सन 1947 के भारत विभाजन के दौरान अपने घर-बार और संपत्ति छोड़कर आने वाले लोगों की पहचान को लेकर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। अगरतला में शुक्रवार को आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से त्रिपुरा आए लोगों को शरणार्थी कहना अनुचित है, क्योंकि उन्हें विषम परिस्थितियों के कारण मजबूरी में अपनी पैतृक ज़मीन और घर छोड़ना पड़ा था। ऐसे नागरिकों को शरणार्थी के बजाय आधिकारिक तौर पर विस्थापित व्यक्ति का दर्जा दिया जाना चाहिए।
त्रिपुरा के जनसांख्यिकीय ढांचे पर विभाजन का प्रभाव
अगरतला के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रेखांकित किया कि 1947 में देश का बंटवारा जनभावनाओं के विपरीत हुआ था। विभाजन से पहले वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश अविभाजित भारत का ही अटूट हिस्सा थे। बंटवारे के बाद पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बांग्लादेश है) की सीमा से सटे होने के कारण त्रिपुरा पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ा। वहां से बड़े पैमाने पर बंगाली हिंदुओं का पलायन हुआ, जिसने राज्य की सामाजिक संरचना और जनसांख्यिकी को हमेशा के लिए बदल दिया।
ऐतिहासिक संबंध और विस्थापन का अनूठा अनुभव
माणिक साहा ने त्रिपुरा और पड़ोसी क्षेत्रों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कुमिला, चकले रोशनबाद और चटगांव हिल ट्रैक्ट्स जैसे इलाकों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये क्षेत्र त्रिपुरा की ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश का विभाजन न हुआ होता तो पूर्वी पाकिस्तान में संकट झेल रहे बंगाली हिंदुओं को कभी अपना घर छोड़कर त्रिपुरा नहीं आना पड़ता। X पर लिखा कि विभाजन का यह दर्दनाक अध्याय हमारे इतिहास का एक गहरा घाव है, जिसने लाखों लोगों को बेघर कर असीम पीड़ा सहने पर मजबूर किया। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि त्रिपुरा में विस्थापन का अनुभव अन्य राज्यों, जैसे असम, की तुलना में अलग और अनूठा रहा है।
राष्ट्रवाद की भावना और युवा पीढ़ी को जागरूक करने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने देश की नई पीढ़ी को विभाजन के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणामों से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अखंडता और देशभक्ति के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता अटूट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे हफ्ते भर के हर घर तिरंगा अभियान का उद्देश्य नागरिकों के भीतर राष्ट्रवाद की भावना को और मजबूत करना है। पारंपरिक रूप से 15 अगस्त का उत्सव स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने तक सीमित रहता था, लेकिन इस व्यापक अभियान के जरिए देश प्रेम के संदेश को हर घर तक पहुंचाया जा रहा है।
विपक्षी दलों की राजनीति पर कड़ा हमला
अपने संबोधन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विपक्षी दल माकपा पर राजनीतिक लाभ के लिए अशांति फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के हालिया बयान की तीखी आलोचना की, जिसमें उन्होंने जनसमस्याएं न सुलझने पर उग्रवादी मानसिकता के साथ आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी थी। साहा ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए जनता को भड़काने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार राज्य में शांति और विकास के माहौल को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।













