जब किसी टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ता है, तो बड़े और कड़े फैसले लेना जरूरी हो जाता है. ऐसा ही कुछ पाकिस्तान क्रिकेट टीम में भी देखने को मिला जब इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के शुरुआती दो मैचों में मिली शर्मनाक पराजय के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया. बोर्ड ने साहसिक फैसला लेते हुए पूरे टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ में भारी उलटफेर कर दिया. इस बड़े बदलाव के बाद जब टीम एजबेस्टन, बर्मिंघम में सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच के लिए मैदान पर उतरी, तो पाकिस्तान ने 21 साल के युवा तेज गेंदबाज रजाउल्लाह को अपने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर का पहला मैच खेलने का अवसर दिया. उस वक्त शायद ही किसी ने यह सोचा होगा कि यह युवा खिलाड़ी गेंद से ज्यादा अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख देगा.
इस रोमांचक मुकाबले की दूसरी पारी में जब रजाउल्लाह क्रीज पर बल्लेबाजी करने के लिए उतरे, तब पाकिस्तान की टीम बेहद नाजुक स्थिति में संघर्ष कर रही थी. पहली पारी के आधार पर पाकिस्तान की टीम इंग्लैंड की मजबूत बढ़त से पूरे 320 रन पीछे चल रही थी. दूसरी पारी में टीम को एक मजबूत और जुझारू प्रदर्शन की दरकार थी. संकट की इस घड़ी में अजान ओवैस, शान मसूद और स्टार बल्लेबाज बाबर आजम ने सूझबूझ से बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतकीय पारियां खेलीं और टीम को संभालने का पूरा प्रयास किया. लेकिन इन प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान का मध्यक्रम बिखर गया और टीम ने केवल 312 रनों के कुल स्कोर पर अपने 7 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे. पाकिस्तान की टीम अभी भी इंग्लैंड की पहली पारी की बढ़त को पार करने में असफल रही थी और उस पर पारी से हारने का एक बड़ा खतरा मंडरा रहा था.
मुश्किल परिस्थितियों में रजाउल्लाह का आक्रामक जवाबी हमला
ऐसी विकट और भारी दबाव वाली परिस्थितियों में अमूमन निचले क्रम के बल्लेबाज रक्षात्मक शैली अपनाते हैं ताकि वे कुछ समय तक क्रीज पर टिक सकें. लेकिन युवा रजाउल्लाह के इरादे कुछ अलग ही थे. उन्होंने क्रीज पर आते ही इंग्लैंड के गेंदबाजों के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और निडर रणनीति अपनाई. उन्होंने इंग्लिश गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया और मैदान के हर कोने में बड़े शॉट्स खेलने शुरू कर दिए. रजाउल्लाह ने केवल 63 गेंदों का सामना किया और विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 81 रनों की एक ऐतिहासिक पारी खेल डाली. इस बेमिसाल पारी के दौरान उनके बल्ले से 4 शानदार चौके और 9 गगनचुंबी छक्के निकले, जिसने मैदान पर मौजूद सभी दर्शकों को अचंभित कर दिया. नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए रजाउल्लाह का स्ट्राइक रेट 128.57 का रहा, जिसने इंग्लैंड के मुख्य गेंदबाजों की लाइन और लेंथ को पूरी तरह से बिगाड़ दिया.
रजाउल्लाह की इस आक्रामक और साहसिक बल्लेबाजी को दूसरे छोर पर खड़े पुछल्ले बल्लेबाज मोहम्मद अब्बास का भी बेहतरीन सहयोग मिला. इन दोनों खिलाड़ियों ने मिलकर इंग्लैंड के गेंदबाजों के हौसले पस्त कर दिए और लगभग हर गेंद पर रन बनाते हुए 121 रनों की एक बेहद महत्वपूर्ण और तेजतर्रार साझेदारी निभाई. इस साझेदारी ने न केवल पाकिस्तान को संकट से बाहर निकाला बल्कि मैच में उनकी स्थिति को भी मजबूत किया. यह ऐतिहासिक पारी आखिरकार 97वें ओवर में समाप्त हुई जब रजाउल्लाह इंग्लैंड के ऑफ स्पिनर डैन लॉरेंस की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में स्टंप आउट हो गए. लेकिन पवेलियन वापस लौटने से पहले वह अपना काम पूरी तरह से कर चुके थे और पाकिस्तान को 130 रनों की एक बेहद निर्णायक बढ़त दिला चुके थे.
टिम साउदी के 18 साल पुराने ऐतिहासिक कीर्तिमान की बराबरी
अपनी इस अद्भुत और आक्रामक पारी के दम पर रजाउल्लाह ने टेस्ट क्रिकेट के कई पुराने रिकॉर्ड्स को नेस्तनाबूद कर दिया. अपने पहले ही टेस्ट मैच में सबसे अधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की वैश्विक सूची में अब वह दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बन गए हैं. इस मामले में उन्होंने न्यूजीलैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज टिम साउदी के 18 साल पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. टिम साउदी ने साल 2008 में नेपियर के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ ही अपने पहले टेस्ट मैच में बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 77 रनों की पारी खेली थी और उस दौरान 9 शानदार छक्के जड़े थे. पिछले करीब 18 वर्षों से साउदी इस अनोखे रिकॉर्ड के शिखर पर अकेले काबिज थे, लेकिन अब रजाउल्लाह ने अपने शानदार प्रदर्शन से उनके इस शीर्ष स्थान को साझा कर लिया है.
