारी उलझन

आमतौर पर जब कोई परीक्षार्थी किसी विषय के अंक सुधारने के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षा उत्तीर्ण करता है, तो उसे एक एकीकृत या कंसोलिडेटेड मार्कशीट मिलने की अपेक्षा होती है ताकि आगे दाखिले या चयन प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने। हालांकि, इस मामले में छात्र के पास एक ही साल और एक ही परीक्षा चक्र से जुड़े दो अलग दस्तावेज आ गए हैं। इनमें से पहली मूल मार्कशीट में मुख्य परीक्षा के पुराने अंक दर्ज हैं, जबकि दूसरी अंकतालिका में केवल गणित की इंप्रूवमेंट परीक्षा के नए अंक अंकित हैं। दोनों परिणामों का कोई साझा विवरण एक जगह न होने के कारण छात्र को विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में आवेदन करते समय तकनीकी और प्रशासनिक पेचीदगियों से जूझना पड़ रहा है।

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दस्तावेज़ सत्यापन और काउंसलिंग के समय अफसरों में असमंजस

मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत मुख्य परीक्षा तथा इंप्रूवमेंट परीक्षा के लिए अलग-अलग दस्तावेज जारी होने से छात्र को वास्तविक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज काउंसलिंग, विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवेश और नौकरी से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान जब दो अलग-अलग अंकपत्र प्रस्तुत किए जाते हैं, तो वहां मौजूद सत्यापन अधिकारी भी पशोपेश में पड़ जाते हैं। दो अलग कागजात देखकर प्रणाली में अंकों की प्रामाणिकता और मुख्य रिकॉर्ड के मिलान को लेकर संदेह पैदा होता है, जिसका सीधा नुकसान संबंधित छात्र की पढ़ाई और मानसिक सुकून पर पड़ रहा है।

छात्र ने स्कूल के प्रिंसिपल को पत्र सौंपकर उठाई समाधान की मांग

इस असहज स्थिति और तकनीकी खामी से परेशान होकर पीड़ित छात्र ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल को एक औपचारिक पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी है। छात्र ने गुहार लगाई है कि इस दोहरी मार्कशीट के संकट का जल्द से जल्द कोई ठोस प्रशासनिक समाधान निकाला जाए, ताकि उच्च शिक्षा के अवसरों पर कोई विपरीत असर न पड़े। आधुनिक डिजिटल दौर में जब सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहते हैं, तब एक ही छात्र के दोनों प्रयासों के अंकों को मिलाकर एक एकल डिजिटल या फिजिकल मार्कशीट तैयार करना तकनीकी रूप से बेहद सुगम होना चाहिए। छात्र अब बोर्ड और स्कूल प्रशासन की ओर से त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाने की प्रतीक्षा कर रहा है।

सवाल-जवाब

यह मामला किस स्कूल और किस शहर से सामने आया है?
यह मामला देहरादून स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी सीमाद्वार का है, जहां 12वीं के एक छात्र को यह परेशानी हुई।
छात्र ने किस विषय के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षा दी थी?
छात्र ने अपने प्राप्तांक सुधारने के उद्देश्य से 12वीं के गणित विषय की इंप्रूवमेंट परीक्षा दी थी।
दो अलग मार्कशीट मिलने से छात्र को क्या परेशानी हो रही है?
कॉलेज में एडमिशन, काउंसलिंग और दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान दो अलग अंकपत्र दिखाने से अधिकारियों में भ्रम पैदा हो रहा है।
समस्या के समाधान के लिए छात्र ने क्या कदम उठाया है?
छात्र ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस तकनीकी और प्रशासनिक समस्या के त्वरित निवारण की गुहार लगाई है।
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