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ताइवान को हथियार देने पर शी जिनपिंग की सख्त चेतावनी, डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस बैठक रद्द होने का खतराचीन
13 सित॰ 2026, 9:36 pm (46 दिन पहले)· 3

ताइवान को हथियार देने पर शी जिनपिंग की सख्त चेतावनी, डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस बैठक रद्द होने का खतरा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ताइवान के साथ नए हथियार सौदे को मंजूरी दी, तो आगामी २४ सितंबर को व्हाइट हाउस में होने वाली द्विपक्षीय बैठक रद्द हो सकती है।

१८वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी भारत यात्रा समाप्त करते ही अमेरिका को एक बड़ा राजनयिक अल्टीमेटम दे दिया है। बीजिंग ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ताइवान को हथियारों की नई खेप सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो आगामी २४ सितंबर को व्हाइट हाउस में होने वाली ट्रंप और जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात को रद्द किया जा सकता है।

वॉशिंगटन के सामने खड़ी हुई बड़ी दुविधा

इस सख्त रुख के साथ शी जिनपिंग ने अमेरिकी प्रशासन के सामने एक बेहद कठिन स्थिति पैदा कर दी है। अब डोनाल्ड ट्रंप को यह तय करना होगा कि वे ताइवान को सैन्य सहायता प्रदान करना जारी रखेंगे या फिर बीजिंग के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण वार्ता को बचाएंगे। हालांकि, हथियारों के सौदे या बैठक रद्द होने की इस चेतावनी को लेकर अभी तक चीन अथवा अमेरिका की ओर से कोई भी आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनयिक गलियारों में यह संकेत स्पष्ट रूप से दे दिया गया है कि ताइवान का मुद्दा चीन के लिए एक 'रेड लाइन' है जिसे पार नहीं किया जा सकता।

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व्हाइट हाउस में २४ सितंबर को प्रस्तावित यह मुलाकात दोनों शीर्ष नेताओं के बीच एक वर्ष के भीतर तीसरी बैठक होने वाली थी। परंतु, ताइवान की संप्रभुता से जुड़े इस पुराने विवाद ने इस संभावित शिखर वार्ता पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।

ताइवान विवाद और चीन की संप्रभुता

चीन लगातार ताइवान को अपने देश का एक अभिन्न अंग मानता आया है और उसने हमेशा से ही इसके मुख्य भूमि में विलय की वकालत की है। बीजिंग ने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह ताइवान पर नियंत्रण पाने के लिए सैन्य बल के प्रयोग से भी पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर, अमेरिका लंबे समय से ताइवान का सबसे प्रमुख सैन्य और राजनीतिक सहयोगी बना हुआ है और उसे रक्षात्मक हथियारों की आपूर्ति करता रहा है। चीन इस तरह की सैन्य सहायता को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए सीधे खतरे के रूप में देखता है।

बीजिंग की पुरानी और सख्त चेतावनी

शी जिनपिंग का ताइवान को लेकर यह कड़ा रुख कोई नया नहीं है। इससे पहले, मई महीने में बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप के साथ आयोजित एक बैठक के दौरान भी जिनपिंग ने स्पष्ट कर दिया था कि दोनों देशों के आपसी संबंधों में ताइवान का मुद्दा सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को चेतावनी दी थी कि यदि इस मामले को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा सैन्य टकराव हो सकता है।

नई दिल्ली यात्रा के ठीक बाद बदला भू-राजनीतिक माहौल

यह बड़ी कूटनीतिक हलचल शी जिनपिंग के नई दिल्ली से रवाना होने के तुरंत बाद शुरू हुई है। चीनी राष्ट्रपति ने भारत की राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी। सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा था, जिसे वैश्विक मंच पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। परंतु, भारत से प्रस्थान करते ही उनका ध्यान पूरी तरह से ताइवान और अमेरिका के साथ जारी तनातनी पर केंद्रित हो गया है।

सवाल-जवाब

शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को क्या धमकी दी है?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ताइवान को नए हथियारों की आपूर्ति को मंजूरी दी, तो २४ सितंबर को होने वाली व्हाइट हाउस बैठक रद्द हो सकती है।
ट्रंप और जिनपिंग की बैठक कब और कहां प्रस्तावित है?
यह महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक २४ सितंबर को वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में होना प्रस्तावित है।
ताइवान को लेकर चीन का क्या रुख है?
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसने इसके पूर्ण विलय के लिए जरूरत पड़ने पर सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
इस चेतावनी से ठीक पहले शी जिनपिंग कहां के दौरे पर थे?
इस चेतावनी से ठीक पहले शी जिनपिंग नई दिल्ली में थे, जहां उन्होंने १८वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
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