देश के चार प्रमुख राज्यों में हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनावों के परिणामों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस पार्टी को लगा है, जो 28 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद अपना खाता खोलने में पूरी तरह असफल रही। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने अपना मजबूत आधार बनाए रखा और कई सीटों पर जीत दर्ज की। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने भी अपने प्रदर्शन में सुधार किया, जबकि बिहार में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने कांग्रेस की एक सीट पर कब्जा जमाया। इन नतीजों के बाद राजनीतिक गलियारों में ईवीएम और बैलेट पेपर को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है, क्योंकि इन चुनावों में मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से कराया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन चारों राज्यों के विधान परिषद परिणामों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब मतदान बैलेट पेपर से हुआ है, तब भी कांग्रेस को यह देखना चाहिए कि उसे कितनी सीटें हासिल हुई हैं। चुनावी हार के बाद कांग्रेस के भीतर नतीजों की समीक्षा की बात तो कही जा रही है, लेकिन पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग पर अब भी अड़ी हुई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि इन परिणामों ने उन तर्कों पर पानी फेर दिया है जिनमें कांग्रेस हार के लिए हमेशा ईवीएम को जिम्मेदार ठहराती रही है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चाहे ईवीएम का बटन दबाया जाए या बैलेट पेपर का इस्तेमाल हो, कांग्रेस का हश्र हर जगह एक जैसा ही होता है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि चुनावी हार अब इस पार्टी की नियमित प्रवृत्ति बन चुकी है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी और समाजवादी पार्टी का शक्ति प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिला। लगभग 36 घंटे चली लंबी मतगणना के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें गईं। साल 2020 के पिछले चुनावों में भी बीजेपी के पास 6 सीटें थीं, जिससे उसकी स्थिति स्थिर रही, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अपनी सीटों की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 कर ली। सपा ने वाराणसी शिक्षक, आगरा शिक्षक और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। इन परिणामों से उत्साहित पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने समर्थकों को जीत का जश्न बेहद संयमित तरीके से मनाने की सलाह दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि किसी भी तरह के हुड़दंग से बचा जाए, अन्यथा सत्ताधारी पार्टी इसे गुंडागर्दी का नाम देने में देर नहीं लगाएगी।
मतगणना के दौरान विवाद और वाराणसी-गोरखपुर के समीकरण
मतगणना प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर विवाद और गहमागहमी की स्थिति भी उत्पन्न हुई। अखिलेश यादव ने कुछ वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि यदि गिनती निष्पक्ष होती तो उनकी पार्टी और भी अधिक सीटें जीत सकती थी। आगरा में सपा उम्मीदवार आकाश अग्रवाल के धरने पर बैठने और उन पर हमले के आरोप जैसी घटनाएं भी सामने आईं, हालांकि तमाम विवादों के बीच आकाश अग्रवाल अंततः चुनाव जीतने में सफल रहे। वाराणसी की दोनों स्नातक और शिक्षक सीटों पर एक बार फिर समाजवादी पार्टी का कब्जा बरकरार रहा। इसके अलावा गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर एक बेहद कड़े मुकाबले में बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी ने जीत हासिल की, जहां निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव दूसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर भी दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती के दौरान खासा हंगामा हुआ और उम्मीदवार को बाहर जाना पड़ा।
बिहार में जनसुराज और आरजेडी का उभार, कांग्रेस खाली हाथ
बिहार की विधान परिषद सीटों के चुनाव में भी राष्ट्रीय दलों के लिए मिले-जुले रुझान सामने आए। यहाँ कुल 8 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिनके परिणामों में बीजेपी ने कोसी स्नातक और तिरहुत शिक्षक सीटों पर बाजी मारी। पटना शिक्षक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, जबकि सारण शिक्षक सीट निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज के पास गई। तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी ने जीत हासिल की। बिहार में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा आघात दरभंगा शिक्षक सीट पर लगा, जो पहले उसके पास थी लेकिन इस बार प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार ने उसे छीन लिया। पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की, जहां बाहुबली नेता अनंत सिंह ने जनसुराज के उम्मीदवार के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन परिणाम नीरज कुमार के पक्ष में आने से विरोधी खेमे में माय छा गई।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में महायुति और एनडीए की बढ़त
महाराष्ट्र में विधान परिषद की 5 सीटों पर हुए चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने मजबूत पकड़ दिखाई, जबकि कांग्रेस को दो पुरानी सीटें गंवानी पड़ीं। बीजेपी ने पुणे शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की, और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट पर कब्जा किया। इसके विपरीत, कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकार होने के बावजूद पार्टी को चारों विधान परिषद सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा। कर्नाटक के इन नतीजों ने राजनीतिक हलकों में बड़ा संदेश दिया है, जहाँ बीजेपी ने तीन सीटें जीतीं और एक सीट जनता दल सेक्युलर के खाते में गई। बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस उम्मीदवार ने जीत हासिल की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस परिणाम पर निराशा जताते हुए कहा कि पार्टी इन कमियों की गहराई से समीक्षा करेगी, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग पर आगे भी कायम रहेगी।






















