क्रिकेट के खेल में जब एक तेज गेंदबाज अपनी पूरी ताकत के साथ दौड़ता हुआ गेंदबाजी क्रीज की तरफ बढ़ता है, तो सामने खड़े बल्लेबाज के लिए स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है। आम तौर पर 140 या 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आती हुई चमड़े की सख्त गेंद किसी तोप के गोले की तरह महसूस होती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लंबे सफर में कुछ ऐसे मौके भी आए जब गेंदबाजों ने रफ्तार के तय पैमानों को तोड़ते हुए इतिहास रच दिया। 160 किलोमीटर प्रति घंटे का आंकड़ा छूना किसी भी गेंदबाज के लिए एक सपना माना जाता है, लेकिन दुनिया के पांच खास गेंदबाजों ने इस नामुमकिन सी दिखने वाली सीमा को पार कर दिखाया।
शोएब अख्तर और 161.3 किमी प्रति घंटे का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
दक्षिण अफ्रीका की धरती पर साल 2003 के विश्व कप के दौरान पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच एक बेहद रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा था। पूरे मैदान में मौजूद दर्शकों के बीच एक खास तरह की उत्सुकता थी, क्योंकि पाकिस्तान के प्रमुख तेज गेंदबाज शोएब अख्तर गेंदबाजी के लिए तैयार हो रहे थे। 'रावलपिंडी एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर शोएब अख्तर जब अपने पारंपरिक लंबे रन-अप के साथ दौड़ना शुरू करते थे, तो मैदान पर सन्नाटा पसर जाता था। उस मुकाबले में शोएब अख्तर ने अपनी पूरी क्षमता के साथ गेंद डिलीवर की। इंग्लैंड के बल्लेबाज निक नाइट उस वक्त स्ट्राइक पर थे। गेंद जैसे ही निक नाइट को छकाती हुई विकेटकीपर के दस्तानों में पहुंची, वैसे ही स्पीडोमीटर पर दर्ज आंकड़ा देखकर हर कोई हैरान रह गया। स्क्रीन पर गेंद की गति 161.3 किलोमीटर प्रति घंटा दिखाई दे रही थी। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में फेंकी गई सबसे तेज गेंद बन गई और यह विश्व रिकॉर्ड पिछले 23 सालों से पूरी तरह सुरक्षित है।
1970 के दशक में जेफ थॉमसन का खौफ
क्रिकेट में गति के इस सफर में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की भूमिका हमेशा से सबसे आगे रही है। इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो 1970 के दशक में ऑस्ट्रेलिया के पेसर जेफ थॉमसन ने अपनी अनोखी और अनपेक्षित गेंदबाजी एक्शन से दुनिया भर के बल्लेबाजों के मन में डर पैदा कर दिया था। उस दौर में बल्लेबाजों के पास आधुनिक सुरक्षा उपकरण और बेहतर हेलमेट मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद जेफ थॉमसन ने 160.6 किलोमीटर प्रति घंटे की खौफनाक रफ्तार से गेंद फेंककर तहलका मचा दिया था। उनकी तेज तर्रार और अप्रत्याशित उछाल लेती गेंदों का सामना करना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक कठिन परीक्षा जैसा था।
ब्रेट ली और शॉन टैट की संयुक्त तेजी
समय के साथ क्रिकेट का स्वरूप बदला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से तेज गेंदबाजों के निकलने का सिलसिला जारी रहा। 21वीं सदी की शुरुआत में ब्रेट ली के रूप में दुनिया को एक ऐसा तेज गेंदबाज मिला, जिसकी आक्रामक गेंदबाजी और तीखी मुस्कान विरोधियों को असहज कर देती थी। साल 2005 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए एक मैच में ब्रेट ली ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए गेंद फेंकी। जब गेंद पिच से टकराकर आगे निकली, तो स्पीडोमीटर पर दर्ज आंकड़ा 161.1 किलोमीटर प्रति घंटा था।
ब्रेट ली की इस उपलब्धि के कुछ वर्षों बाद ऑस्ट्रेलिया के ही एक और तेज गेंदबाज शॉन टैट ने अपनी अनरिफाइंड स्पीड का प्रदर्शन किया। साल 2010 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए वनडे मुकाबले में शॉन टैट ने 161.1 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंद फेंककर ब्रेट ली के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। शॉन टैट की इस 161.1 किमी प्रति घंटे की गेंद ने उन्हें इतिहास का संयुक्त रूप से दूसरा सबसे तेज गेंदबाज बना दिया, जिसके सामने इंग्लैंड के बल्लेबाज बेबस नजर आए थे।
मिचेल स्टार्क की आधुनिक यॉर्कर और स्विंग रफ्तार
ऑस्ट्रेलियाई पेस अटैक की यह परंपरा आधुनिक दौर में भी कायम रही। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने साल 2015 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए एक टेस्ट मैच के दौरान अपनी रफ्तार से तहलका मचाया। मिचेल स्टार्क ने स्विंग और सटीक यॉर्कर के कॉम्बिनेशन के साथ 160.4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी। मिचेल स्टार्क ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक दौर के क्रिकेट में भी रफ्तार का जादू बरकरार है। उनकी हवा में लहराती और तेज गति से आती गेंदें आज भी दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।



















