देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) से एमबीए करने का सपना हर साल लाखों अभ्यर्थी देखते हैं। अधिकांश उम्मीदवारों के मन में यह धारणा होती है कि कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) में 98 या 99 परसेंटाइल हासिल कर लेने से शीर्ष मैनेजमेंट संस्थानों में सीट पक्की हो जाती है। हालांकि, वास्तविकता इससे काफी अलग है। पिछले कुछ वर्षों में आईआईएम की प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, जिसके तहत अब केवल लिखित परीक्षा का प्राप्तांक ही चयन का अंतिम आधार नहीं रह गया है। कैट 2026 की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए आईआईएम के कंपोजिट स्कोर आधारित चयन तंत्र को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कई बार 98 परसेंटाइल वाले अभ्यर्थी को साक्षात्कार के लिए बुला लिया जाता है जबकि 99.5 परसेंटाइल लाने वाला उम्मीदवार प्रक्रिया से बाहर हो जाता है।
कैट स्कोर का घटता वेटेज और कंपोजिट स्कोर की भूमिका
एक समय था जब कैट परीक्षा के अंक ही आईआईएम में प्रवेश का मुख्य आधार हुआ करते थे, लेकिन अब पुराने और नए सभी आईआईएम ने कैट प्राप्तांक के वजन को सीमित कर दिया है। आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बेंगलुरु और आईआईएम कोलकाता जैसे देश के शीर्ष एमबीए कॉलेजों में अंतिम मेरिट सूची तैयार करते समय कैट स्कोर का वेटेज आमतौर पर 25% से 35% के बीच ही रखा जाता है। शेष 65% से 75% अंक पर्सनल इंटरव्यू (PI), रिटेन एबिलिटी टेस्ट (WAT) और उम्मीदवार के समग्र प्रोफाइल के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि कैट परीक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने के बाद भी यदि उम्मीदवार का प्रोफाइल या साक्षात्कार प्रदर्शन बेहतर नहीं है, तो प्रवेश रुक सकता है।
पास्ट एकेडमिक रिकॉर्ड: 10वीं, 12वीं और स्नातक के अंकों का महत्व
कैट परीक्षा के आवेदन पत्र में 10वीं, 12वीं और स्नातक के अंकों की जानकारी केवल औपचारिकता मात्र नहीं होती। आईआईएम इंदौर और आईआईएम बेंगलुरु जैसे प्रमुख संस्थान उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के दौरान पास्ट एकेडमिक रिकॉर्ड को 30% से 40% तक का भारी वेटेज प्रदान करते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी के स्कूल या स्नातक स्तर पर प्राप्तांक औसत रहे हैं, तो उसे इस कमी की भरपाई करने के लिए कैट परीक्षा में असाधारण रूप से उच्च परसेंटाइल हासिल करना पड़ता है।
अकादमिक और जेंडर डायवर्सिटी का अतिरिक्त लाभ
आईआईएम अब अपने प्रबंधन पाठ्यक्रमों में केवल इंजीनियर्स का वर्चस्व समाप्त कर विविध विषयों के छात्रों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस नीति के तहत अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आने वाले उम्मीदवारों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है
- नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड: आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस, मेडिकल या लॉ स्ट्रीम में अध्ययन करने वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के दौरान 2 से 5 अतिरिक्त अंक (Academic Diversity Points) दिए जाते हैं।
- महिला उम्मीदवार: कक्षाओं में जेंडर अनुपात को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई आईआईएम्स में महिला अभ्यर्थियों को पृथक से डायवर्सिटी पॉइंट्स आवंटित किए जाते हैं।
वर्क एक्सपीरियंस का गणित: 1 से 3 साल के अनुभव के फायदे
यदि किसी उम्मीदवार के पास किसी प्रतिष्ठित संस्थान या कंपनी में 1 से 3 वर्ष का कार्य अनुभव है, तो उसका प्रोफाइल काफी मजबूत माना जाता है। अधिकांश आईआईएम प्रवेश प्रक्रिया में वर्क एक्सपीरियंस के लिए 5 से 10 फीसदी तक बोनस अंक निर्धारित करते हैं। हालांकि, इसमें एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि 3 वर्ष से अधिक का कार्य अनुभव होने पर इस वेटेज में धीरे-धीरे कमी आने लगती है, इसलिए सीमित और गुणवत्तापूर्ण अनुभव ही सर्वाधिक अंक दिलाता है।
पर्सनल इंटरव्यू और राइटिंग टेस्ट का निर्णायक पड़ाव
कैट परीक्षा की बाधा पार करने के बाद अभ्यर्थी को रिटेन एबिलिटी टेस्ट (WAT) और पर्सनल इंटरव्यू (PI) के चरण से गुजरना होता है। अंतिम चयन सूची में इंटरव्यू राउंड का वेटेज अकेले 30% से 50% तक हो सकता है। इस चरण में उम्मीदवार की कम्युनिकेशन स्किल्स, समसामयिक विषयों (करेंट अफेयर्स) की समझ और नेतृत्व क्षमता (लीडरशिप क्वालिटी) का गहन मूल्यांकन किया जाता है। अतः केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय अभ्यर्थियों को अपनी ओवरऑल पर्सनालिटी को संवारने पर ध्यान देना चाहिए।



















