जब कटहल का मौसम शुरू होता है, तो भारतीय रसोई में तरह-तरह के व्यंजन बनने लगते हैं। लोग बड़े चाव से इसकी चटपटी सब्जी, जायकेदार अचार या कटहल दो प्याजा तैयार करते हैं। हालांकि, अधिकतर घरों में कटहल का गूदा इस्तेमाल करने के बाद उसके बीजों को किसी काम का न समझकर कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है। यदि आप भी अब तक ऐसा ही करते आए हैं, तो आपको यह तरीका तुरंत बदल लेना चाहिए। दिखने में साधारण लगने वाले कटहल के ये बीज स्वाद और सेहत का एक बेहद समृद्ध खजाना हैं।
यदि रोजमर्रा के खाने में टमाटर, पुदीना, धनिया या हरी मिर्च की एक ही तरह की चटनी खाकर आपका स्वाद फीका पड़ गया है, तो कटहल के बीजों से बनी देसी चटनी एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है। यह न सिर्फ आपकी रोज की थाली के जायके को दोगुना कर देती है, बल्कि आपके भोजन को एक अलग और लजीज ट्विस्ट भी प्रदान करती है।
कटहल के बीजों की स्वादिष्ट चटनी बनाने की पूरी विधि
कटहल के बीजों से चटनी तैयार करना बेहद सरल है। सबसे पहले बीजों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर उन्हें थोड़ी देर धूप में सुखा लें। इसके बाद एक कढ़ाई में मामूली सा तेल गर्म करें। इस गर्म तेल में सूखे हुए बीजों के साथ छिली हुई लहसुन की कलियां और कटी हुई हरी मिर्च डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह से रोस्ट करें।
जब बीज और मसाले धीमी आंच पर भुन जाएं, तो उन्हें आंच से उतारकर ठंडा होने के लिए रख दें। पूरी तरह ठंडा हो जाने पर बीजों के ऊपर का सख्त छिलका बेहद आसानी से उतर जाता है। अब छिले हुए बीजों, भुने हुए लहसुन और हरी मिर्च को एक पारंपरिक सिल बट्टे पर रखें और उसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर पीस लें। हालांकि, आधुनिक रसोई में मिक्सी का उपयोग भी किया जा सकता है, लेकिन सिल बट्टे पर पिसी हुई चटनी की सोंधी खुशबू और प्रामाणिक देसी स्वाद का कोई मुकाबला नहीं है।
तैयार चटनी को दोपहर या रात के भोजन में गरमा-गरम दाल-चावल, पराठे या रोटी के साथ परोसा जा सकता है। यह किसी भी साधारण भोजन में नया स्वाद भर देती है।
शाम के नाश्ते के लिए झटपट तैयार करें बीजों की चटपटी चाट
चटनी के अलावा कटहल के इन पौष्टिक बीजों से एक त्वरित और स्वादिष्ट चाट भी बनाई जा सकती है। शाम की चाय के समय यह एक हल्का-फुल्का और सेहतमंद स्नैक बन जाता है।
कटहल के बीजों की चाट बनाने के लिए बीजों को साफ करके प्रेशर कुकर में डालें। इसमें थोड़ा पानी और स्वादानुसार नमक मिलाकर कुकर को बंद करें और धीमी से मध्यम आंच पर 2 से 3 सीटी आने तक उबलने दें। उबलने के बाद जब कुकर का दबाव खत्म हो जाए, तो बीजों को बाहर निकाल लें। उबल जाने के कारण इनका बाहरी कड़ा छिलका बड़ी आसानी से अलग हो जाता है।
छिलका हटाने के बाद इन नरम उबले बीजों पर थोड़ा सा चटपटा चाट मसाला, भुना हुआ जीरा पाउडर और ताजा नींबू का रस निचोड़ें। अच्छी तरह मिलाकर इसे गर्म चाय के साथ परोसें।
आयुर्वेद और पोषण: सेहत के लिए क्यों वरदान हैं ये बीज?
यह डिश केवल स्वाद में ही लाजवाब नहीं है, बल्कि शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती। देहरादून की आयुर्वेदिक चिकित्सक शालिनी के अनुसार, कटहल के बीज प्राकृतिक प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का एक उत्कृष्ट स्रोत हैं। यह संयोजन शरीर में ऊर्जा का संचार बनाए रखता है और दिनभर आपको तरोताजा तथा ऊर्जावान रखने में मदद करता है।
इन बीजों के पोषण प्रोफाइल पर नजर डालें तो इनमें थियामिन, राइबोफ्लेविन, डाइटरी फाइबर, जिंक और आयरन जैसे कई अति आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। नियमित रूप से इनका सही मात्रा में सेवन करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है और पेट संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके अलावा, इनमें मौजूद आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में सहायक होता है, जबकि विभिन्न खनिज बालों की अच्छी ग्रोथ और मजबूती के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। यही वजह है कि एशिया के कई देशों में कटहल के बीजों को रसोई का मुख्य हिस्सा माना जाता है और इनसे तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं।


















