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नागालैंड पुलिस का नया कदम, ऑनलाइन शिकायत और स्टेटस ट्रैक करने के लिए जल्द आएगा सिंगल-विंडो पोर्टलनागालैंड
25 अग॰ 2026, 10:10 pm (1 घंटे पहले)· 2

नागालैंड पुलिस का नया कदम, ऑनलाइन शिकायत और स्टेटस ट्रैक करने के लिए जल्द आएगा सिंगल-विंडो पोर्टल

नागालैंड पुलिस अगले 10 से 12 दिनों में एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है, जिसकी मदद से लोग घर बैठे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे और उनके स्टेटस की लाइव ट्रैकिंग कर सकेंगे।

नागालैंड के नागरिकों के लिए पुलिस से संपर्क साधना और अपनी शिकायतों का निवारण पाना अब और अधिक आसान होने जा रहा है। राज्य पुलिस बल आगामी 10 से 12 दिनों के भीतर एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की पूरी तैयारी कर रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए नागालैंड पुलिस के डीजीपी रूपिन शर्मा ने मंगलवार को बताया कि इस डिजिटल व्यवस्था के शुरू हो जाने से आम जनता को थाने के चक्कर काटने से राहत मिलेगी और वे घर बैठे ही अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। इतना ही नहीं, यह पोर्टल शिकायतकर्ताओं को उनकी शिकायतों की वर्तमान स्थिति पर नजर रखने और पुलिस जांच रिपोर्ट की डिजिटल प्रतियां डाउनलोड करने की भी सुविधा प्रदान करेगा।

पारदर्शी जांच और मामलों का वर्गीकरण

कोहिमा में आयोजित महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा को रोकने से संबंधित एक राज्य स्तरीय अभिसरण बैठक को संबोधित करते हुए रूपिन शर्मा ने इस आगामी प्रणाली की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से नागरिक ऐसी शिकायतें भी दर्ज करा सकेंगे, जिनकी शुरुआती जांच के बाद यह तय हो कि मामला आपराधिक की बजाय दीवानी प्रकृति का है। किसी भी थाने में जैसे ही कोई शिकायत प्राप्त होगी, संबंधित थाने के प्रभारी अधिकारी द्वारा उसे प्रारंभिक जांच के वास्ते एक जांच अधिकारी को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद जांच अधिकारी यह आंकेगा कि शिकायत किसी संज्ञेय अपराध, असंज्ञेय अपराध या फिर पूरी तरह से किसी दीवानी विवाद से जुड़ी है या नहीं।

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नए कानूनों के तहत रिपोर्ट डाउनलोड करने की सुविधा

यदि प्रारंभिक जांच में कोई संज्ञेय अपराध बनता है, तो संबंधित पुलिस थाने के लिए प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य होगा। वहीं, असंज्ञेय मामलों के संदर्भ में शिकायतकर्ताओं को मजिस्ट्रेट के पास जाने की सलाह दी जा सकती है, जबकि पूरी तरह से दीवानी मामलों को पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा जाएगा। नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों का पालन करते हुए यह पोर्टल उपयोगकर्ताओं को पुलिस जांच रिपोर्ट डाउनलोड करने की अनुमति देगा। इसके अलावा, थाने के स्तर से लेकर डीजीपी स्तर तक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस डिजिटल प्रणाली के जरिए शिकायतों और उनके निपटान की प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख सकेंगे।

घरेलू हिंसा और बाल शोषण पर कड़ी निगरानी

डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि यह तकनीक पुलिस को बाल शोषण, घरेलू हिंसा, पीछा करने और इसी तरह के अन्य अपराधों से जुड़ी बार-बार मिलने वाली शिकायतों में एक स्पष्ट पैटर्न पहचानने में मदद करेगी। इससे पुलिस को समय रहते हस्तक्षेप करने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थिति के गंभीर होने से पहले ही उचित कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या हिंसा का सामना करना पड़ता है, उन्हें सहायता मांगने के लिए सुलभ माध्यमों की आवश्यकता होती है और उन्होंने पीड़ितों से खुलकर आगे आने की अपील की।

मौजूदा कमियों को दूर करने और रिपोर्टिंग बढ़ाने पर जोर

उन्होंने मौजूदा सरकारी तंत्रों के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों को भी खुलकर स्वीकार किया। उनका कहना था कि हालांकि कई एजेंसियों के पास अपने मैकेनिज्म मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए अक्सर उनके पास पर्याप्त क्षमता का अभाव होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कम रिपोर्टिंग होने के कारण अधिकारियों के लिए समस्या के वास्तविक पैमाने का आकलन करना और उसके अनुसार मानव संसाधन, आश्रय गृह, वाहन और हेल्पलाइन जैसी बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने दोहराया कि केवल आपराधिक तत्व की मौजूदगी ही पुलिस को हस्तक्षेप करने का अधिकार देती है, जबकि विशुद्ध रूप से दीवानी मामलों में पुलिस दखل नहीं दे सकती है।

कानून हाथ में न लेने की सख्त चेतावनी

अपने संबोधन के अंत में, रूपिन शर्मा ने गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज के संगठनों और आम जनता को कड़ी चेतावनी दी कि वे कानून को अपने हाथों में न लें, विशेष तौर पर उन मामलों में जो संज्ञेय अपराधों से जुड़े होते हैं। नागालैंड पुलिस द्वारा हाल ही में आपातकालीन नंबर 100 को बंद कर केवल 112 को ही एकमात्र आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर बनाए जाने जैसे अन्य कदमों के साथ यह नया पोर्टल जुड़ने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन सभी डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों से राज्य में कानून व्यवस्था और जन शिकायतों के निवारण तंत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

सवाल-जवाब

नागालैंड पुलिस का नया सिंगल-विंडो पोर्टल कब शुरू होगा?
यह नया ऑनलाइन पोर्टल अगले 10 से 12 दिनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक क्या कर सकेंगे?
नागरिक इसके जरिए अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे, मामलों के स्टेटस की निगरानी कर सकेंगे और पुलिस जांच रिपोर्ट डाउनलोड कर सकेंगे।
इस नई प्रणाली की घोषणा किसने की?
इस पोर्टल की घोषणा नागालैंड के पुलिस महानिदेशक रूपिन शर्मा ने कोहिमा में की।
क्या पुलिस पूरी तरह से दीवानी मामलों में हस्तक्षेप कर सकती है?
नहीं, विशुद्ध रूप से दीवानी मामले पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहते हैं और केवल आपराधिक तत्व की मौजूदगी पर ही पुलिस हस्तक्षेप कर सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

यह डिजिटल पहल कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम है। नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों के तहत प्रारंभिक जांच और रिपोर्ट डाउनलोड करने की सुविधा मिलने से पुलिस जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि थानों के अधिकारी कितनी तेजी से शिकायतों का वर्गीकरण करते हैं और तकनीकी रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इसका कितना लाभ उठा पाते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·45 मिनट पहले

यह तकनीकी एकीकरण भारत के प्रशासनिक सुधारों की उस बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है, जहाँ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर शासन को पारदर्शी बना रहा है। दीवानी और आपराधिक मामलों का स्पष्ट वर्गीकरण तथा थाने से लेकर डीजीपी स्तर तक की निगरानी यह सुनिश्चित करती है कि कॉर्पोरेट और सार्वजनिक स्तर पर गवर्नेंस मानकों में सुधार हो। यदि ग्रामीण स्तर पर कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता की बाधाएं दूर होती हैं, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी ई-ग गवर्नेंस का एक प्रभावी बेंचमार्क बन सकता है।

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