छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामले में न्यायिक हस्तक्षेप देखने को मिला है, जहां एक 19 वर्षीय युवती को कानूनी राहत प्रदान की गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) भूपेश कुमार बसंत की अदालत ने दुष्कर्म की शिकार एक युवती द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे गर्भपात की अनुमति दे दी है। यह फैसला युवती के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। अदालत ने प्रशासन और चिकित्सा विभाग को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गर्भपात की पूरी प्रक्रिया के दौरान भ्रूण को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे और उसे सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में आरोपी के विरुद्ध वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर उसका डीएनए टेस्ट किया जा सके।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्रवाई
यह मामला दुर्ग जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी महेश्वर बांधे ने युवती को प्रेम के जाल में फंसाया और उससे शादी का वादा किया। इन झूठे वादों की आड़ में आरोपी ने युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। जब युवती को अपनी स्थिति और आरोपी की असलियत का पता चला, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत मामला दर्ज कर लिया था।
न्यायालय का रुख और चिकित्सा निर्देश
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, भूपेश कुमार बसंत की अदालत ने केस डायरी, जिला अस्पताल दुर्ग द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। युवती की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सौरभ चौबे ने न्यायालय में आवेदन देकर गर्भपात कराने की मांग की थी। अदालत ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के मानकों के अनुरूप यह आदेश पारित किया है। अदालत ने डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से चिकित्सकीय निगरानी में हो और पीड़िता के स्वास्थ्य पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
न्याय की प्रक्रिया और डीएनए टेस्ट
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आरोपी को कानूनी रूप से घेरने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जुटाना है। अदालत ने भ्रूण को सुरक्षित रखने का जो आदेश दिया है, उसका सीधा उद्देश्य महेश्वर बांधे का डीएनए टेस्ट सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया आरोपी के विरुद्ध दोष सिद्धि के लिए एक निर्णायक साक्ष्य का काम करेगी। पुलिस अब अदालत के इन निर्देशों का पालन करते हुए भ्रूण को सुरक्षित रखने की व्यवस्था कर रही है ताकि आने वाले दिनों में मामले की वैज्ञानिक जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके और आरोपी को सजा दिलाई जा सके।











