भारतीय घरेलू क्रिकेट में खेलने की राह देख रहीं अनाया बांगर को ऑस्ट्रेलिया में मैदान पर उतरने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट और तमाम रिसर्च दस्तावेजों की गहन समीक्षा के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से वहां महिला कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद अनाया ने अपनी इस नई शुरुआत को लेकर बेहद खुशी जताई है और इसे अपने खेल करियर का एक अहम मोड़ बताया है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिला दूसरा मौका
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद अनाया ने कहा कि एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्हें लगा था कि शायद वह अब कभी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी। लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया द्वारा उठाए गए इस कदम ने उन्हें एक नया जीवनदान दिया है। इस फैसले के जरिए उन्हें उस खेल में दोबारा वापसी करने का मौका मिल गया है, जिससे उनका जुड़ाव बचपन के दिनों से रहा है। अब वह ऑस्ट्रेलिया में कम्युनिटी क्रिकेट के जरिए अपनी खोई हुई लय हासिल करने और आगे बढ़ने की तैयारी में जुट गई हैं।
भारत में बीसीसीआई का रुख अब तक स्पष्ट नहीं
एक तरफ जहां ऑस्ट्रेलिया में अनाया के लिए रास्ते खुल गए हैं, वहीं भारत में उनके महिला क्रिकेट खेलने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने अभी तक ट्रांसजेंडर महिलाओं के घरेलू क्रिकेट में भाग लेने को लेकर कोई स्पष्ट या औपचारिक नीति नहीं बनाई है। अनाया के अनुसार, उन्होंने इस सिलसिले में बीसीसीआई को ई-मेल के जरिए संपर्क भी किया था, लेकिन उनकी तरफ से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने साल 2023 में एक नियम लागू किया था, जिसके तहत पुरुष यौवन से गुजर चुकी ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को एलीट महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों में खेलने से प्रतिबंधित किया गया है।
मुंबई से जुड़ा है क्रिकेट का पुराना सफर
अनाया का क्रिकेट के साथ पुराना और गहरा नाता रहा है। मुंबई में जन्मी और पली-बढ़ी अनाया ने अपने शुरुआती दौर में अंडर-19 स्तर पर मुंबई की टीम का प्रतिनिधित्व किया था। इस दौरान उन्होंने घरेलू सर्किट में सरफराज खान और उनके भाई मुशीर खान जैसे कई जाने-माने खिलाड़ियों के साथ मैदान साझा किया था। इसके अलावा उनके परिवार की पृष्ठभूमि भी पूरी तरह क्रिकेट से जुड़ी रही है। उनके पिता संजय बांगर ने अपने करियर में भारत के लिए 12 टेस्ट और 15 एकदिवसीय मैच खेले हैं, और खेल से संन्यास लेने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय पुरुष टीम के बल्लेबाजी कोच की भूमिका भी निभा चुके हैं।
महिला बिग बैश लीग पर टिकी हैं निगाहें
कम्युनिटी क्रिकेट में वापसी के बाद अनाया की नजरें अब ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित महिला बिग बैश लीग यानी WBBL पर भी टिकी हुई हैं। हालांकि इस स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें पहले एलीट क्रिकेट की पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा और घरेलू मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाना होगा। अनाया को पूरा विश्वास है कि यदि वह मैदान पर निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रहती हैं, तो आने वाले समय में उन्हें महिला बिग बैश लीग में खेलने का अवसर जरूर मिलेगा। यह सफर केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी मिसाल बन सकता है जो समान परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।



















