भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 3 नवंबर को प्रमुख एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी के शुद्ध लाभ में तेज गिरावट के आंकड़ों के ठीक एक दिन बाद निवेशकों का रुख संतुलित नजर आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार के दौरान आईटीसी का शेयर 268.30 रुपये पर पहुंचा, जो सोमवार के बंद भाव 266.40 रुपये के मुकाबले 1.90 रुपये यानी 0.71 प्रतिशत अधिक रहा। दिन के शुरुआती सत्र में यह 269.05 रुपये पर खुला था और इसने 270 रुपये प्रति शेयर का उच्चतम स्तर छुआ। सिगरेट कारोबार पर बढ़े करों के दबाव के बावजूद बाजार ने अन्य व्यावसायिक खंडों के प्रदर्शन पर भरोसा दिखाया है।
बाजार में पिछले एक साल का प्रदर्शन और 52 हफ्तों का दायरा
लंबे समय के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो आईटीसी का शेयर पिछले एक साल की अवधि में लगभग 35.86 प्रतिशत नीचे फिसल चुका है। हालांकि मौजूदा भाव इसके 52 हफ्तों के निचले स्तर से थोड़ा संभलता दिखाई दे रहा है। शेयर का 52 हफ्तों का निचला स्तर 252.80 रुपये दर्ज है, जिससे मौजूदा ट्रेडिंग स्तर लगभग 6 प्रतिशत ऊपर बना हुआ है। साल भर की बिकवाली और सिगरेट टैक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच शेयर ने निचले स्तरों के आसपास तकनीकी आधार बनाने की कोशिश की है।
सितंबर तिमाही में वित्तीय आंकड़े और मुनाफे पर दबाव के कारण
कंपनी के वित्तीय परिणामों पर नजर डालें तो सितंबर में समाप्त दूसरी तिमाही में आईटीसी का एकीकृत शुद्ध लाभ 18.45 प्रतिशत घटकर 4,229.33 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 5,186.55 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार इस गिरावट की प्रमुख वजह खर्चों में हुई वृद्धि और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जुड़ी कच्चे माल की महंगाई रही। वहीं एकल आधार पर कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 20.07 प्रतिशत गिरकर 4,137 करोड़ रुपये पर आ गया।
मुनाफे में इस संकुचन के बीच कंपनी ने परिचालन मोर्चे पर कुछ सकारात्मक संकेत भी रेखांकित किए। आईटीसी ने बताया कि लागत और मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद उसका एबिटा मार्जिन सालाना आधार पर 50 आधार अंक बढ़ा। इसके अतिरिक्त कंपनी के सभी गैर-सिगरेट खंडों ने मजबूत वृद्धि दर्ज की। विश्लेषकों के लिए भी यह कमजोर परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं थे। वित्तीय नतीजों की घोषणा से पहले मोतीलाल ओसवाल ने सिगरेट खंड के एबिट में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया था, जिसका मुख्य कारण उत्पादों की कीमतों में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने से मार्जिन पर पड़ा दबाव माना गया था।
खंडवार नतीजे और सिगरेट टैक्स का प्रभाव
तिमाही के दौरान आईटीसी के कुल खंडवार परिणाम 5,156.55 करोड़ रुपये रहे, जो पिछले साल की समान अवधि में 6,320.72 करोड़ रुपये दर्ज किए गए थे। इस गिरावट में सबसे बड़ा असर सिगरेट कारोबार के कमजोर प्रदर्शन का रहा। सीएलएसए के अनुसार इस तिमाही में कंपनी का एकल राजस्व सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन सिगरेट पर अप्रत्याशित कर वृद्धि के चलते एबिटा में 17 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
दूसरी ओर पेपरबोर्ड्स, पेपर और पैकेजिंग खंड ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। इस खंड से प्राप्त राजस्व बढ़कर 3,015.85 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो बीते वर्ष की समान तिमाही में 2,219.92 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। पैकेजिंग और पेपर उत्पादों की बढ़ती मांग ने कंपनी को सिगरेट कारोबार से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने में मदद दी।
ब्रोकरेज फर्मों के संशोधित लक्ष्य और राय
वित्तीय नतीजों के सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न वैश्विक एवं घरेलू ब्रोकरेज हाउस ने आईटीसी पर अपनी अलग-अलग रणनीतियां पेश की हैं। मॉर्गन स्टेनली ने आईटीसी पर अपनी इक्वल वेट रेटिंग बरकरार रखते हुए इसके लक्ष्य मूल्य को 340 रुपये से घटाकर 312 रुपये कर दिया है। यूबीएस ने खरीदारी की सलाह कायम रखी है, लेकिन लक्षित मूल्य को 350 रुपये से घटाकर 345 रुपये निर्धारित किया है। जेफरीज ने भी खरीदारी की सिफारिश के साथ 350 रुपये का मूल्य लक्ष्य दिया है।
अन्य प्रमुख संस्थानों में जेपीमॉर्गन ने 310 रुपये के लक्ष्य के साथ न्यूट्रल रुख अपनाया है, जबकि मैक्वेरी ने 300 रुपये के लक्ष्य पर अपनी न्यूट्रल रेटिंग बनाए रखी है। इसके विपरीत सीएलएसए ने अपने लक्ष्य को 388 रुपये से थोड़ा बढ़ाकर 390 रुपये किया है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार दूसरी तिमाही के आंकड़े काफी हद तक अनुमानों के अनुरूप रहे और गैर-सिगरेट कारोबार में तेजी की गति जारी रही।
आगे की रिकवरी और मूल्य वृद्धि की रणनीतियां
आईटीसी के कारोबार की भविष्य में होने वाली रिकवरी अब काफी हद तक सिगरेट उत्पादों के मूल्य निर्धारण पर निर्भर मानी जा रही है। जेपीमॉर्गन का अनुमान है कि पोर्टफोलियो पुनर्गठन और चरणबद्ध मूल्य वृद्धि से सिगरेट एबिट में गिरावट का अंतर धीरे-धीरे कम होगा। विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएफटी श्रेणी में आगे होने वाली कीमतों की बढ़ोतरी से चौथी तिमाही तक इस खंड को स्थिर करने में सहायता मिलेगी।



















