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बिहार के अवैध हथियार नेटवर्क पर NIA का बड़ा शिकंजा, 4 दिन के ऑपरेशन के बाद भगोड़ा भैरव त्रिपाठी पकड़ा गयाबिहार
21 अग॰ 2026, 11:12 am (1 घंटे पहले)· 0

बिहार के अवैध हथियार नेटवर्क पर NIA का बड़ा शिकंजा, 4 दिन के ऑपरेशन के बाद भगोड़ा भैरव त्रिपाठी पकड़ा गया

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बिहार पुलिस के साथ मिलकर मुजफ्फरपुर के चर्चित AK-47 राइफल तस्करी मामले में लंबे समय से फरार आरोपी भैरव त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रतिबंधित हथियारों की तस्करी के एक बड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता हासिल हुई है। एनआईए की विशेष टीम ने स्थानीय जिला पुलिस के साथ एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत संजय सिनेमा रोड से वांछित आरोपी भैरव त्रिपाठी उर्फ मास्टर उर्फ गुरु को दबोच लिया। आरोपी की धरपकड़ के लिए एनआईए की टीम पिछले चार दिनों से मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही थी। मामले में आरोपी की गतिविधि की सटीक सूचना मिलने के बाद मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा ने जिला पुलिस अधिकारियों को तुरंत सक्रिय किया। इसके बाद साहेबगंज क्षेत्र में विशेष घेराबंदी की गई, जहां से पता चला कि आरोपी भैरव त्रिपाठी साहेबगंज के अहियापुर का मूल निवासी है और लगातार अपनी पहचान छिपाकर ठिकाने बदल रहा था। पुलिस की गुप्त सूचना पर की गई इस कार्रवाई के बाद इस संवेदनशील AK-47 मामले में गिरफ्तार किए जाने वाले आरोपियों की कुल संख्या अब छह हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय हथियार नेटवर्क और नागालैंड से बिहार तक का कनेक्शन

राष्ट्रीय जांच एजेंसी का यह मामला दिल्ली शाखा में दर्ज केस संख्या RC-11/2024/NIA/DLI से संबंधित है, जो प्रतिबंधित बोर की AK-47 राइफलों और भारी मात्रा में जिंदा कारतूसों की अवैध बरामदगी से जुड़ा हुआ है। एनआईए की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी भैरव त्रिपाठी ने अपने अन्य आपराधिक सहयोगियों के साथ मिलकर नागालैंड से बिहार तक अत्याधुनिक हथियारों की अवैध सप्लाई का एक खतरनाक जाल बिछाया था। इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य इलाके की सार्वजनिक शांति व्यवस्था को भंग करना और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौती पैदा करना था। एनआईए और जिला पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, भैरव त्रिपाठी एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में हत्या, आर्म्स एक्ट तथा रंगदारी सहित आठ से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। एनआईए को 2024 से ही उसकी तलाश थी, लेकिन वह लगातार पुलिस की पकड़ से बचने के लिए अपने ठिकाने बदल रहा था।

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2024 में मुर्गटिया पुल के पास से बरामदगी और शुरुआती जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत 7 मई 2024 को हुई थी, जब मुजफ्फरपुर जिले के फकुली थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मुर्गटिया पुल के समीप छापेमारी कर एक एके-47 राइफल लेंस तथा भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए थे। इस संबंध में फकुली थाने में कांड संख्या 19/2024 दर्ज किया गया था। शुरुआती पुलिस कार्रवाई के दौरान चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी विकास और सत्यम ने खुलासा किया कि वे नागालैंड के दीमापुर से अवैध हथियारों की खेप लाकर बिहार के अलग-अलग जिलों में बेचते थे। जांच में यह तथ्य सामने आया कि पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन का रहने वाला अहमद अंसारी दीमापुर में रहकर एके-47 और अन्य विदेशी हथियारों की मुख्य सप्लाई संभालता था। आरोपियों ने फकुली थाना क्षेत्र के मनकौली निवासी स्थानीय मुखिया के बेटे देवमणि कुमार को भी एक एके-47 राइफल बेची थी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देवमणि कुमार को गिरफ्तार किया था और उसकी निशानदेही पर एक एके-47 राइफल, राइफल मैगजीन तथा पांच जिंदा कारतूस बरामद किए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 अगस्त 2024 को एनआईए ने इस केस को पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया था।

