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फौज की वर्दी पर सितारे बढ़ते ही बदल जाती है जिम्मेदारी, जानिए मेजर और ब्रिगेडियर की सैलरी में कितना फासला हैकरियर
7 सित॰ 2026, 1:37 pm (52 दिन पहले)· 2

फौज की वर्दी पर सितारे बढ़ते ही बदल जाती है जिम्मेदारी, जानिए मेजर और ब्रिगेडियर की सैलरी में कितना फासला है

भारतीय सेना में मेजर और ब्रिगेडियर, दोनों अहम रैंक हैं लेकिन कमान, प्रमोशन के नियम, सैलरी और रिटायरमेंट की उम्र के मामले में दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है.

भारतीय सेना में अफसर बनने का सपना देखने वाले ज्यादातर युवाओं के मन में एक सवाल जरूर आता है, मेजर बड़ा पद है या ब्रिगेडियर? सेना का पूरा ढांचा अनुशासन, अनुभव और नेतृत्व क्षमता पर टिका होता है और यहां हर रैंक का अपना दायरा और अपनी अहमियत होती है. यह समझ लेना जरूरी है क्योंकि इसी से पता चलता है कि किस अफसर के हाथ में कितने सैनिकों की कमान होती है, प्रमोशन में कितना वक्त लगता है और सैलरी में कितना फर्क आता है.

कौन किसकी कमान संभालता है

मेजर सेना में मिड-लेवल एग्जीक्यूटिव अफसर होते हैं जो सीधे मैदान में सैनिकों की अगुवाई करते हैं और रोजमर्रा के ऑपरेशन खुद अंजाम देते हैं. एक मेजर के जिम्मे आमतौर पर एक कंपनी होती है, यानी करीब 100 से 120 जवान. दूसरी तरफ ब्रिगेडियर सीनियर फ्लैग-रैंक अफसर होते हैं जो पूरी ब्रिगेड यानी करीब 3,000 से 3,500 सैनिकों की कमान संभालते हैं. इतने बड़े दायरे में कई कर्नल और मेजर उनके मातहत काम करते हैं. जाहिर है कि जिम्मेदारी और अधिकार, दोनों के लिहाज से ब्रिगेडियर का ओहदा मेजर से कहीं आगे है.

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रैंक की सीढ़ी और कंधे पर लगे स्टार

सेना की रैंक व्यवस्था में ब्रिगेडियर, मेजर से पूरे तीन पायदान ऊपर बैठता है. तरक्की का यह सफर कुछ यूं चलता है, मेजर के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल, फिर कर्नल और आखिर में ब्रिगेडियर. यानी ब्रिगेडियर तक पहुंचने से पहले किसी अफसर को कम से कम दो और बड़े पड़ावों से गुजरना पड़ता है. कंधे पर लगे बैज से भी दोनों अफसरों की पहचान अलग-अलग हो जाती है. मेजर के कंधे पर सिर्फ राष्ट्रीय प्रतीक यानी अशोक स्तंभ नजर आता है, जबकि ब्रिगेडियर के कंधे पर अशोक स्तंभ के साथ त्रिभुज के आकार में सजे तीन सितारे भी होते हैं. यही बैज मैदान में यह तय करते हैं कि सामने खड़ा अफसर कितना सीनियर है.

मेजर से ब्रिगेडियर तक पहुंचने में लगते हैं कितने साल

मेजर बनने का रास्ता तुलनात्मक रूप से तय और सीधा है. एनडीए, सीडीएस, ओटीए या एएफकैट परीक्षा पास करके जो युवा लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन पाते हैं, वे करीब 6 साल की सेवा पूरी होते ही मेजर के पद पर प्रमोट हो जाते हैं. यानी मेजर बनना पूरी तरह समय पर आधारित यानी टाइम-बाउंड प्रक्रिया है. ब्रिगेडियर बनने की राह इससे कहीं ज्यादा मुश्किल और लंबी है. यह पूरी तरह सिलेक्शन बोर्ड और मेरिट पर टिका होता है. कर्नल रैंक का कोई अफसर तभी ब्रिगेडियर बन पाता है जब उसकी सर्विस लगभग 25 से 28 साल शानदार और बेदाग रही हो. यानी जहां मेजर की तरक्की तय समय पर मिल जाती है, वहीं ब्रिगेडियर का पद पाने के लिए बरसों के प्रदर्शन और एक कड़ी चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

