देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस दाखिले का इंतजार कर रहे लाखों मेडिकल उम्मीदवारों को नीट यूजी 2027 के आधिकारिक टाइमटेबल के लिए अभी कुछ वक्त और रुकना होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2027 का शेड्यूल पहले ही सार्वजनिक कर दिया है, लेकिन अंडरग्रेजुएट मेडिकल परीक्षा के कार्यक्रम पर अब भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। इस देरी की मुख्य वजह परीक्षा संचालन ढांचे में होने वाले बुनियादी नीतिगत और तकनीकी बदलाव हैं, जिनका सीधा ताल्लुक पेपर की सुरक्षा और विश्वसनीयता से है।
बीते सत्रों की घटनाओं के बाद सख्त सुरक्षा व्यवस्था की कवायद
विगत सत्रों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर सामने आई विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों से सबक सीखते हुए केंद्र सरकार परीक्षा प्रबंधन में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहती। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी तारीखों की घोषणा से पहले समूची परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने की दिशा में काम कर रही है। जब तक नए क्वेश्चन पैटर्न, उच्चस्तरीय सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रारूप में बदलने की रूपरेखा अंतिम रूप से तय नहीं हो जाती, तब तक तारीखों की घोषणा को रोके रखा गया है।
जनवरी 2027 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगी नंदन नीलेकणि कमेटी की रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्तर की अहम परीक्षाओं की साख और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के मकसद से केंद्र सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुवाई में छह सदस्यों वाली एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की थी। इस टास्क फोर्स का प्राथमिक दायित्व परीक्षा तंत्र में धांधली रोकने के कड़े नियम बनाना और पारदर्शिता लाना है। देश भर से अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों की ओर से टास्क फोर्स को 50,000 से अधिक परामर्श और सुझाव हासिल हुए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह ड्राफ्ट अक्टूबर 2026 तक सौंपा जाना था, परंतु सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए ताजा हलफनामे के मुताबिक अब यह अंतिम रिपोर्ट जनवरी 2027 में सौंपी जाएगी।
कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुरक्षा पर मंथन
नीलेकणि टास्क फोर्स की आगामी रिपोर्ट ही नीट यूजी 2027 के संचालन का तौर-तरीका तय करेगी। पारंपरिक ओएमआर और पेन-पेपर व्यवस्था की जगह परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी सीबीटी मोड में आयोजित करने का विकल्प सबसे प्रमुखता से विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त, नंदन नीलेकणि की तरफ से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के जरिए क्वेश्चन पेपर सेट करने और एग्जामिनेशन सेंटर पर ही रियल-टाइम प्रिंटिंग करने जैसे तकनीकी मॉडल भी सुझाए जा चुके हैं। ऑनलाइन सीबीटी परीक्षा के आयोजन के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षित कंप्यूटर लैब, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की दरकार होती है। यही कारण है कि एनटीए टास्क फोर्स की रिपोर्ट का गहन अध्ययन करने के बाद ही आगे का रास्ता तय करेगा।
फरवरी 2027 तक खिंच सकता है आधिकारिक परीक्षा कार्यक्रम
चूंकि टास्क फोर्स अपनी अंतिम रिपोर्ट जनवरी 2027 के अंतिम चरण तक सौंपने जा रही है, लिहाजा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी उसकी सिफारिशों को आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर में ढालने के लिए फरवरी 2027 का वक्त चुन सकती है। यदि परीक्षा को पूरी तरह ऑनलाइन सीबीटी मोड में शिफ्ट किया जाता है, तो लाखों परीक्षार्थियों को देखते हुए इसे अलग-अलग पालियों या कई दिनों में आयोजित करना पड़ेगा, जिसके लिए विस्तृत ब्लूप्रिंट जरूरी होगा। ऐसे में अपनी तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों को आधिकारिक शेड्यूल जानने के लिए फरवरी तक का सब्र रखना होगा, ताकि भविष्य में एक सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सामने आ सके।



















