साउथ कैरोलिना के एक प्रतिष्ठित देखभाल केंद्र में एक ऐसा वीभत्स वाकया सामने आया है जिसने चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बुजुर्ग महिला रात के अंधेरे में अपनी लाचारी की वजह से मौत के मुंह में समा गईं, जहां उन्हें हजारों की संख्या में लाल चींटियों ने अपना निशाना बनाया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मृतका के परिजनों ने संबंधित संस्थान के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है और गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
खुला रह गया दरवाजा और अनजाने में बाहर निकल गईं बुजुर्ग
चार्ल्स्टन स्थित 'हार्मनी एट वेस्ट एशले' नामक नर्सिंग होम में 83 वर्षीय शेल्बा कैटरटन रह रही थीं। वह गंभीर डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जूझ रही थीं, जिसके कारण उनकी संवाद करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। घटना 23 जुलाई की रात की है जब रात करीब 10 बजे के बाद एक कर्मचारी की बड़ी लापरवाही के कारण नर्सिंग होम का मुख्य दरवाजा खुला रह गया था। अपनी बीमारी के चलते शेल्बा अनजाने में उस खुले दरवाजे से बाहर निकलकर सुरक्षित प्रांगण की ओर चली गईं। बाहर जमीन पर लाल चींटियों का एक बड़ा टीला मौजूद था, और अपनी शारीरिक असमर्थता के कारण वह वहीं गिर गईं और खुद को बचा पाने में पूरी तरह असफल रहीं।
हजारों डंक और दर्द से बेसुध महिला
रात के सन्नाटे में कई घंटों तक शेल्बा उसी चींटियों के टीले पर पड़ी रहीं, जबकि खतरनाक लाल चींटियों के झुंड ने उनके पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लिया। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, चींटियों ने उनके चेहरे, सिर की त्वचा, आंखों, पीठ, छाती के साथ-साथ दोनों हाथों और पैरों पर एक हजार से भी अधिक बार डंक मारा। एडवांस डिमेंशिया की अवस्था में होने के कारण वह न तो दर्द से चिल्ला सकती थीं और न ही अपने हाथों से उन कीटों को हटा सकती थीं। काफी समय बीत जाने के बाद जब नर्सिंग होम के एक कर्मचारी की नजर उन पर पड़ी, तो उनका पूरा शरीर चींटियों की चादर से ढका हुआ था।
अधिकारियों की घबराहट और आपातकालीन कॉल
कर्मचारी ने जब बुजुर्ग महिला की इस डरावनी स्थिति को देखा, तो उसने तुरंत आपातकालीन नंबर 911 पर संपर्क किया। डिस्पैच सेवा को दी गई कॉल के दौरान कर्मचारी की आवाज में साफ खौफ नजर आ रहा था। उसने फोन पर अधिकारियों को बताया कि महिला का शरीर चींटियों से पटा हुआ है और उनके चेहरे तथा पीठ पर बड़े-बड़े चकत्ते उभर आए हैं। पुलिस इस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है और प्रारंभिक जांच में भी कर्मचारियों की चूक सामने आई है जिसके कारण दरवाजा खुला रह गया था।
अस्पताल में अंतिम सांस और परिवार का रोष
तत्काल प्रभाव से शेल्बा को एक चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने पाया कि चींटियों के जहर के अलावा लंबी अवधि तक खुले आसमान के नीचे रहने की वजह से उन्हें हाइपोथर्मिया और निमोनिया भी जकड़ चुका था। डॉक्टरों ने उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में रखकर बचाने के तमाम प्रयास किए, लेकिन शरीर में फैला जहर और अन्य संक्रमण इतने गंभीर थे कि उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद मृतका के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उन्होंने संस्था पर बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। परिवार के कानूनी प्रतिनिधि बेट हुगी ने बताया कि उन्होंने अपने लंबे करियर में ऐसी भयावह घटना कभी नहीं देखी। वहीं, मृतका की बेटी जान बिस ने इस गहरे सदमे को बयां करते हुए कहा कि किसी भी इंसान को ऐसा भयानक दौर नहीं देखना चाहिए।
चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में लाल चींटियों का काटना घातक नहीं होता, लेकिन अत्यधिक बुजुर्गों या शिशुओं के मामले में यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। जब किसी कमजोर शरीर पर एक साथ हजारों चींटियां हमला कर देती हैं, तो शरीर में जहर की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप श्वसन तंत्र में रुकावट, गंभीर एलर्जी या एनाफिलेक्टिक शॉक जैसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं।





