सैलरी और भत्तों में कितना बड़ा फासला

सातवें वेतन आयोग यानी 7th CPC के पे मैट्रिक्स के मुताबिक मेजर को लेवल 11 के तहत बेसिक पे के रूप में 69,400 रुपये से लेकर 2,07,200 रुपये तक मिलते हैं. वहीं ब्रिगेडियर लेवल 13A में आते हैं, जहां बेसिक पे 1,39,600 रुपये से 2,17,600 रुपये तक जाती है. बेसिक पे के अलावा दोनों ही रैंक के अफसरों को हर महीने 15,500 रुपये की फिक्स्ड मिलिट्री सर्विस पे यानी MSP भी मिलती है. इसके साथ महंगाई भत्ता यानी DA, हार्डशिप अलाउंस, फ्री राशन, टाइप-V या टाइप-VI का सरकारी बंगला, ऑफिशियल गाड़ी और कैंटीन यानी CSD की सुविधाएं भी दोनों पदों के अफसरों को मिलती हैं. यानी असली अंतर बेसिक पे के दायरे और रैंक के हिसाब से मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता में साफ नजर आता है.

रिटायरमेंट की उम्र और दोनों की भूमिका में फर्क

अगर आगे प्रमोशन न मिले तो मेजर के पद पर रिटायरमेंट की उम्र करीब 52 से 54 साल के बीच होती है. वहीं ब्रिगेडियर रैंक के अफसर 56 साल की उम्र में रिटायर होते हैं. भूमिका के लिहाज से भी दोनों अफसरों का काम बिल्कुल अलग है. मेजर मैदान में मौजूद रहकर ऑपरेशन्स को जमीनी स्तर पर अंजाम देते हैं, यानी उनका ज्यादातर वक्त फील्ड में गुजरता है. वहीं ब्रिगेडियर की भूमिका रणनीतिक होती है, वे युद्ध की तैयारी, बड़े सैन्य अभियानों की प्लानिंग और स्ट्रैटेजिक फैसलों पर काम करते हैं. यही वजह है कि सेना में करियर बनाने की सोच रहे युवाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि हर रैंक के साथ जिम्मेदारी, सैलरी और भूमिका का दायरा भी पूरी तरह बदल जाता है.

सवाल-जवाब

मेजर और ब्रिगेडियर में कौन सा पद बड़ा है?
ब्रिगेडियर का पद मेजर से बड़ा है, यह मेजर से तीन रैंक ऊपर होता है.
मेजर के मुकाबले ब्रिगेडियर कितने सैनिकों की कमान संभालते हैं?
मेजर करीब 100-120 सैनिकों वाली एक कंपनी संभालते हैं, जबकि ब्रिगेडियर करीब 3,000 से 3,500 सैनिकों वाली पूरी ब्रिगेड की कमान संभालते हैं.
मेजर बनने में कितना समय लगता है?
लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिलने के बाद करीब 6 साल की सेवा पूरी होने पर अधिकारी मेजर बनते हैं.
ब्रिगेडियर बनने के लिए क्या शर्त होती है?
ब्रिगेडियर बनना सिलेक्शन बोर्ड और मेरिट पर निर्भर करता है, और यह पद करीब 25 से 28 साल की शानदार सेवा के बाद ही मिलता है.
मेजर और ब्रिगेडियर की बेसिक सैलरी में क्या फर्क है?
मेजर की बेसिक पे लेवल 11 के तहत 69,400 से 2,07,200 रुपये है, जबकि ब्रिगेडियर की बेसिक पे लेवल 13A के तहत 1,39,600 से 2,17,600 रुपये है.
दोनों अफसरों को मिलिट्री सर्विस पे कितनी मिलती है?
दोनों को बेसिक पे के अलावा 15,500 रुपये प्रति माह की फिक्स्ड मिलिट्री सर्विस पे (MSP) मिलती है.
मेजर और ब्रिगेडियर के कंधे के बैज में क्या फर्क है?
मेजर के कंधे पर सिर्फ अशोक स्तंभ होता है, जबकि ब्रिगेडियर के कंधे पर अशोक स्तंभ के साथ त्रिभुज आकार में तीन सितारे भी होते हैं.
मेजर और ब्रिगेडियर की रिटायरमेंट उम्र क्या है?
मेजर करीब 52-54 साल की उम्र में रिटायर होते हैं, जबकि ब्रिगेडियर 56 साल की उम्र में रिटायर होते हैं.
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