पंजाब के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य के विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है। इस नए घटनाक्रम के सामने आने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बयानों का दौर शुरू हो गया है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
जांच एजेंसी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(e) और 13(2) के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B के अंतर्गत कानूनी कदम उठाए हैं। यह पूरा मामला मुख्य रूप से वर्ष 2007 से 2017 के बीच की अवधि से जुड़ा हुआ है। इसी वित्तीय जांच के सिलसिले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को एफआईआर नंबर 22 दर्ज करते हुए कार्रवाई की थी और नेता को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 22 अगस्त 2025 को लगभग 40 हजार पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज अदालत में सौंपा गया था, जिसमें भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन का जिक्र किया गया था। हालांकि कानूनी प्रक्रिया के तहत बिक्रम सिंह मजीठिया को 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है और फिलहाल वह जेल से बाहर हैं।
सत्तारूढ़ दल के गंभीर आरोप
चार्जशीट सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी को विरोधी दल पर हमला बोलने का बड़ा मौका मिल गया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि अवैध कारोबार के जरिए भारी रकम विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों में पहुंचाई गई थी। पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने इस बात की जानकारी दी कि इस कानूनी कार्रवाई के दायरे में बिक्रम मजीठिया के अलावा गज्जपत सिंह ग्रेवाल और हरप्रीत गुलाटी जैसे अन्य नाम भी शामिल हैं। सत्तारूढ़ पक्ष का यह भी कहना है कि यह पूरा प्रकरण गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है जिसकी जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
मजीठिया का पलटवार और खुली चुनौती
दूसरी तरफ बिक्रम सिंह मजीठिया ने इन تمام आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्ताधारी दल की बौखलाहट करार दिया है। उनका कहना है कि वह सरकार की पोल खोल रहे हैं इसलिए उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने उनका खुला चैलेंज है क्योंकि उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कुछ चुनिंदा अधिकारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी सरकार हमेशा सत्ता में नहीं रहती और सभी को संविधान के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।