टेस्ट पदार्पण पर छक्के उड़ाने वाले दिग्गज खिलाड़ियों की सूची
यदि हम टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपने पहले ही मैच में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले दुनिया के अन्य बल्लेबाजों पर नजर डालें, तो इसमें वेस्टइंडीज के आक्रामक बल्लेबाज काईल मेयर्स तीसरे स्थान पर आते हैं. काईल मेयर्स ने साल 2021 में बांग्लादेश के खिलाफ खेलते हुए 210 रनों की अपनी ऐतिहासिक और यादगार पारी के दौरान कुल 7 छक्के लगाए थे. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क का नाम आता है, जिन्होंने साल 2004 में भारत के खिलाफ बेंगलुरु में 151 रनों की अपनी शानदार पारी के दौरान 4 छक्के जड़े थे. माइकल क्लार्क के साथ ही कुछ अन्य खिलाड़ियों ने भी अपने पहले टेस्ट मैच में 4-4 छक्के लगाने का कारनामा किया है, जिनमें अफगानिस्तान के इब्राहिम जादरान, न्यूजीलैंड के काईल जेमिसन, और दक्षिण अफ्रीका के दो खिलाड़ी लुइगी प्रिटोरियस एवं डेवाल्ड ब्रेविस शामिल हैं. इसके अलावा न्यूजीलैंड के ब्रेंडन टेलर ने साल 1965 में, वेस्टइंडीज के गॉर्डन ग्रीनिच ने साल 1974 में और दक्षिण अफ्रीका के जेंडर डी ब्रुइन ने साल 2004 में अपने डेब्यू टेस्ट में 3-3 छक्के लगाने की सफलता हासिल की थी.
नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए बनाया सबसे बड़ा स्कोर
रजाउल्लाह का यह ऐतिहासिक धमाका केवल छक्के लगाने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए अपने पदार्पण मैच में सबसे अधिक रन बनाने का एक नया सर्वकालिक विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है. उन्होंने इस विशेष सूची में दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी कॉर्बिन बॉश के 81 रनों के पुराने रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. कॉर्बिन बॉश ने साल 2024 में सेंचुरियन के मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ ही बल्लेबाजी करते हुए 93 गेंदों का सामना किया था और 15 चौकों की मदद से नाबाद 81 रनों की एक बेहतरीन पारी खेली थी. हालांकि रजाउल्लाह ने भी अपनी पारी में ठीक 81 रन बनाए, लेकिन उन्होंने इस स्कोर तक पहुंचने के लिए बेहद कम गेंदों का सहारा लिया और उनका स्ट्राइक रेट कॉर्बिन बॉश की तुलना में काफी अधिक तेज रहा, जो उनकी आक्रामक शैली को दर्शाता है.
क्रिकेट के दिग्गजों की ऐतिहासिक सूची में रजाउल्लाह की एंट्री
रजाउल्लाह के इस बेहतरीन प्रदर्शन के बाद श्रीलंका के खिलाड़ी रमेश मेंडिस रतनायके अब इस सूची में तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं. रमेश मेंडिस रतनायके ने साल 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के मैदान पर खेलते हुए 72 रनों की एक जुझारू पारी खेली थी. भारत के पूर्व क्रिकेटर बलविंदर संधू इस रिकॉर्ड सूची में चौथे स्थान पर काबिज हैं. बलविंदर संधू ने साल 1983 में हैदराबाद (सिंध) के मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए 71 रनों की एक बेहद महत्वपूर्ण और संघर्षपूर्ण पारी खेली थी. इस सूची में कुछ अन्य प्रमुख नाम भी शामिल हैं जिन्होंने नौवें नंबर पर अपने डेब्यू मैच में अर्धशतक लगाने का गौरव प्राप्त किया है. इनमें इंग्लैंड के डेवोन गॉफ शामिल हैं जिन्होंने साल 1994 में 65 रन बनाए थे. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के मखाया जोन्डेकी ने साल 2003 में 59 रनों की पारी खेली थी. वेस्टइंडीज के विंस्टन फर्ग्यूसन ने साल 1948 में नाबाद 56 रन बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया के टॉमी मैथ्यूज ने साल 1912 में 53 रनों का योगदान दिया था. दक्षिण अफ्रीका के चार्ल्स विंसेंट ने साल 1927 में 53 रन बनाए थे और इंग्लैंड के जॉन लीवर ने साल 1976 में 53 रनों की अर्धशतकीय पारी खेलकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया था. रजाउल्लाह की इस धमाकेदार पारी ने आज इन सभी दिग्गजों के रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए क्रिकेट जगत में एक नया तहलका मचा दिया है.


















