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बिक्रम सिंह मजीठिया की कानूनी मुश्किलें गहरी, आय से अधिक संपत्ति मामले में दाखिल हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीटपंजाब
29 अक्तू॰ 2026, 4:09 am (30 मिनट पहले)· 2

बिक्रम सिंह मजीठिया की कानूनी मुश्किलें गहरी, आय से अधिक संपत्ति मामले में दाखिल हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीट

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में आम आदमी पार्टी ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि मजीठिया ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

पंजाब के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य के विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है। इस नए घटनाक्रम के सामने आने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बयानों का दौर शुरू हो गया है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई

जांच एजेंसी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(e) और 13(2) के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B के अंतर्गत कानूनी कदम उठाए हैं। यह पूरा मामला मुख्य रूप से वर्ष 2007 से 2017 के बीच की अवधि से जुड़ा हुआ है। इसी वित्तीय जांच के सिलसिले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को एफआईआर नंबर 22 दर्ज करते हुए कार्रवाई की थी और नेता को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 22 अगस्त 2025 को लगभग 40 हजार पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज अदालत में सौंपा गया था, जिसमें भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन का जिक्र किया गया था। हालांकि कानूनी प्रक्रिया के तहत बिक्रम सिंह मजीठिया को 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है और फिलहाल वह जेल से बाहर हैं।

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सत्तारूढ़ दल के गंभीर आरोप

चार्जशीट सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी को विरोधी दल पर हमला बोलने का बड़ा मौका मिल गया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि अवैध कारोबार के जरिए भारी रकम विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों में पहुंचाई गई थी। पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने इस बात की जानकारी दी कि इस कानूनी कार्रवाई के दायरे में बिक्रम मजीठिया के अलावा गज्जपत सिंह ग्रेवाल और हरप्रीत गुलाटी जैसे अन्य नाम भी शामिल हैं। सत्तारूढ़ पक्ष का यह भी कहना है कि यह पूरा प्रकरण गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है जिसकी जांच लगातार आगे बढ़ रही है।

मजीठिया का पलटवार और खुली चुनौती

दूसरी तरफ बिक्रम सिंह मजीठिया ने इन تمام आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्ताधारी दल की बौखलाहट करार दिया है। उनका कहना है कि वह सरकार की पोल खोल रहे हैं इसलिए उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने उनका खुला चैलेंज है क्योंकि उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कुछ चुनिंदा अधिकारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी सरकार हमेशा सत्ता में नहीं रहती और सभी को संविधान के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

सवाल-जवाब

बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कौन सी नई कार्रवाई हुई है?
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है।
यह मामला किस समयावधि से जुड़ा हुआ है?
यह पूरा मामला मुख्य रूप से वर्ष 2007 से 2017 के बीच के वित्तीय लेन-देन से संबंधित है।
बिक्रम सिंह मजीठिया वर्तमान में कहां हैं?
उन्हें 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है और वह फिलहाल जेल से बाहर हैं।
इस मामले में कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(e) और 13(2) के साथ आईपीसी की धारा 120-B के तहत कार्रवाई की है।
आम आदमी पार्टी ने क्या आरोप लगाए हैं?
पार्टी ने दावा किया है कि अवैध तरीके से जुटाई गई भारी रकम विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों में जमा कराई गई थी।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·अभी

पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का खेल कभी खत्म नहीं होता, चुनाव पास आते ही मामले फिर उठ जाते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·अभी

अर्जुन जी, चालीस हज़ार पन्नों की चार्जशीट कोई छोटी बात नहीं है, मामला सचमुच गंभीर लगता है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 मिनट पहले

पंजाब की राजनीति में मजीठिया और सरकार के बीच का यह टकराव अब काफी लंबा खिंच गया है। इतने सारे पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी मामला कोर्ट में कब तक चलेगा और क्या सच में कोई ठोस सबूत सामने आ पाएंगे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

रोहन भाई, चालीस हजार पन्नों की चार्जशीट सुनकर ही चक्कर आ जाता है, कोर्ट में इसका हिसाब होने में तो साल लग जाएंगे।

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