NIA द्वारा दाखिल चार्जशीटों की पूरी समयरेखा

मामले में गहन जांच पड़ताल पूरी करने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालती कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए चरणबद्ध तरीके से चार्जशीट दाखिल की हैं। एनआईए ने पहली चार्जशीट 8 मई 2025 को चार मुख्य आरोपियों विकास कुमार, सत्यम कुमार, देवमणि राय और अहमद अंसारी के खिलाफ अदालत में पेश की थी। इन सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B तथा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 13 और 18 के तहत आरोप तय किए गए थे। इसके बाद मामले में आगे की कड़ियों को जोड़ते हुए एनआईए ने 20 फरवरी 2026 को आरोपी मंजूर खान के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमें IPC की धारा 120B, आर्म्स एक्ट की धारा 25(1AA), 26 और 35 के साथ-साथ यूएपीए एक्ट की धारा 13 और 18 लगाई गई थीं। वहीं 15 अप्रैल 2026 को जांच एजेंसी ने आरोपी कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की, जिस पर भी आईपीसी, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की इन्हीं कठोर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

आगे की कार्रवाई और आपराधिक तंत्र पर कसता शिकंजा

लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल भैरव त्रिपाठी की इस गिरफ्तारी के बाद एनआईए और मुजफ्फरपुर पुलिस की संयुक्त टीम उससे सघन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां अब भैरव त्रिपाठी के माध्यम से इस पूरे आपराधिक सिंडिकेट के अन्य छुपे हुए मददगारों, वित्तीय लेन-देन और हथियारों की आपूर्ति की बची हुई कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान नागालैंड से बिहार तक फैले इस हथियार गिरोह के कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

सवाल-जवाब

मुजफ्फरपुर AK-47 केस में हाल ही में किसकी गिरफ्तारी हुई है?
इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी भैरव त्रिपाठी उर्फ मास्टर उर्फ गुरु को एनआईए और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा से गिरफ्तार किया है।
भैरव त्रिपाठी पर कुल कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं?
भैरव त्रिपाठी के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और अन्य संगीन अपराधों के तहत आठ से अधिक मामले दर्ज हैं।
यह हथियार तस्करी नेटवर्क कहां से कहां तक फैला हुआ था?
एनआईए की जांच के अनुसार, यह गिरोह नागालैंड के दीमापुर से प्रतिबंधित बोर के अत्याधुनिक हथियार और AK-47 राइफले लाकर बिहार में बेचता था।
इस मामले में अब तक कितने लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है?
भैरव त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या छह हो गई है।
एनआईए ने इस केस में अब तक कितनी चार्जशीट दाखिल की हैं?
एनआईए ने इस मामले में 8 मई 2025, 20 फरवरी 2026 और 15 अप्रैल 2026 को कुल तीन चार्जशीट दाखिल की हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·59 मिनट पहले

यह मामला साफ तौर पर पूर्वोत्तर से उत्तर भारत के बीच सक्रिय संगठित हथियार सिंडिकेट की गहराई को उजागर करता है। नागालैंड के दीमापुर से मुजफ्फरपुर और बिहार के अन्य जिलों तक हथियारों की यह तस्करी सिर्फ स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। एनआईए द्वारा इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेक्सस के तार खंगालने से आने वाले दिनों में कई और सफेदपोशों या बड़े तस्करों के बेनकाब होने की पूरी संभावना है, खासकर जब मामले में अब तक छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 मिनट पहले

इस मामले में नागालैंड के दीमापुर से बिहार तक हथियारों की खेپ पहुंचने का यह मार्ग पूर्वोत्तर के उग्रवादी या संगठित तस्कर समूहों के साथ स्थानीय अपराधियों के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब करता है। अब तक हुई छह गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट है कि इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी हैं। एनआईए की इस कार्रवाई से हथियारों की अवैध सप्लाई चेन के वित्तीय स्रोतों और उन लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर शिकंजा कसेगा, जिनके सहारे देश की आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक शांति को लगातार चुनौती दी जा रही थी।

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