साइंस स्ट्रीम से 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे अधिकांश छात्र मेडिकल के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने की इच्छा रखते हैं। चिकित्सा के पेशे को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है और इसे हमेशा से एक अत्यधिक प्रतिष्ठित करियर माना गया है। नीट की परीक्षा की तैयारी में जुटे लाखों युवा देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने का सपना संजोते हैं। लेकिन क्या केवल किताबों को रटकर या भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान विषयों में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करके ही एक बेहतरीन डॉक्टर बना जा सकता है, या फिर इसके लिए कुछ अन्य विशिष्ट योग्यताओं की भी आवश्यकता होती है?
चिकित्सा की पढ़ाई और उसके बाद डॉक्टरी का यह सफर पहली नजर में बेहद आकर्षक और चमकदार नजर आता है। हालांकि, अंदरूनी तौर पर यह क्षेत्र उतनी ही अधिक कड़ी मेहनत, संघर्ष और असीम धैर्य की मांग करता है। मेडिकल फील्ड में कदम रखने से पहले प्रत्येक छात्र को स्वयं से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि उसका मानसिक और शारीरिक ढांचा इस पेशे की कठोर आवश्यकताओं के अनुकूल है या नहीं। यदि आप एमबीबीएस की डिग्री हासिल करके डॉक्टर बनना चाहते हैं, तो यहाँ कुछ ऐसी आवश्यक खूबियों और कमियों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है, जिनसे यह तय होगा कि आपको इस मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए या किसी अन्य विकल्प को चुनना चाहिए।
क्या वाकई आप डॉक्टर बनने के योग्य हैं?
कई बार बच्चे अपने माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदारों, शिक्षकों या दोस्तों के भारी दबाव में आकर नीट यूजी की तैयारी शुरू कर देते हैं। इसे पारिवारिक दबाव या साथियों का दबाव कहा जा सकता है। लेकिन अगर आपके परिवार में पहले से कोई डॉक्टर है या आपका कोई जिगरी दोस्त डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है, तो इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वही पेशा आपके लिए भी एकदम सही है। यदि मेडिकल के क्षेत्र में आपकी अपनी कोई रुचि नहीं है या आप लगातार लंबे घंटों तक काम का दबाव सहन करने में असमर्थ हैं, तो इस क्षेत्र में प्रवेश करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि आपको डॉक्टरी की राह चुननी चाहिए या नहीं।
एक डॉक्टर का वास्तविक जीवन फिल्मों की तरह बिल्कुल नहीं होता है, जहाँ एक साधारण इंजेक्शन लगाने से मरीज तुरंत स्वस्थ हो जाता है। यहाँ अस्पतालों में चौबीस से छत्तीस घंटे की लंबी शिफ्ट्स बेहद आम बात हैं। यदि आपको थोड़ी सी भी थकान होने पर चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है या आप रात की पूरी नींद लिए बिना कार्य नहीं कर सकते हैं, तो यह पेशा आपके लिए गंभीर मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। पढ़ाई के दौरान अत्यधिक भारी-भरकम पाठ्यक्रम और बाद में आपातकालीन मामलों को कुशलता से संभालने के लिए मजबूत जिगर और अपार धैर्य की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
भावनाओं पर नियंत्रण और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने की क्षमता
डॉक्टर के सामने कई बार ऐसे अत्यधिक भयावह या दर्दनाक हादसे सामने आते हैं जिन्हें देखकर कोई भी सामान्य व्यक्ति बुरी तरह डर जाए। अस्पताल के आईसीयू या इमरजेंसी वॉर्ड में खून-खराबा, पीड़ा और मौत का माहौल होता है। यदि आप अत्यधिक संवेदनशील स्वभाव के हैं और छोटी-छोटी परिस्थितियों से घबरा जाते हैं या बहुत जल्दी भावुक हो जाते हैं, तो आप डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर तुरंत और सही निर्णय लेने में असमर्थ रहेंगे। यहाँ पूरी तरह ठंडे दिमाग से हर स्थिति को नियंत्रित करना आना ही सबसे बड़ी कला है।
अंतहीन पढ़ाई और खुद को हमेशा अपडेट रखने का जुनून
कई लोगों का यह सोचना होता है कि एमबीबीएस की डिग्री हाथ में आते ही पढ़ाई हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। इसके विपरीत, मेडिकल साइंस एक ऐसा असीम समंदर है जो हर एक दिन परिवर्तित हो रहा है। प्रत्येक दिन नई बीमारियां, नए वायरस, आधुनिक तकनीक और नई दवाइयां बाजार में आती रहती हैं। एक सफल डॉक्टर बनने के लिए व्यक्ति को अपनी पूरी जिंदगी एक विद्यार्थी की तरह बितानी पड़ती है। इसके साथ ही हमेशा कुछ नया सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना अनिवार्य है। यदि आपको पुस्तकें पढ़ना और नई रिसर्च खंगालना उबाऊ लगता है, तो यह पेशा आपके लिए घुटन भरा साबित होगा।
किन कमियों वाले युवाओं को डॉक्टर बनने से बचना चाहिए?
ऊपर डॉक्टर बनने के लिए आवश्यक मानकों को आप भली-भांति समझ चुके हैं। अब यह जानना भी बेहद जरूरी है कि किन कमियों या प्रवृत्तियों वाले लोगों को डॉक्टर बनने के इस कठिन मार्ग पर नहीं चलना चाहिए
शॉर्टकट या जल्दबाजी में धन कमाने की लालसा: यदि आपका एकमात्र उद्देश्य रातों-रात अमीर बनना है, तो मेडिकल क्षेत्र में कदम रखने से पहले आपको दो बार विचार अवश्य करना चाहिए। यहाँ सफलता प्राप्त करने में एक लंबा समय और वर्षों की कड़ी मेहनत लगती है।
संवाद का अभाव या कम्यूनिकेशन गैप: एक डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत का पुल हमेशा मजबूत होना चाहिए। यदि आप लोगों से खुलकर बात करने में झिझकते हैं या अपनी बात को मरीजों को ठीक ढंग से समझाने में असमर्थ हैं, तो मरीज का आधा इलाज वहीं अधूरा रह जाता है।
अहंकार या अत्यधिक घमंड: मरीजों और उनके डरे हुए परिजनों के साथ सच्ची सहानुभूति रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। घमंडी और अड़ियल स्वभाव वाले चिकित्सक को समाज कभी भी स्वीकार नहीं करता है।
किसी भी नीट कोचिंग संस्थान के झूठे विज्ञापनों के झांसे में आकर या माता-पिता के दबाव के कारण कभी भी मेडिकल लाइन का चयन न करें। यह अत्यंत श्रेयस्कर होगा कि आप किसी अनुभवी डॉक्टर से मिलकर उनके दैनिक रूटीन को समझें और यदि संभव हो तो किसी अस्पताल में जाकर वहाँ के माहौल का खुद निरीक्षण करें। जब आपका मन और आपकी अंतरात्मा दोनों इस बात के लिए हाँ कहें, तभी आप इस चुनौतीपूर्ण रास्ते पर आगे कदम बढ़ाएं।



















