प्रयागराज स्थित प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय में एलएलबी सेमेस्टर परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही भारी असंतोष पैदा हो गया है. विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न विधि महाविद्यालयों के लगभग 12 हजार परीक्षार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से करीब 3 हजार छात्रों को अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है. इतने बड़े पैमाने पर कानून के विद्यार्थियों के अनुत्तीर्ण होने से कैंपस और संबद्ध कॉलेजों में हड़कंप मच गया. इसके बाद जब प्रभावित छात्रों ने सूचना के अधिकार अर्थात आरटीआई का उपयोग करके अपनी उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाईं, तो उत्तरों के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही सामने आई हैं.
आरटीआई की कॉपियों से हुआ मूल्यांकन की लापरवाही का खुलासा
सूचना के अधिकार के माध्यम से जब छात्रों ने अपनी जांची गई कॉपियां प्राप्त कीं, तो पन्नों पर दिए गए अंकों को देखकर हर कोई हैरान रह गया. एलएलबी चौथे सेमेस्टर के एक परीक्षार्थी ने जब तीसरे प्रश्नपत्र की उत्तर पुस्तिका आरटीआई से निकलवाई, तो उसमें उत्तर विस्तार से लिखे होने के बावजूद जांचने वाले शिक्षक ने पन्नों पर सीधे शून्य अंक दे रखे थे. इसी प्रकार चौथे सेमेस्टर के चौथे प्रश्नपत्र में भी अजीबोगरीब तरीके से अंक दिए गए. छात्र का कहना है कि उन्होंने उत्तर में सभी आवश्यक बिंदु सही लिखे थे, फिर भी मुख्य उत्तरों के सामने केवल 1-1 नंबर देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई. इस खुलासे ने परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
12 हजार में से 3 हजार परीक्षार्थी फेल, छात्रों के करियर पर खतरा
इस बार आयोजित हुई एलएलबी परीक्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक दिखती है. कुल 12 हजार में से लगभग 9 हजार परीक्षार्थी ही सफलता प्राप्त कर सके हैं, जबकि 3 हजार छात्रों का एक साथ फेल होना असामान्य माना जा रहा है. विधि छात्रों का स्पष्ट कहना है कि यह मामला केवल एक या दो विद्यार्थियों का व्यक्तिगत विषय नहीं है. ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी और लापरवाही में पूरी की गई है. इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना जांच से होनहार और मेहनती विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य भी दांव पर लग गया है.
छात्रों में बढ़ा आक्रोश, री-इवैल्यूएशन और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ी के प्रमाण सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध कॉलेजों में छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. प्रभावित परीक्षार्थी अब एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं
- स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों से पुनर्मूल्यांकन: पीड़ित छात्रों की मांग है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच किसी स्वतंत्र विषय विशेषज्ञ से दोबारा कराई जाए.
- पारदर्शी और निष्पक्ष जांच: परीक्षार्थियों का कहना है कि जब तक पूरे बैच के मूल्यांकन कार्य की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक उनके करियर और योग्यता पर लगा प्रश्नचिन्ह समाप्त नहीं होगा.
विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष पहुंचे परीक्षार्थी, न्याय की उम्मीद
अक्सर विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षाओं में कड़ाई बरतने और नकल पर रोक लगाने के नाम पर कड़े नियम लागू करता है. हालांकि, जब उत्तर पुस्तिकाओं के सही और सटीक मूल्यांकन की बात आती है, तो इस तरह की घोर लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ सरासर अन्याय साबित होती है. वर्तमान में पीड़ित परीक्षार्थी अपनी शिकायतों और आरटीआई में मिले साक्ष्यों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं. अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित हजारों छात्रों को राहत प्रदान करने के लिए क्या कदम उठाता है.



















